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अणुव्रत विकास का राजपथ है – शासनश्री साध्वीश्री सत्यप्रभाजी

ब्यूरो चीफ सन्तोष कुमार गर्ग
बालोतरा। अणुव्रत स्थापना दिवस के 78वें वर्ष का कार्यक्रम स्थानीय तेरापंथ भवन में मनाया गया। साध्वी श्री सत्यप्रभाजी ने कहा कि अणुव्रत विकास का राजपथ है। अगर आदमी अपने जीवन में अणुव्रतों को धारण करता है तो अपने आप को अनेक बुराईयों से बचा सकता है। साध्वी श्री श्रुतप्रभाजी ने आचार्य तुलसी द्वारा प्रतिपादित इस अणुव्रत आन्दोलन का विस्तार से विवेचन किया और कहा कि अणुव्रत इंसान को इंसान बनाने की प्रक्रिया है। साध्वी श्री ध्यानप्रभाजी ने अणुव्रत के नियमों का पालन करने की बात कही। छोटे-छोटे व्रत जीवन की दिशा एवं दशा बदल देते है। अणुव्रत एक राजमार्ग है। कार्यक्रम का शुभारंभ साध्वीश्री जी ने नमस्कार महामंत्र द्वारा किया। अणुव्रत समिति के अध्यक्ष जवेरीलाल सालेचा ने कहा कि अणुव्रत नैतिक चेतना को जगाने वाला उपक्रम है। हम अपने आपको इससे संयममय बना सकते है। अणुव्रतसेवी ओमप्रकाश बांठिया ने अणुव्रत को विस्तार से बताते हुए कहा कि अणुव्रत जीवन के अनेक पहलुओं को छूने वाला उपक्रम है। जीवन के हर मोड़ में हमे जागृत करने वाला एक ऐसा ठोस जीवन उपयोगी मंत्र है जो हमारी सुरक्षा करता है। हमें इसे घर-घर तक पहुंचाना है। कार्यक्रम में तेरापंथ सभाध्यक्ष महेन्द्र वैद, तेरापंथ महिला मण्डल अध्यक्षा चंचलदेवी भंडारी, तेरापंथ युवक परिषद् अध्यक्ष संदीप रेहड़ आदि ने अणुव्रत स्थापना दिवस पर अपनी उपस्थिति दर्ज की। इस कार्यक्रम के दौरान तेरापंथ धर्मसंघ के आठवें आचार्य श्री कालुगणी का जन्मदिवस, पारमार्थिक शिक्षण संस्थान का शुभारम्भ, अणुव्रत आन्दोलन का प्रवर्तन एवं पर्यावरण दिवस पर सभी साध्वीवृन्द ने अपनी भावनाएं व्यक्त की। अणुव्रत समिति के अध्यक्ष जवेरीलाल सालेचा ने पधारे हुए सभी महानुभावों का आभार व्यक्त किया। अणुव्रत विश्व भारती पूर्व राष्ट्रीय सहमंत्री ओमप्रकाश बांठिया ने अणुव्रत के प्रारम्भ से विश्व भारती के होने वाले कार्यक्रमों की जानकारी दी एवं अणुव्रत देश के लिए कितना उपयोगी इस बारे में विस्तृत रूप से बताया गया। अतिरिक्त जिला कलेक्टर भुवनेश्वर सिंह चौहान ने कहा कि आचार्य श्री तुलसी के इस अवधान को जन-जन तक पहुंचाने के लिए हमें अणुव्रत के नियमों पर चलना होगा। उन्होने कहा सुधरे व्यक्ति समाज व्यक्ति से राष्ट्र स्वयं सुधरेगा यही अणुव्रत की पहचान है। पूर्व सर संघचालक सुरंगीलाल सालेचा ने अणुव्रत की व्याख्या करते हुए कहा कि श्रुत और ध्यान द्वारा सत्य की साधना ही अणुव्रत हैं। कार्यसमिति सदस्य मुकेश सालेचा ने कार्यक्रम का सफल संचालन किया।

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