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शमशान घाट पर रंग भरे होली की पूर्व संध्या पर ऐतिहासिक ठहाका हास्य महामूर्ख कवि सम्मेलन में उमडे लोग

स्वर्ग लोक से पधारे कवियों ने जमाया रंग, लगे ठहाके, बुरा न मानो होली है

बस्ती से वेदान्त सिंह

 

बस्ती (वेदांत टाइम्स/बस्ती टाइम्स 24)। आत्म प्रशस्ति सेवा संस्थान उ.प्र. द्वारा कुंआनो नदी स्थित शमशान घाट पर रंग भरे होली की पूर्व संध्या पर ऐतिहासिक ठहाका हास्य महामूर्ख कवि सम्मेलन अभूतपूर्व नव युवक बालसोम गौतम एवं मूर्खाधिराज विनोद कुमार उपाध्याय के संयोजन में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में शहर के अनेक सम्भ्रान्त श्रोताओं, भूत प्रेत और स्वर्ग लोक से अवतरित हुये कवियों ने हिस्सा लिया।

भूत प्रेत होलिका वंदना के साथ आरम्भ महामूर्ख कवि सम्मेलन के मुख्य अतिथि आधुनिक सुविधाओं से लैश पुष्पक विमान से लाये गये प्रसिद्ध मूर्ख सम्राट भयंकर ख्याति लब्ध नव युवक डा. वी.के. वर्मा ने कहा कि धरती पर कवि सम्मेलन तो होते ही रहते हैं किन्तु होली के कवि सम्मेलन में पूर्वजों, आत्माओं, भूत प्रेतों का जो मिलन होता है वह अलौकिक है। ऐसी पम्परायें होली के गुझिया की मिठास बढा देती है। उनकी रचना ‘ एक नर्स के गाल पर मलने लगा गुलाल, त्यो ही पत्नी हो गई बहुत क्रोध से लाल, रंग में भंग हो गया। इस पर भूत प्रेतांें के साथ बड़ी संख्या में बैठी महिला श्रोताओं ने ठहाके लगाये।

कार्यक्रम का संचालन मूर्ख सम्राट हास्य व्यंग्य के प्रसिद्ध एवं कुख्यात कवि डा. राम कृष्ण लाल जगमग ने संयोजक मूर्खाधिराज विनोद उपाध्याय की सुनियोजित दुर्व्यव्यवस्था के कारण बिना पिये ही किया, इस बार वे भांग के नशे में थे। कवियों के आक्रोश पर उन्होने पीने-पिलाने की बेहतर व्यवस्था नहीं करायी जिसकी भूत प्रेतों ने भी कड़ी निन्दा किया। संचालन कर रहे डा. जगमग ने कुछ यूं कहा- ‘होली के दिन भंग पी, झूम रहे घनश्याम, राधा से कहने लगे अम्मा तुम्हें प्रणाम’ इस पर श्रोताओं की पक्ति में बैठी उनकी धर्मपत्नी ने सड़े टमाटर फेंककर होली की खुशियों को साझा किया। विशेष अतिथि डा. त्रिभुवन प्रसाद मिश्र, श्याम प्रकाश शर्मा, ने भूत प्रेतों की कविता का आनन्द उठाया। महामूर्ख कवि सम्मेलन में स्वर्ग लोक से डा. सोहनलाल द्विवेदी, काका हाथरसी, निर्भय हाथरसी, बेढब बनारसी, बेधड़क बनारसी, सूड फैजाबादी, पं. चन्द्रशेखर मिश्र, रंगपाल, द्विजेश जी, पं. श्याम नरायन पाण्डेय, गोपाल जी शुक्ल, रामनरायन पाण्डेय पागल, गोपालदास नीरज, पं. केशरीधर द्विवेदी, लक्षराम भट्ट, सर्वेश्वर दयाल सक्सेना, श्याम तिवारी, बाल सोम गौतम, अब्बास अली बास, श्यामलाल यादव, शैल चतुर्वेदी, शरद जोशी, सरस्वती शुक्ल ‘चंचल’ रफीक सादानी, अदम गोण्डवी, विकल साकेती, राम नरायन पाण्डेय ‘पागल’ पं. मातादीन त्रिपाठी ‘दीन’, सुरेशधर द्विवेदी भ्रमर, गोपाल जी शुक्ल, डा. मुनिलाल उपाध्याय ‘सरस’, मुरली मनोहर सिंह,हरिनाथ उपाध्याय अटल, ताराशंकर नाशाद, चिन्ताहरण पाण्डेय ‘फूल’, घनश्याम प्रजापति ‘दंगल’ भिल्लड बांसवी आदि कवि विशेष विमान से अमहट तट पर पहुंचे तो उनका आयोजक मण्डल ने फूलों के रंगों से स्वागत किया।

स्वर्ग लोक से पधारे हास्य व्यंग्य समा्रट काका हाथरसी ने ज्यों ही सुनाया ‘ इस सादगी पर कौन न मर जाय ऐ काका लड़ती है मगर हाथ मंे बेलन भी नही है, इस रचना पर उपस्थित जीवित कवियों, श्रोताओं ने उन्हे स्मरण किया, काकी ने वास्तव में बेलन उठा लिया जिससे कुछ देर कवि सम्मेलन बाधित रहा। इस्लाम सालिक की रचना- कमस कम तुम्ही मत पड़ो मेरे पीछे, मेरे पीछे सारा जमाना पड़ा है, पर लोगों ने वाह-वाह कहा। हास्य रसावतार सूड फैजाबादी ने कुछ यूं कहा- पत्नी सुनियोजित बवाल है, प्रेमिका तस्करी का माल है’ इस पर महिलाओं ने सड़ा आलू फेंककर उनका स्वागत किया। स्वर्ग से पधारे गोपाल जी शुक्ल की रचना ‘ यदि मेरे दस बच्चे होते, एक व्याहता चीन, एक जापान, एक भूटान में’ आदि पर लोगों ने धैर्य रखकर उन्हें सुना। सत्येन्द्रनाथ मतवालाने काव्य पाठ से इंकार कर दिया। स्वर्ग से समाचार संकलन करने आये वरिष्ठ पत्रकार दिनेश चन्द्र पाण्डेय ने कहा कि हैसियत न हो तो ऐसे आयोजन न करे। कुव्यवस्था दुर्भाग्यपूर्ण है।

इसी कड़ी में मूर्खाधिराज डा. शंकर सिंह की रचना ‘पत्नी बोली आपको नहीं हमारा डर, रंग खेलने के लिये गये पडोसन घर, डा. ज्ञानेन्द्र द्विवेदी दीपक की रचना- दसन जब टूट जाते हैं, मसूढे काम आते हैं’ जवानी जब भटकती है तो बूढे काम आते है। इस पर श्रोताओं ने उन्हें परमबीर चक्र से सम्मानित करने का पुरजोर मांग किया। डा. अनुराग मिश्र ‘गैर’ की रचना- अपनों ने धोखा दिया इतना मुझे गैर से मैने मोहब्बत कर लिया’ पर श्रोताओं में बैठी उनकी पत्नी ने भरी सभा में माये जाने की धमकी दे दिया। विनोद उपाध्याय की रचना- चोली रंगाई चुनरी रंगाई, न उठबू तो गोनरी रंगाई, फागुन में बोला भौजी का का रंगाई’ को सुनकर अनेक कोयल, पपीहों के मन में प्रेम में पागल हो जाने का विचार आया।

इसी कड़ी में डा. ज्ञानेन्द्र द्विवेदी दीपक की रचना- दसन जब टूट जाते हैं, मसूढे काम आते हैं’ जवानी जब भटकती है तो बूढे काम आते है। इस पर श्रोताओं ने उन्हें परमबीर चक्र से सम्मानित करने का पुरजोर मांग किया। डा. अनुराग मिश्र ‘गैर’ की रचना- अपनों ने धोखा दिया इतना मुझे गैर से मैने मोहब्बत कर लिया’ पर श्रोताओं में बैठी उनकी पत्नी ने भरी सभा में माये जाने की धमकी दे दिया। प्रदीप चन्द्र पाण्डेय ने कहा’ बुनियादी संघर्षो वाले जाने किधर गये, अफजल हुसेन अफजल ने कुछ यूं कहा कबिरा तेरे दोहे सबके तन-मन को महकाते, इस मानव जीवन पर अब तक प्रेम सुधा बरसाते‘ सुनाकर वाहवाही लूटी। कवि सम्मेलन का समाचार संकलन करने आये बृजेश पाण्डेय, संजय विश्वकर्मा, स्कन्द शुक्ल, हरि शंकर तिवारी, जयंत मिश्र, संदीप गोयल, देवेन्द्र पाण्डेय, अनुराग श्रीवास्तव, संदीप शुक्ल, दिलीप चन्द्र पाण्डेय, राकेश गिरी, राजेश पाण्डेय, रितिक आदि ने स्वर्ग लोक से आये कवियों के विशेष आदेश पर कविता बांचने की रस्म अदायगी किया। रमेश मिश्र, धनंजय श्रीवास्तव, वशिष्ठ पाण्डेय, अनिल श्रीवास्तव आदि ने शानदार फोटो खीचे। स्वर्ग लोग से आये कवियों ने उनके कैमरे छीन लिये। बड़ी मशक्कत के बाद उसे लौटाया गया।

 कार्यक्रम में डा. सुरेश उजाला, वेदान्ती पं. चन्द्रबली मिश्र, सागर गोरखपुरी, अफजल हुसेन अफजल, डा. राजेन्द्र सिंह, अनवर पारसा, जय प्रकाश गोस्वामी, डा. ओ.पी. वर्मा ‘ओम’ पेशकार मिश्र, नवनीत पाण्डेय, सुशील सिंह पथिक, हरिकेश प्रजापति, दीपक सिंह प्रेमी, शाद अहमद ‘शाद’ ताजीर बस्तवी, सतीश चन्द्र आदि की उपस्थिति और रचनाओं पर रंग भरा वाद विवाद आखिरी क्षणों तक चलता रहा।

मुख्य अतिथि डा. वी.के. वर्मा ने प्रत्येक कवियों को लिफाफे की जगह एक-एक बोतल और रंग भेंट किया कवियों ने सराहा। े पीने पिलाने की समुचित व्यवस्था के साथ कवि सम्मेलन सम्पन्न हुआ। (बुरा न मानो होली है)।

Vedant Singh

Vedant Singh S/O Dr. Naveen Singh Mo. Belwadandi Po. Gandhi Nagar Basti Pin . 272001 Mob 8400883291 BG . O Positive vsvedant12345@gmail.com

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