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आमवात “रूमेटाइड अर्थराइटिस” की जड़ पाचन में – योगाचार्य डॉ रमेश चंद्रा का व्याख्यान

वेदान्त सिंह की रिपोर्ट
प्रयागराज (वेदांत टाइम्स/बस्ती टाइम्स 24)। आमवात यानी रूमेटाइड अर्थराइटिस को लेकर योगाचार्य डॉ रमेश चंद्रा (राष्ट्रीय अध्यक्ष, विश्व संवाद परिषद योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा प्रकोष्ठ, भारत) ने विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि हर जोड़ का दर्द साधारण वात नहीं होता। यदि सुबह तेज जकड़न, भूख की कमी, शरीर में भारीपन और तेल लगाने से दर्द बढ़ने जैसे लक्षण हों, तो पहले “आम” पर ध्यान देना आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि आयुर्वेद में आमवात = आम + वात। “आम” वह अधपचा, चिपचिपा विषैला तत्व है जो कमजोर पाचन (मंद अग्नि) के कारण बनता है। यह रक्त के माध्यम से जोड़ों में पहुंचकर सूजन, दर्द और जकड़न पैदा करता है। ऐसे में केवल तेल मालिश करने से लाभ नहीं, बल्कि प्रारंभिक अवस्था में सूजन बढ़ सकती है।
तेल से दर्द क्यों बढ़ता है?
डॉ. चंद्रा के अनुसार आम पहले से ही भारी और स्निग्ध गुण वाला होता है। ऊपर से तेल लगाने पर सूजन और भारीपन बढ़ सकता है। इसलिए आमवात में प्रारंभिक उपचार “आम” हटाने पर केंद्रित होना चाहिए, न कि सीधे वात शांत करने पर।
आमवात के प्रमुख लक्षण
सुबह उठते ही तीव्र जकड़न
बिच्छू के डंक जैसा दर्द
हल्की गर्म सिकाई से राहत
तेल से दर्द बढ़ना
भूख कम लगना
जीभ पर सफेद परत
शरीर में भारीपन व हल्का ज्वर
कारण क्या हैं?
डॉ. चंद्रा ने बताया कि विरुद्ध आहार (जैसे दूध के साथ नमकीन), अत्यधिक तला-भुना भोजन, जरूरत से ज्यादा पानी, बार-बार खाना, भोजन के बाद सोना या बिना पचे भोजन पर भारी व्यायाम – ये सभी आम बनने के प्रमुख कारण हैं। लंबे समय तक बैठे रहना भी मेटाबॉलिज्म को धीमा कर आमवात को बढ़ावा देता है।
आधुनिक विज्ञान से संबंध
उन्होंने स्पष्ट किया कि आयुर्वेद में वर्णित आमवात को आधुनिक चिकित्सा विज्ञान काफी हद तक Rheumatoid arthritis से जोड़कर देखता है। यह एक ऑटोइम्यून रोग है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली अपने ही जोड़ों पर आक्रमण करती है। इसमें सूजन, दर्द, सुबह 30 मिनट से अधिक जकड़न तथा ESR, CRP जैसे सूचक बढ़े मिलते हैं।
डॉ. चंद्रा ने कहा कि आज “गट–इम्यून एक्सिस” (Gut–Immune Link) पर हो रहे शोध भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि रोग की जड़ पाचन तंत्र से जुड़ी हो सकती है।
उपचार की दिशा
आयुर्वेदिक दृष्टिकोण के अनुसार उपचार के चार चरण बताए गए:
लघु आहार व लंघन (हल्का उपवास)
अग्नि दीपान (पाचन सुधार)
शोधन (जैसे विरेचन)
सूजनरोधी औषधियों का प्रयोग
उन्होंने मूंग सूप, चावल का मांड, करेला, परवल जैसी हल्की व कड़वी सब्जियों के सेवन की सलाह दी। साथ ही गुनगुना पानी, सूखी गरम सिकाई और सोंठ, काली मिर्च, पिपली जैसे मसालों के सीमित प्रयोग को उपयोगी बताया।
औषधियों में गिलोय, सोंठ, गुग्गुल, एरंड तेल तथा अमृतोत्तर काढ़ा आदि का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी औषधि का सेवन चिकित्सक की सलाह से ही करना चाहिए।
क्या करें, क्या न करें
अवॉइड करें: दही, ठंडा पानी, अत्यधिक तला-भुना भोजन, दिन में सोना, बार-बार खाना।
अपनाएं: हल्का भोजन, सही भूख लगने पर ही खाना, सूखी गरम सिकाई, नियमित हल्का व्यायाम।
निष्कर्ष
योगाचार्य डॉ रमेश चंद्रा ने कहा कि आमवात केवल जोड़ का रोग नहीं, बल्कि पूरे शरीर की सूजन से जुड़ा विकार है। जब तक पाचन सुधरेगा नहीं, दर्द स्थायी रूप से समाप्त नहीं होगा। उन्होंने लोगों से अपील की कि स्वयं उपचार करने के बजाय विशेषज्ञ की सलाह लेकर संतुलित जीवनशैली अपनाएं।

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