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संत रविदास

*संत रविदास*
सर्वधर्म समभाव समता के आधार रैदास संत।
आध्यात्म तत्वदर्शी ब्रह्मज्ञानी मर्मज्ञ बल वंत।।
छुआछूत पाखण्ड भेदभाव समूल किया अंत।
काशी गंगा तट जन्मे पवित्र निर्गुण रैदास संत।।
अष्टदलकमल पंचतत्त्वज्ञानी परम पूज्य संत।
ईश्वरीय प्रेम को समर्पित रहे सदा रैदास संत।।
आत्मिक पवित्रता की रचनाएँ रची रैदास संत।
जातीय विषमता जगत से मिटाई रैदास संत।।
तत्वज्ञान सिंचित किया जिज्ञासुओं में सदभाव।
हृदय प्रेम से लाखों जीवों की पार लगाई नाव।।
रग रग में रचा बसा प्रेम महारस भक्ति का चाव।
आध्यात्मिक उन्नति पवित्र आत्मानुभूति भाव।।
काम क्रोध लोभ मद मोह घृणा कुरीति मिटाई।
विलक्षण सिद्धियों की असीम क्षमता दिखाई।।
मानसिक चेतना जागृति की उपासना बताई।
ईश भक्तों को गहन रहस्यों की युक्ति सिखाई।।
निर्मल मन दिव्य गुणों में सिद्ध संत रैदास।
मन कर्म वचन में सात्विक है पावन संदेश।।
सदगुणी हृदयस्पर्शी जग प्रसिद्ध रैदास नाम।
संत शिरोमणि रैदास को वंदन नमन प्रणाम।।
*प्रस्तुति:-*
*रवीन्द्र कुमार राणा*
*(साहित्यकार एवं प्रकृति प्रेमी)*

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