धर्मपन्नामध्य प्रदेश
श्री कृष्ण का जीवन संपूर्ण पवित्र, संपूर्ण निर्विकार

लोकेशन=पन्ना।मध्य प्रदेश पन्ना
संवाददाता=सुधीर अग्रवाल के साथ कैमरा मेन मुकेश रजक
*श्री कृष्ण का जीवन संपूर्ण पवित्र, संपूर्ण निर्विकार*
अंदर के कारागार से मुक्त बने
श्री कृष्ण जैसे दिव्य गुणों को धारण करें ब्रह्माकुमारी बहन
ब्रह्माकुमारी विद्यालय में जन्माष्टमी का उत्सव बड़े ही उमंग उत्साह एवं आध्यात्मिक रीति से मनाया गया बहन जी ने सभी को जन्माष्टमी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि श्री कृष्ण का जीवन संपूर्ण निर्विकारी था जन्माष्टमी भारतीय संस्कृति का ऐसा महान पर्व है जो केवल श्री कृष्ण के जन्म की स्मृति नहीं बल्कि मनुष्य को अपने भीतर छिपी दिव्यता को जागृत करने की प्रेरणा देता है आध्यात्मिक दृष्टि से श्री कृष्ण का जन्म उस समय का प्रतीक है जब जीवन के अंधकार की बीच आत्मा में ज्ञान,पवित्रता, प्रेम और सत्य का प्रकाश प्रकट होता है
कहां जाता है कि श्री कृष्ण का जन्म कारागार में आधी रात को हुआ इसके पीछे गहरा अध्यात्मिक संदेश छुपा है कारागार हमारे उन बंधनो का प्रतीक है जिनमें आत्मा क्रोध, लोभ,मोह,अहंकार, इर्षा और नकारात्मक विचारों के कारण बंध जाती है आधी रात जीवन के उस गहन अंधकार का प्रतीक जब चारों ओर परिस्थितियों कठिन दिखाई देती हैं लेकिन ऐसे ही समय में ज्ञान का प्रकाश परमात्मा शिव लाते हैं अर्थात जब जीवन में अंधकार बढ़ता है तब भीतर के प्रकाश को जगाने की आवश्यकता और भी बढ़ जाती है, ऐसे में परमात्मा सच्चा गीता ज्ञान देकर मनुष्य को श्री कृष्ण की दुनिया में चलने योग बना रहे हैं ज्ञान मुरली जीवन की समस्याओं का समाधान कर उसे दिव्यता और संपूर्णता की ओर ले आध्यात्मिक ज्ञान दे रहे हैं अतः आज हम सभी संकल्प करेंगे कि श्री कृष्णा के समान हर परिस्थितियों का सामना करके अपने जीवन को संपूर्ण निर्विकारी बनाएं, मनोरम झांकी ने सबका मन मोह लिया,

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