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गुरु पूर्णिमा पर नेपाल के प्रथम उपराष्ट्रपति के विशिष्ट सलाहकार का खंदरा आश्रम में आगमन

राजस्थान हेड डॉ राम दयाल भाटी
# **गुरु पूर्णिमा पर नेपाल के प्रथम उपराष्ट्रपति के विशिष्ट सलाहकार का खंदरा आश्रम में आगमन**
## **आश्रम पीठाधीश्वर श्री श्री 1008 श्री रामनाथ महाराज से प्राप्त किया आशीर्वाद**
**सिरोही/खंदरा।** गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर नेपाल के प्रथम उपराष्ट्रपति के विशिष्ट सलाहकार, एडवोकेट **डॉ. कुलदीप प्रसाद शर्मा** (ईस्ट-वेस्ट लॉ फर्म, काठमाण्डू, नेपाल) ने **अन्तर्राष्ट्रीय समरसता मंच** के प्रदेश प्रवक्ता **जम्बूद्वीप पद्मश्री इंजी. नरेन्द्र कुमार पाण्डेय (एडवोकेट)** एवं **मंथन शर्मा** के साथ **बाबा रामदेव आश्रम, खंदरा (जिला सिरोही)** में आगमन किया।
आश्रम पहुँचने पर प्रतिनिधिमंडल ने सर्वप्रथम ब्रह्मलीन संत **पोमजी महाराज** की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किए तथा विश्व शांति, सामाजिक समरसता एवं मानव कल्याण की कामना की।
इसके पश्चात् आश्रम के पीठाधीश्वर **श्री श्री 1008 श्री रामनाथ महाराज** का माल्यार्पण कर उनका अभिनंदन किया गया तथा उन्हें नेपाल की पारंपरिक सम्मान-टोपी, शाल एवं श्रीफल भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर डॉ. कुलदीप प्रसाद शर्मा ने नेपाल के प्रथम उपराष्ट्रपति के विशिष्ट सलाहकार कार्यालय की ओर से शुभकामना एवं सद्भाव का संदेश भी भेंट किया।
गुरु पूर्णिमा महोत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं एवं भक्तों की उपस्थिति रही। आश्रम परिसर भक्तिमय वातावरण से गुंजायमान रहा तथा विभिन्न धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के उपरान्त आश्रम में पधारे सभी श्रद्धालुओं एवं अतिथियों के लिए महाप्रसाद (प्रसादी) की व्यवस्था की गई।
अपने संबोधन में **डॉ. कुलदीप प्रसाद शर्मा** ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोच्च माना गया है। गुरु ही मनुष्य को अज्ञान के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाता है। उन्होंने कहा कि **”गुरु बिन ज्ञान न होत गुसाईं”** केवल एक कहावत नहीं, बल्कि भारतीय जीवन-दर्शन का मूल संदेश है। गुरु के सान्निध्य में ही सच्चे ज्ञान, संस्कार एवं जीवन के उद्देश्य की प्राप्ति संभव होती है। उन्होंने कहा कि भारत और नेपाल की साझा वैदिक एवं आध्यात्मिक परम्पराएँ दोनों देशों के सांस्कृतिक संबंधों को और अधिक सुदृढ़ बनाती हैं तथा विश्व बंधुत्व की भावना को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
**अन्तर्राष्ट्रीय समरसता मंच** के प्रदेश प्रवक्ता **जम्बूद्वीप पद्मश्री इंजी. नरेन्द्र कुमार पाण्डेय (एडवोकेट)** ने अपने उद्बोधन में कहा कि खंदरा आश्रम पहुँचकर उन्हें आध्यात्मिक शांति एवं आत्मिक संतोष की अनुभूति हुई। उन्होंने कहा कि ब्रह्मलीन संत **पोमजी महाराज** की तपस्या एवं आध्यात्मिक साधना के कारण यह आश्रम आज एक शक्तिपीठ के रूप में प्रतिष्ठित है। भारत की पुण्यभूमि सदैव ऋषियों, मुनियों एवं संतों की तपस्थली रही है। ऐसे महापुरुषों का तप एवं आध्यात्मिक ऊर्जा उनके ब्रह्मलीन होने के उपरान्त भी समाज एवं लोककल्याण के लिए प्रेरणास्रोत बनी रहती है।
कार्यक्रम के दौरान अनेक संत-महात्माओं, समाजसेवियों एवं श्रद्धालुओं ने गुरु-शिष्य परम्परा, भारतीय संस्कृति तथा सामाजिक समरसता के संरक्षण एवं संवर्धन का संकल्प व्यक्त किया।

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