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योगसाधना और आध्यात्मिक चिंतन मनुष्य जीवन के लिए आवश्यक:डॉ.रेनूशरण 

Yoga practice and spiritual contemplation are essential for human life: Dr. Renusharan

ब्यूरो रिपोर्ट… अनीता पाल

हल्द्वानी…योगसाधना से निश्चित ही मानसिक और भावनात्मक रूप हम ईश्वर भक्ति से ईश्वर को प्राप्त कर सकते है। भगवान सब जगह है और सब देख रहे है।इसलिए अभी समय है अपना लक्ष्य निर्धारित करो।कब करोगे जब प्राण निकल जाएगे। फिर नरक गामी बनाना नहीं चाहते तो निरंतर अपनी जिह्वा पर श्रीहरिराम नाम का चिंतन अपना उद्देश्य स्पष्ट और एकात्म है: ईश्वर परम सर्वव्यापी हैं, और जीवन की सच्ची सफलता तथा शांति की प्राप्ति केवल आध्यात्मिक चेतना जागृत कर ईश्वर भक्ति के माध्यम से सम्भव है। डॉ.रेनूशरण का मानना है कि नाम‑जप, कीर्तन और भगवद्ग्यान का नित्य अभ्यास हर व्यक्ति के अंदर सकारात्मक परिवर्तन लाता है और जीवन के प्रारब्ध को सुंदर रूप देने में सहायक होता है।

हमारा मूल संदेश योगसाधन से ईश्वर मय एकाग्र भावनात्मक रखें,

ईश्वर सर्वव्यापी हैं: जो कुछ भी इस ब्रह्मांड में घटित होता है, वह ईश्वर की इच्छानुसार होता है। इसलिए जीवन में आने वाली घटनाओं को समझदारी और श्रद्धा के साथ स्वीकार करना चाहिए।

प्रारब्ध और श्रेय: जो कुछ होना निश्चित है, वह प्रारब्ध है; परंतु हमारी योगसाधना,भक्ति, श्रम और दृष्टिकोण से प्रारब्ध के अनुभवों को सुगम और गुणकारी बनाया जा सकता है।

समानता का भाव किसी को नीचा आँकना अज्ञानता है। सभी जीवों में ईश्वर का वास और स्पर्श है — इसलिए सबका सम्मान करना आवश्यक है।

अभ्यास और मार्ग

नाम‑जप हर दिन सरल और निरंतर नाम‑जप करने से मन को एकाग्रता मिलती है, भय घटता है और आध्यात्मिक शक्ति उत्पन्न होती है। हमारा मानना है कि योगसाधन अद्भुत शक्ति है — जो निरंतर किये जाते रहने पर मन को ईश्वर की ओर स्थिर कर देता है।ईश्वर की आराधना,

भजन सामूहिक अभ्यास से ह्रदय विकसित होता है, सहानुभूति और एकाग्र चित की भावना बढ़ती है, और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है।जिस प्रकार हम

ईश्वर का नित्य भगवद्गीतानुशासन और अन्य शास्त्रों का नियमित अध्ययन करते हैं तब जीवात्मा का मनोबल बढ़ाता है और जीवन के निर्णयों में प्रकाश डालता है।

प्रार्थना और सतत स्मरण ध्यानयोग की निरंतर प्रार्थना और ईश्वर के स्मरण से ईश्वर भक्ति जीवित रहती है जब मन ईश्वर भक्ति‑मय होता है तो ईश्वर हमारे ही पास बने रहते हैं।

सामूहिक योगसाधन

विशेष रूप से बहनों को एकत्रित कर उन्हें आध्यात्मिक प्रशिक्षण, नाम‑जप और सेवा के कार्यों के माध्यम से सशक्त बनाता है। नारी शक्ति योगसाधना से अपने को जागृत कर वह न केवल अपने परिवार का कल्याण कर सकती है, बल्कि समाज में भी सकारात्मक बदलाव ला सकती है। सामूहिक योग, भजन‑कीर्तन और चिन्तन से सशक्त करुणा, संकल्प और धैर्य का विकास होता है।

आचरण के मूल सिद्धांत

नम्रता और सहानुभूति रखें।अहंकार से बचें।

हर क्रिया को ईश्वर समर्पित भाव से करें।

नियमितता बनाए रखें। योगसाधना ,शास्त्र‑पठन को दिनचर्या बनायें।

समापन व आह्वान

का संदेश सरल पर गहन है,जीवन का पहला और अंतिम लक्ष्य एक ही है — ईश्वर की शरण में जाना। हृदय को ईश्वर में केन्द्रित कर, नाम‑जप, कीर्तन और भगवद् ज्ञान के नित्य अभ्यास से आत्मिक उन्नति और सफल जीवन सुनिश्चित है। सभी बहनों से आग्रह है कि इस पथ पर दृढ़ता से चलें, एक-दूसरे का सहयोग करें और उपर्युक्त बताई हुई साधनाओं को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बनायें।

Anita Pal

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