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बालोतरा में भव्य सुवर्णप्राशन शिविर आयोजित
96 बच्चों ने लिया आयुर्वेदिक सुवर्णप्राशन का लाभ, रोग प्रतिरोधक क्षमता एवं मानसिक विकास हेतु दी गई आयुर्वेदिक औषधि

ब्यूरो चीफ सन्तोष कुमार गर्ग
बालोतरा, 21 जून 2026।
आरोग्य भारती, बालोतरा द्वारा पुरानी ज्ञानदीक्षा स्कूल, बाड़मेर कैलेंडर रोड, बालोतरा में एक भव्य एवं सफल सुवर्णप्राशन शिविर का आयोजन किया गया। यह विशेष आयुर्वेदिक स्वास्थ्य कार्यक्रम माननीय कुलपति महोदय प्रोफेसर डॉ. गोविंद सहाय शुक्ला के प्रेरणादायी दिशा-निर्देशन एवं मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का संचालन एवं नेतृत्व स्नातकोत्तर आयुर्वेद महाविद्यालय के बाल चिकित्सा विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. हरीश कुमार सिंघल द्वारा किया गया।
इस अवसर पर आयुर्वेद के प्राचीन एवं वैज्ञानिक सिद्धांतों पर आधारित सुवर्णप्राशन संस्कार के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि यह बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने, स्मरण शक्ति एवं बौद्धिक विकास को प्रोत्साहित करने तथा शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने में अत्यंत लाभकारी है। शिविर में उपस्थित अभिभावकों को सुवर्णप्राशन के दीर्घकालिक लाभों तथा बच्चों के नियमित आयुर्वेदिक संरक्षण की आवश्यकता के बारे में भी विस्तार से जानकारी प्रदान की गई।
कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ. रुशिकेश शिवतारे एवं डॉ. अशोक यादव का विशेष योगदान रहा। दोनों चिकित्सकों ने बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण, सुवर्णप्राशन वितरण एवं अभिभावकों को स्वास्थ्य परामर्श देने में सक्रिय भूमिका निभाई।
इस सुव्यवस्थित एवं जनहितकारी शिविर में बालोतरा क्षेत्र के कुल 96 बच्चों ने सहभागिता कर सुवर्णप्राशन का लाभ प्राप्त किया। शिविर के दौरान बच्चों एवं अभिभावकों में विशेष उत्साह एवं जागरूकता देखने को मिली। अभिभावकों ने आयुर्वेद आधारित इस प्रकार के आयोजनों की सराहना करते हुए इसे बच्चों के समग्र स्वास्थ्य संवर्धन हेतु अत्यंत उपयोगी बताया।
आरोग्य भारती, बालोतरा के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं का भी आयोजन की सफलता में महत्वपूर्ण योगदान रहा। कार्यक्रम में आरोग्य भारती बालोतरा के पालक श्री सुरेंद्र जैन, उपाध्यक्ष श्री केवलचंद छाजेड़, श्री प्रवीण पुंगड़िया, श्री रतन छाजेड़, श्री महेश अग्रवाल, श्री दिलीप गुप्ता एवं श्री इन्दर सिंह ने व्यवस्थाओं, जनसंपर्क एवं आयोजन समन्वय में सक्रिय सहयोग प्रदान किया।
यह सुवर्णप्राशन शिविर न केवल बच्चों के स्वास्थ्य संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हुआ, बल्कि समाज में आयुर्वेद के प्रति विश्वास एवं जागरूकता बढ़ाने का भी प्रभावी माध्यम बना। आयोजन के माध्यम से “स्वस्थ बालक – स्वस्थ राष्ट्र” की भावना को सशक्त रूप से आगे बढ़ाने का संदेश दिया गया।

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