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कैलिस्टो आर्ट एंड कल्चर एवं एहसास फ़ाउंडेशन के सहयोग से तीसरी अंतरराष्ट्रीय कला प्रतियोगिता ‘हारुद’ का आयोजन

ब्यूरो चीफ राजेश कुमार, पुंछ
श्रीनगर, 01 जनवरी: कैलिस्टो आर्ट एंड कल्चर ने एहसास फ़ाउंडेशन के सहयोग से तीसरी अंतरराष्ट्रीय कला प्रतियोगिता का सफल आयोजन किया, जिसका विषय “हारुद” था। इस प्रतियोगिता में भारत सहित कई देशों के कलाकारों ने भाग लिया। ‘हारुद’ को परिवर्तन, स्मृति, धैर्य और पुनर्नवकरण के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया, जो कश्मीर की सांस्कृतिक और भावनात्मक पहचान से गहराई से जुड़ा है।
प्रतियोगिता का मूल्यांकन एक प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय जूरी द्वारा किया गया। कार्लोस मिगेल रामिरेज़ (मेक्सिको) ने कलाकारों की इस क्षमता की सराहना की कि उन्होंने स्थानीय अनुभवों को वैश्विक दृश्य भाषा में प्रस्तुत किया। डॉ. सेयहुन कोनाक (तुर्की) ने कृतियों में दिखाई देने वाली भावनात्मक और काव्यात्मक अभिव्यक्ति की प्रशंसा की। डैनियल गालेगोस एस्किवियास (आरेक्विपा, पेरू) ने कलाकृतियों की सच्चाई और सांस्कृतिक गहराई को रेखांकित किया, जबकि प्रो. ज़रगार ज़हूर, पूर्व डीन, फैकल्टी ऑफ़ फाइन आर्ट्स, जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली, ने इस पहल को उभरते कलाकारों के लिए एक मजबूत और विश्वसनीय मंच बताया।
अपने संदेश में एहसास फ़ाउंडेशन के उपाध्यक्ष बुर्हान नज़ीर ने कहा कि इस प्रतियोगिता से फ़ाउंडेशन का जुड़ाव सूफी मूल्यों, सांस्कृतिक विकास और सामुदायिक सेवा के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि कला शांति और आपसी समझ का सशक्त माध्यम है तथा ऐसे अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम कश्मीर को रचनात्मकता और सांस्कृतिक संवाद के केंद्र के रूप में स्थापित करते हैं।
ज़हूर कश्मीरी, कैलिस्टो आर्ट एंड कल्चर के संस्थापक, और इस पहल के प्रमुख सूत्रधार, ने कहा कि इस प्रतियोगिता का उद्देश्य कश्मीरी कलाकारों और वैश्विक कला समुदाय के बीच संवाद और सहयोग को बढ़ावा देना है। उन्होंने इसे स्थानीय कलाकारों के लिए अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी कला प्रदर्शित करने का एक महत्वपूर्ण अवसर बताया। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि कला की यात्रा में धैर्य, निरंतरता और आशा सबसे महत्वपूर्ण तत्व हैं।
जूरी के विस्तृत विचार-विमर्श के बाद शीर्ष पाँच चयनित कलाकारों की घोषणा की गई:
नीरज रैना, मुज़म्मिल अहमद, इर्तिका बज़ाज़, रिथुल नरेश और सबीना गुल।
आयोजकों के अनुसार यह प्रतियोगिता सांस्कृतिक आदान-प्रदान को सशक्त बनाने और कश्मीर को अंतरराष्ट्रीय कला जगत में एक महत्वपूर्ण स्थान दिलाने की दिशा में एक उल्लेखनीय कदम साबित हुई।

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