उत्तर प्रदेशदेशब्रेकिंग न्यूज़लखीमपुर खीरी

चना की फसल में निप्पिंग तकनीक से पैदावार में होगी जबरदस्त बढ़ोतरी

 

रिपोर्ट: डॉ. संजय कुमार पांडेय, स्टेट हेड, उत्तर प्रदेश

मोबाइल नंबर: 7376326175

लखीमपुर खीरी।

चना (चिकपी/ग्राम) की खेती करने वाले किसानों के लिए निप्पिंग (Nipping) तकनीक किसी वरदान से कम नहीं है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यह एक सरल, सस्ती और प्रभावी कृषि विधि है, जिससे चना की पैदावार में 20 से 50 प्रतिशत तक वृद्धि संभव है।

निप्पिंग तकनीक में पौधे की ऊपरी शीर्ष कलिका (Apical Bud) को तोड़ा या काटा जाता है। इसे हिंदी में खोंटाई या शीर्ष कलिका तोड़ना भी कहा जाता है।

निप्पिंग कब करें

बुवाई के लगभग 30 से 45 दिन बाद, जब चना का पौधा 15 से 25 सेंटीमीटर ऊंचा हो जाए, तब निप्पिंग करना सबसे उपयुक्त माना जाता है। आमतौर पर 35 दिन में पौधे इस प्रक्रिया के लिए तैयार हो जाते हैं।

निप्पिंग क्यों जरूरी

निप्पिंग करने से पौधे की ऊपर की बढ़वार रुक जाती है और पार्श्व शाखाएं अधिक निकलती हैं। इससे फूल और फलियां ज्यादा बनती हैं, जिससे उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होती है। इसके साथ ही पौधों की बनावट एकसमान रहती है, जिससे खरपतवार नियंत्रण, कीट-रोग प्रबंधन और कटाई में भी आसानी होती है।

निप्पिंग कैसे करें

किसान भाई हाथ से या किसी तेज औजार की मदद से पौधे के ऊपरी 2 से 5 सेंटीमीटर हिस्से को तोड़ सकते हैं। इसे कतार दर कतार चलकर आसानी से किया जा सकता है, इसके लिए किसी विशेष मशीन की आवश्यकता नहीं होती।

निप्पिंग के बाद यदि यूरिया या NPK का फोलियर स्प्रे किया जाए, तो और भी बेहतर परिणाम देखने को मिलते हैं।

किसानों के लिए फायदे

अधिक शाखाएं और अधिक फलियां

पैदावार में भारी बढ़ोतरी

कम पानी वाली (रेनफेड) खेती में विशेष लाभ

कम लागत में अधिक मुनाफा

कृषि वैज्ञानिकों और अनुभवी किसानों का मानना है कि यदि किसान चना की फसल में निप्पिंग तकनीक अपनाएं, तो रिकॉर्ड तोड़ उत्पादन हासिल किया जा सकता है।

Viyasmani Tripaathi

Cheif editor Mobile no 9795441508/7905219162

Related Articles

Back to top button