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दिल्ली में आयोजित व्याख्यान में संत भास्कर भारद्वाज ने कहा— नैतिक शिक्षा के बिना सारी डिग्रियाँ बेकार

 

जयबीर सिंह ब्यूरो रिपोर्ट कोटकासिम (खैरथल-तिजारा)

कोटकासिम स्थित पवित्र मनन दीप सत्संग सेवा संस्थान के संस्थापक एवं प्रख्यात आध्यात्मिक गुरु संत भास्कर भारद्वाज ने दिल्ली के नजफगढ़ में आयोजित एक व्याख्यान में नैतिक शिक्षा और संस्कारों के महत्व पर गहन प्रकाश डाला।

अपने उद्बोधन में संत भास्कर भारद्वाज ने कहा कि आज समाज में अनेक लोग अत्यधिक पढ़े-लिखे हैं और उनके पास कई डिग्रियाँ हैं, लेकिन इसके बावजूद वे गलत कार्यों, भ्रष्टाचार और अनैतिक गतिविधियों में लिप्त दिखाई देते हैं। ऐसी डिग्रियों का कोई विशेष लाभ नहीं होता, यदि व्यक्ति के जीवन में नैतिकता और संस्कारों का अभाव हो।

उन्होंने कहा कि मानव जीवन को श्रेष्ठ बनाने के लिए नैतिक शिक्षा और अच्छे संस्कार अत्यंत आवश्यक हैं। यही गुण हमें एक अच्छा इंसान बनाते हैं और प्रभु का प्रिय भी। संत भास्कर भारद्वाज ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि डिग्रियाँ हमें भौतिक जगत में ऊँचाइयाँ तो दिला सकती हैं, लेकिन यदि जीवन में अच्छे संस्कार नहीं हैं तो व्यक्ति को न केवल समाज में, बल्कि ईश्वर के दरबार में भी अपमान का सामना करना पड़ता है।

संत भास्कर भारद्वाज ने युवाओं और समाज से आह्वान किया कि सबसे पहले अपने भीतर अच्छे संस्कार विकसित करें और एक अच्छा इंसान बनें। उन्होंने कहा कि सूर्य की तरह जीवन में चमकने के लिए नैतिक शिक्षा और सद्गुणों का होना अनिवार्य है। इन्हीं गुणों के माध्यम से व्यक्ति सच्चा भक्त बन सकता है और उसका जीवन वास्तव में धन्य हो सकता है।

Viyasmani Tripaathi

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