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कला और साहित्य का संगम: शब्दमय रंग संस्थान में आयोजित कला श्रंखला-9 में कविता और पेंटिंग की अनूठी प्रस्तुति

बीकानेर हेड डॉ राम दयाल भाटी
बीकानेर,
शब्दमय रंग संस्थान में शनिवार को कला श्रंखला–9 का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें प्रसिद्ध लेखक एवं कवि श्री मालचंद तिवाड़ी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की विशेष आकर्षण उनकी मार्मिक कविता “पत्थर पर कइसे बैठूं?” का वाचन था, जिस पर जाने-माने चित्रकार धर्मा स्वामी ने लाइव चित्र संयोजन प्रस्तुत किया।
कविता के भावों पर आधारित केनवास चित्र में एक्रेलिक रंगों के साथ पिकासो की घनवाद शैली का प्रयोग किया गया, जो नारी की वेदना और व्यथा को अत्यंत संवेदनशील ढंग से दर्शाता है। दर्शकों ने इस अनोखी कला प्रस्तुति की भरपूर सराहना की।
संस्थान के चित्रकार राम कुमार भादाणी ने बताया कि धर्मा स्वामी के कला संयोजन में रंगों के साथ-साथ टेक्सचर तकनीक का विशेष उपयोग किया जा रहा है, जो कला और साहित्य जगत के बीच एक अनूठा दृश्य निर्माण कर रहा है।
कार्यक्रम का निर्देशन वरिष्ठ चित्रकार हरिगोपाल सन्नू हर्ष ने किया। उन्होंने कहा कि संस्थान में कला के नवाचार के साथ साहित्यिक विधाओं पर गहराई से कार्य किया जा रहा है और आने वाले समय में ऐसी प्रस्तुतियाँ कला प्रेमियों के लिए नई दिशा स्थापित करेंगी।
मुख्य अतिथि कवि मालचंद तिवाड़ी ने कहा कि कविता पर लाइव पेंटिंग का यह अनुभव उनके लिए “अविस्मरणीय” रहेगा और उन्होंने संस्थान की इस नई पहल की सराहना की।
कार्यक्रम के अंत में दिलीप हर्ष, मुकेश पवार और गणेश रंगा ने आए हुए अतिथियों और प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।
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