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परमात्मा को बश में करने का सर्वोत्तम साधन है प्रेम-संदीप शरण

9 दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा

बस्ती से वेदान्त सिंह

 

बस्ती । गोपियां ईश्वर के लिये जीती थी इसलिये उन्हें प्रेम सन्यासिनी कहा गया। प्रभु प्रेम में हृदय का द्रवित होना ही तो मुक्ति है। कृष्ण कथा और बासुरी का श्रवण करते समय चाहें आंखे खुली ही क्यों न हो समाधि लग जाती है। कृष्ण कथा में प्राणायाम करने की कोई आवश्यकता नही है यह जगत को भुला देती है। स्वाद गोपियों के माखन में नहीं प्रेम में था। यशोदा के हृदय में बसा हुआ कन्हैया जागा है किन्तु हमारे हृदय का कन्हैया सोया हुआ है। यह सद् विचार आचार्य संदीप शरण शुक्ल ने बेलगड़ी में आयोजित 9 दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के पांचवे दिन व्यासपीठ से व्यक्त किया।

महात्मा जी ने कन्हैया के बाल लीला के विविध प्रसंगो, गोपियों के साथ अनुराग, माखन चोरी आदि प्रसंगों का विस्तार से वर्णन करते हुये कहा कि जब तक परमात्मा को प्रेम से न बाधा जाय संसार का बन्धन बना रहता है। ईश्वर को फल दोगे तो वे तुम्हें रत्न देंगें। पाप के जाल से छूटना आसान नही है, जब तक पुण्य का बल बढता नही पाप की आदत नहीं छूटती।

बाल लीला का वर्णन करते हुये महात्मा जी ने कहा कि परमात्मा को बश में करने का सर्वोत्तम साधन है प्रेम। कन्हैया ने कभी जूते नहीं पहने, गायों की जैसी सेवा उन्होने किया शायद ही कोई कर सके। गाय में सभी देवों का वास है, गाय सेवा से अपमृत्यु टल सकती है। बासुरी का महत्व बताते हुये महात्मा जी ने कहा कि बांसुरी अपने स्वामी के इच्छानुसार ही बोलती है। इसलिये भगवान की जो इच्छा हो वही बोलना चाहिये।

कथा क्रम में भक्त प्रहलाद, कुन्ती की भक्ति और भीष्म का प्रेम, राधा के त्याग, रूक्मिणी प्रसंग, गोकुल भूमि की महिमा और ग्वाल बाल गोपिकाओं का श्री कृष्ण के प्रति समर्पण का वर्णन करते हुये महात्मा जी ने कहा कि संसार में कुन्ती जैसा बरदान किसी ने नहीं मांगा । कुन्ती ने कन्हैया से दुःख मांगा जिससे उनका कन्हैया उनसे दूर न जाय। आजकल तो लोग भगवान से केवल सुख मांगते हैं किन्तु बिना दुख के साधना पूर्ण ही नही हो सकती। परमात्मा की चाह में विरह ही तो भक्ति की प्रतिष्ठा है।

श्रीमती आशा शुक्ला और अष्टभुजा प्रसाद शुक्ल ने परिजन और श्रद्धालुओं के साथ कथा व्यास का विधि विधान से पूजन अर्चन किया। कथा में मुख्य रूप से श्रीमती आशा शुक्ला और अष्टभुजा प्रसाद शुक्ल ने परिजन और श्रद्धालुओं के साथ कथा व्यास का विधि विधान से पूजन अर्चन किया। परमपूज्य रामचन्द्र शुक्ल, श्रीमती सरोज शुक्ला की स्मृति में आयोजित कथा में मुख्य रूप से दुर्गा प्रसाद शुक्ल, डॉ० जगदम्बा प्रसाद शुक्ल, डॉ. अम्बिका प्रसाद शुक्ल, अखिलेश कुमार शुक्ल अजय कुमार शुक्ल, आनन्द कुमार शुक्ल, विशाल शुक्ल, अभिषेक शुक्ल, आंजनेय शुक्ल, अमित शुक्ल, डॉ० मारूति शुक्ल, सर्वज्ञ शुक्ल, सूर्याश शुक्ल मंगलम शुक्ल, आदित्य शुक्ल, आराध्य शुक्ल, शिवाय शुक्ल, अच्युत गोविन्द शुक्ल के साथ ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

Vedant Singh

Vedant Singh S/O Dr. Naveen Singh Mo. Belwadandi Po. Gandhi Nagar Basti Pin . 272001 Mob 8400883291 BG . O Positive vsvedant12345@gmail.com

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