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बच्चे शिक्षक का स्पष्ट आईना होते हैं- प्रधानाचार्य शर्मा जी

ब्यूरो चीफ राम सुदीन, सोनभद्र
बीना | त्याग, समर्पण, अनुशासन एवं धैर्य के साथ नियमितता आदि के पर्याय को शिक्षक कहते हैं। हम शिक्षक जरूर हैं, लेकिन बच्चे हैं तो शिक्षक है और बच्चों से ही शिक्षक की पहचान होती है। साथ ही शिक्षकों में जौहरी का गुण भी विद्यमान होता है, जिसकी सहायता से वे विद्यार्थियों में से खालिस व शुद्ध सोना सा तराशने का हुनर भी रखते हैं। कुम्हार जिस तरह से गीली मिट्टी को चाक की सहायता से सुंदर व आकर्षक उपयोगी बर्तनों का रूप प्रदान करता है। ठीक उसी तरह एक शिक्षक भी अपने विद्यार्थियों को हर संभव होनहार और काबिल बनाने के लिए सदैव प्रयासरत रहते हैं। बच्चे शिक्षकों का स्पष्ट आईना होते हैं। उक्त बातें शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य पर आयोजित डी ए वी बीना विद्यालय में संस्था प्राचार्य अशोक कुमार शर्मा ने विद्यार्थियों को शिक्षकों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कही। विद्यार्थियों द्वारा शिक्षकों को उपहार भेंट कर उनका सम्मान किया गया। कार्यक्रम का संचालन संस्था के बच्चों ने किया। इस अवसर स्टॉफ सदस्य व विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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