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जयहिंद वंदेमातरम् का जो करते सम्मान नहीं वे भारत माता के दुश्मन उनका हिंदुस्तान नहीं:कौशल्या कुमारी चौहान
- रॉबर्ट्सगंज कचहरी परिसर में कौमी एकता व काव्यांजलि का हुआ आयोजन - शहीद स्थल प्रबंधन ट्रस्ट करारी सोनभद्र के तत्वावधान में हुआ कार्यक्रम

ब्यूरो चीफ राम सुदीन सोनभद्र
सोनभद्र। शहीद स्थल प्रवंधन ट्रस्ट करारी सोनभद्र के तत्वावधान में स्वतंत्रता दिवस सप्ताह के तहत कचहरी परिसर सोनभद्र में क़ौमी एकता व राष्ट्रीयता को समर्पित काव्यांजलि का आयोजन रविवार को किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए दिवाकर द्विवेदी मेघ ने मां वाग्देवी के चित्र पर माल्यार्पण दीपदान कर विधिवत शुभारंभ किया। वाणी वंदना, मां है महफ़िल सहारे तेरे तूं कहां,,,आ पुकारे तुम्हें तेरा बेटा यहां,,, दयानंद दयालू ने करते हुए अरदास किया।ओज की कवयित्री कौशल्या कुमारी चौहान ने अपनी रचना,,, जयहिंद वंदेमातरम् का जो करते सम्मान नहीं ,वे भारत माता के दुश्मन उनका हिंदुस्तान नहीं सुनाकर वाहवाही लूटी और सबको मंत्रमुग्ध कर दिया।
सुधाकर पांडेय स्वदेशप्रेम ने,, तिरंगे में सजे अर्थी बजे धुन राष्ट्र गीतों की,, जनाजा जब मेरा निकले वतन के वास्ते निकले सुनाया और बलिदान की गाथा को नमन किया। संयोजन व संचालन कर रहे शहीद स्थल प्रवंधन ट्रस्ट करारी सोनभद्र के निदेशक प्रदुम्न त्रिपाठी एडवोकेट ने,पूजा जाये शहीदों को, खुदा की निस्बत,,हम रहें ना रहें ,कायम ए हिंदुस्तान रहे,, सुनाकर देश को नमन किया और सराहे गए। वहीं दिवाकर द्विवेदी मेघ ने,,,आदमी कमोबेश आदमी तो बने,, व्यंग रचना सुनाकर श्रोताओं को सोचने पर बाध्य किया। शायर जुल्फिकार हैदर ने,,,डर जाता हूं खुद के वजूद से,,न चाहत है न कोई आस है सुनायें और गंभीर शायरी कर आम आदमी की पीड़ा को रेखांकित किये। जयराम सोनी ने मां बाप से बढ़कर कोई भगवान नहीं,सुनाकर वाहवाही लूटी। धर्मेश चौहान एडवोकेट ने वीर रस की कविता , देश से बड़ा कुछ नहीं इंसान के लिए।सब कुछ समर्पित है मेरा हिंदुस्तान के लिए।सुनाकर लोगों में नवचेतना राष्ट्रीय अनुराग उत्साह जगाया।
अंत में अध्यक्षता कर रहे मेघ कवि ने स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग बलिदान को रेखांकित कर वक्तव्य दिया और देश को सर्वोपरि मानते हुए सबको चलने की जरूरत बताया।
इस अवसर पर जयशंकर त्रिपाठी, रिषभ, शिवमोचन, फारुख अली, हाशमी गुलाम हुसैन, हर्ष चौहान ,अनीषा चौहान आदि देर शाम तक जमे रहे।



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