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चातुर्मास आराधना अज्ञानता से ज्ञान की और प्रस्थान

ब्यूरो चीफ सन्तोष कुमार गर्ग बालोतरा

 

विश्वविख्यात श्री नाकोड़ा तीर्थ पर चातुर्मास में विराजित परम पूज्य आचार्य भगवंत राष्ट्र संत श्री चंद्रानन सागर सुरी जी महाराजा आदि ठाणा ने आज के पावन प्रवचन में फरमाया की चातुर्मास ज्ञान की एक पाठशाला है, जिसमे प्रभु भक्ति का पाठ सिखाया जाता है व्यक्ति चातुर्मास में जिस प्रकार खेत मे एक धान रोप कर अनेक धान की कामना करता है। उसी प्रकार व्यक्ति भी अपने जीवन चातुर्मास धर्म ध्यान, तप, सयंम जप आराधना करता है तो अनेक गुना फल प्राप्त करता है। मुनिराज श्री मनन सागर जी महाराज ने पुण्य के तीन प्रकार बताए पान पुण्य, अन्न पुण्य, वस्त्र पुण्य जीवन में पानी की परब (प्याऊ) अनाज का दान वस्त्र का दान करके जीवन को धन्य बनाना चाहिए

गुरुदेव ने बताया की चातुर्मास में 48 दिवसीय श्री चिंतामणि नमिउन तप की आराधना साथ ही वर्षीतप, एकासना तप की आराधना चल रही है. प्रतिदिन सुबह 7 बजे स्नात्र महोत्सव प्रवचन 9.15 बजे दोपहर में 2 बजे नमिऊन अनुष्ठान एवं रात्रि 9.00 बजे भक्ति संध्या में अनिल सालेचा द्वारा भक्त्ति रस का मधुर सेवन श्रावको को करवाया जायेगा।

 

Santosh Kumar Garg

Beauro Chief Balotra Rajasthan

Santosh Kumar Garg

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