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विश्वाश ही भगवान से मिलने का उत्तम मार्ग है। – पंडित प्रदीप शास्त्री 

संवाददाता सचिन कुमार कसौधन बस्ती

 

कलवारी। विकास क्षेत्र कुदरहा के कोरमा गांव में स्थित श्री ब्रह्मबाबा मन्दिर परिसर में आयोजित नौचण्डी महायज्ञ के अवसर पर चल रही नौ दिवसीय संगीतमयी श्रीराम कथा के पहले दिन अवध धाम से आये कथा वाचक पं प्रदीप शास्त्री जी ने ब्यास पीठ से राम कथा के महत्व पर विस्तृत चर्चा की। कथा की अमृतवर्षा करते हुए कहा कि जाने बिनु न होई परतिती, बिनु परतीति होई नहिं प्रीती।

जब तक जानेगें नहीं तब तक परतीति यानि विश्वास नहीं होगा और जब तक विश्वास नहीं होगा प्रेम होने वाला नहीं है। श्रीरामचरितमानस की कथा चार स्थानों पर सुनाई गयी है सबसे प्रथम स्थान है काशी का अस्सी घाट। भगवान शिव के त्रिशूल पर स्थित मोक्ष दायिनी काशी नगरी में प्रथम वक्ता के रूप में स्वयं तुलसीदास जी बैठे हैं श्रोता के रूप में संतों का समाज है अथवा गंगा मैया हैं। गोस्वामी जी कहते हैं “स्वान्तः सुखाय तुलसी” अर्थात तुलसी दास जी का स्वयं का अपना मन है। इस घाट का नाम है शरणागत घाट। मानस के पहले वक्ता गोस्वामी तुलसी दास जी कहते हैं- मै आप लोगों को वह कथा सुनाऊंगा जो की प्रयागराज में याग्यवल्क्य ऋषि ने भरद्वाज जी को सुनाई थी। अब दुसरे कथा वाचक श्री याज्ञवल्क्य ऋषि और श्रोता हैं श्री भरद्वाज जी और स्थान है श्री तीर्थराज प्रयाग और उस घाट का नाम है कर्मकांड घाट। ऋषि याग्यवल्क्य जी कहते हैं हे ऋषिवर भरद्वाज जी मै आपको वो कथा सुनाऊंगा जो की कैलाश पर्वत पर बैठ कर भूतभावन भगवान श्री शिव ने माता पार्वती को सुनाई थी। अब तीसरे कथा वाचक भगवान शिव हैं और श्रोता के रूप में माता पार्वती जी विराजमान हैं और स्थान है कैलाश पर्वत नाम है ज्ञानघाट। बाबा भोलेनाथ माता पार्वती से कहते हैं कि हे देवी मैं आपको वह कथा सुनाने जा रहा हूँ जिस कथा को मैंने श्री कागभुसुण्डी जी के मुख से सुनी थी।

अब चौथे वक्ता के रूप में कागभुशुण्डी जी महाराज हैं और स्थान का नाम हिमालय का निलगिरी पर्वत तथा घाट का नाम मानसकार भक्ति घाट है और श्रोता के रूप में बहुत सारे पक्षी हैं, परंतु मुख्य श्रोता के रूप में पक्षियों के राजा भगवान श्री विष्णु जी के वाहन गरुड़ भगवान जी हैं। और इन चारों स्थानों पर कथा प्रारम्भ करने से पूर्व कथा प्रवक्ता ने कथा की विस्तृत महिमा गाई।

कथा मे मुख्य रुप से यजमान राजकुमार चौरसिया, यज्ञाचार्य ओमप्रकाश त्रिपाठी के अलावा त्रिलोकी नाथ ओझा, नरेन्द्र ओझा, धर्मेन्द्र ओझा, श्रीपति ओझा, दिनेश ओझा, संदीप मिश्रा, जयप्रकाश, राकेश कश्यप, हरिश्चन्द्र राजभर सहित तमाम श्रद्धालु उपस्थित रहे।

Sachin Kumar Kasudhan

Beauro Chief (Basti)

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