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इंद्रप्रस्थ लिटरेचर फैस्टिवल हरियाणा के पटल पर मातृ दिवस के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय साहित्य संगोष्ठी का आयोजन किया गया

 

ब्यूरो चीफ सतीश कुमार महेंद्रगढ़ हरियाणा

 

इंद्रप्रस्थ लिटरेचर फैस्टिवल हरियाणा के पटल पर मातृ दिवस के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय साहित्य संगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें देश प्रदेश के 21 साहित्यकारों ने अपनी कविताओं के माध्यम से ‛स्त्री चिंतन के परिप्रेक्ष्य में कवि सृजन एवं गीतात्मक अभियक्ति’ विषय पर विस्तार से प्रकाश डाला। संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ चन्द्रमणी ब्रह्मदत्त एवं संरक्षक प्रो परमानंद दीवान की देखरेख में आयोजित इस कार्यक्रम में वरिष्ठ साहित्यकार राजपाल यादव मुख्य अतिथि एवं साहित्य मर्मज्ञ हरिन्द्र यादव विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे वही लोकगीतकार एवं संस्था प्रदेशाध्यक्ष डॉ कृष्णा आर्या ने अध्यक्ष का दायित्व निभाया। पंचकुला की वरिष्ठ कवयित्री दर्शना पाहवा ने अपने मधुर स्वर में ‛वंदना के फूल से मैं करूँ शृंगार तेरा- कल्पना के पुष्प से मैं करूँ सत्कार तेरा’ सरस्वती वंदना प्रस्तुत की वहीं कुशल मंच संचालन डॉ बबीता किरण ने किया। वरिष्ठ साहित्यकार राजपाल यादव ने अपनी लोकप्रिय शैली जगीरा में अपने भाव इस प्रकार व्यक्त करते हुए शमा बांध दिया ‛बोल आज फिर बोल जगीरा, कविता के पट खोल जगीरा-श्रोतागण जीतने भी बैठे सबके सब अनमोल जगीरा’ वही गुरुग्राम से गीतकार एवं विशिष्ट अतिथि हरीन्द्र यादव ने ‛माँ से सुख दूना है-माँ के बिन जग में सब सूना सूना है’ माहिए प्रस्तुत कर श्रोताओं का मन मोह लिया। गुरुग्राम से कमलेश सिंघल ने ‛जागती है सबसे पहले और सबके बाद में सोती है-वह माँ होती है’, पंचकुला से रेणु अब्बी ने ‛टूटे हुए दिल मिलते हैं इस मंच पर’ कविता प्रस्तुत की तो गुरुग्राम से नवोदित कवयित्री कविता ने ‛युगों युगों से है नारी सृष्टि की जननी है नारी’ मुक्तक प्रस्तुत किया। इसी कड़ी में औजस्वी कवि भारत भूषण ने ‛माता के उपकार को भूले जो संतान-भूषण उस संतान का हो कैसे कल्याण’ कविता प्रस्तुत की वही वरिष्ठ साहित्यकार प्रेमलता चौधरी ने ‛माँ तुम आदि शक्ति स्वरूपा हो-माँ तुम ही सर्वाधिका हो’ तथा मुंबई से लता नोवाल ने ‛माँ तू मुझे बहुत याद आती है’, महेंद्रगढ़ से कविता यादव ने ‛ममता त्याग, धैर्य धारण करने वाली बेटियाँ जगजननी हैं’ का सुंदर पाठ किया । लोकगीतों की भावांजली अर्पित करते हुए फ़रीदाबाद से किशौर कौशल ने ‛जब कभी गीतों की गागर छलक़ती है-माँ मुझे अक्सर तुम्हारी याद आती है’ गीतिकाव्य प्रस्तुत किया वहीं लोकगीतकार डॉ कृष्णा आर्या ने ‛रख दिये हैं गीत सारे पुस्तक में माँ ताकि तुम अगले जन्म में बाँच सको अपनी संस्कृति’ गीत के मार्मिक भाव प्रस्तुत किए। पंचकुला से सुनीता गर्ग ने ‛दुनिया में माँ बाप तो भगवान की मूरत हैं, दर्शना पाहवा ने ’जब गम की बदली छाती है-माँ तू मुझे बहुत याद आती है’ काव्यगीत प्रस्तुत किया तो चंडीगढ़ से शीला गहलावत ने ‛माता कल्याणी तू सबका रखना ध्यान’ भक्ति गीत प्रस्तुत किया वही परमानंद दीवान ने ‛माँ तुम जग में नहीं हो पर मेरे दिल में बसी हो’ कविता पढ़ी वहीं सरोज चौपड़ा ने भी ‛खुद गीले में सोकर बच्चों को सूखे में सुलाती है माँ’ माधुर्य आपूरित काव्यपाठ किया । संगोष्ठी में राजपाल यादव, हरीन्द्र यादव, प्रेमलता चौधरी, कविता यादव, कमलेश सिंहल, रेणु अब्बी, दर्शना पाहवा, लता नोवाल, बबीता किरण, भारत भूषण वर्मा, कविता, किशोर कौशल, शीला गहलावत, परमानंद दीवान, सुनीता गर्ग, सरोज चौपड़ा, कृष्णा आर्या, डॉ चंद्रमणि ब्रहमदत्त ने लोकगीत, माहिए, दोहे, मुक्तक, आदि खूबसूरत शैली में प्रस्तुत किए अंत में संस्था की प्रदेशाध्यक्ष डॉ कृष्णा आर्या ने सभी काव्यकारों का आभार प्रकट किया ।

Satish Kumar

Beauro Chief Mahendragarh Haryana

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