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महाराजा हरि सिंह जयंती पर श्रद्धांजलि, पूंछ में विशाल रैली का आयोजन 

ब्यूरो चीफ राजेश कुमार, पुंछ

 

पूंछ। महाराजा हरि सिंह जी की जयंती के अवसर पर आज पूंछ में एक विशाल रैली का आयोजन किया गया। यह रैली काजी मोड़ा से होते हुए गांव देगबर एलओसी पास तक निकाली गई। इस दौरान युवाओं ने महाराजा हरि सिंह जी को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके आदर्शों को याद किया।

इस अवसर पर जम्मू–पुंछ प्रधान श्री कमल सिंह जसरोटिया और धर्म सभा के प्रधान श्री क्षेत्रपाल शर्मा जी ने महाराजा हरि सिंह जयंती पर जम्मू–कश्मीर के सभी नागरिकों को हार्दिक शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि महाराजा हरि सिंह जी एक महान शासक थे, जिन्होंने हमेशा अपनी प्रजा की आवाज़ सुनी और न्यायपूर्ण शासन दिया। उनके राज में सभी वर्गों को समान अधिकार प्राप्त हुए और जनता खुशहाल रही।

संक्षिप्त जीवन परिचय

महाराजा हरि सिंह जी का जन्म 23 सितम्बर 1895 को जम्मू के डोगरा राजघराने में हुआ। वे राजा अमर सिंह के पुत्र थे। उन्होंने अजमेर के मेयो कॉलेज और देहरादून के इंपीरियल कैडेट कोर से शिक्षा प्राप्त की।

साल 1915 में, मात्र 20 वर्ष की आयु में, उन्हें राज्य बलों का कमांडर-इन-चीफ नियुक्त किया गया। इसके बाद 1925 में अपने चाचा महाराजा प्रताप सिंह के निधन के बाद वे जम्मू–कश्मीर के अंतिम शासक बने।

प्रमुख योगदान

राज्य में पंचायती राज अधिनियम लागू किया।

कई सामाजिक सुधारों को बढ़ावा दिया।

1947 में पाकिस्तान के आक्रमण के समय भारत से सहायता मांगी और 26 अक्तूबर 1947 को विलय पत्र पर हस्ताक्षर कर जम्मू–कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग बनाया।

अंतिम वर्ष

भारत में विलय के बाद महाराजा हरि सिंह ने सत्ता त्याग दी और मुंबई में रहने लगे। 26 अप्रैल 1961 को उनका निधन मुंबई में हुआ।

आज महाराजा हरि सिंह जी को एक दूरदर्शी शासक, सुधारक और सच्चे राष्ट्रनायक के रूप में याद किया जाता है।

Viyasmani Tripaathi

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