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अखिल भारतीय साहित्य परिषद नोखा काव्य गोष्ठी

बीकानेर से डॉ राम दयाल भाटी
अखिल भारतीय साहित्य परिषद नोखा इकाई के साहित्यकारों ने काव्य गोष्ठी के माध्यम से नव संवत्सर 2082 मनाया ।
संयोजक नेमीचन्द गहलोत ने बताया इस अवसर पर नोखा के वरिष्ठ कवि इंद्र चंद वैद ने नव संवत्सर का स्वागत हिंदी व राजस्थानी कविताओं से कर श्रोताओं का मन मोह लिया ।
विजय कुमार तिवाड़ी की कविता “मैं राष्ट्र धर्म का अनुयायी, बिकना मुझे स्वीकार नहीं….” पर श्रोता झूम उठे ।
दीपक कुमार ‘गंगानगरी’ की गजल “कोई तदबीर नहीं कारगर, दर्द यूं ही बाकी है” ने सभी को भाव विभोर कर दिया ।
वरिष्ठ कवियत्री व गीतकार उर्मिला तापड़िया ने सामाजिक समरसता पर काव्य पाठ करते हुए कुटुबं प्रबोधन की झलक ने, काव्य गोष्ठी को यादगार बना दिया ।
महावीर प्रसाद शर्मा बूंदी ने श्रृंगार रस की कविता ” मेरी जिन्दगी खूबसूरत हो जायेगी, तूं मुस्कुराया कर ” व कंठस्थ चौपाइयां व मुक्तक प्रस्तुत कर भक्ति भाव से सराबोर कर दिया ।
राजेन्द्र सिंह राठौड़ ने अपने वक्तव्य में इस आयोजन को राष्ट्रीय स्तर का बताया ।
राष्ट्रीय शिक्षक संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष ओमप्रकाश बिश्नोई ने इस कार्यक्रम को वृहद् रूप में मनाये जाने की आवश्यकता जताई ।
मंच संचालक नेमीचन्द गहलोत ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए नवसंवत्सर की मंगलकामनाएं की ।

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