
महेंद्रगढ़ से सतीश कुमार की रिपोर्ट
नारनौल 11 जनवरी। महिला एवं बाल विकास विभाग के दिशा निर्देशानुसार जिला बाल संरक्षण ईकाई कार्यालय की ओर से आज सरकारी अस्पताल नारनौल में सिविल सर्जन के सहयोग से मास्टर ट्रेनर प्रोग्राम आनॅ दॉ एक्सपेक्ट ऑफ इलीगल एडोप्शन विषय पर सभी डॉक्टर जिला आशा समन्वयक, ब्लॉक आशा समन्वयक, आशा वर्कर, एएनएम, जीएनएम इत्यादि को ट्रेनिंग दी गई।
इस मौके पर बाल संरक्षण अधिकारी सुषमा यादव ने बच्चा गोद लेने की कानुनी प्रक्रिया के बारे में विस्तार से बताया। सरकार द्वारा बच्चा गोद लेने की प्रक्रिया पहले से आसान की गई है ताकि जरुरत मन्द लोगों को बच्चा गोद लेने में आने वाने समस्याओं से जुझना नहीं पडेगा। बच्चा गोद लेने के लिए आवेदन ऑनलाइन होंगे। जिला बाल संरक्षण इकाई कार्यालय की ओर से आवेदक के बारे में सारी जांच की जाएगी। सारी शर्ते पुरी होने पर अधिकारियों द्वारा बच्चों गोद लेने के लिए अप्रूवल दे दी जाएगी। यह प्रक्रिया महिला एवं बाल विकास विभाग के तहत होगी। उन्होंने बताया कि अनाथ व लावारिस, अंतर परिवार और सौतेले माता या पिता द्वारा यानि तीन तरह से बच्चों गोद लिया जाता है। जरुरतमंद लोग बच्चों गोद लेने के लिए किसी भी बिचौलिए के बहकावे में न आएं केवल राज्य सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त दत्तक एजेंसियों के माध्यम से ही बच्चों गोद लें। बच्चा गोद लेने से सम्बन्धित सम्पूर्ण जानकारी केयरिंग वेबसाइट पर दी गई है। वेबसाइट पर अपना ऑनलाइन पंजीकरण कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि ऑनलाइन पंजीकरण करते समय अपने सारे जरुरी दस्तावेज अपलोड करें, नागरिक गलत दस्तावेज अपलोड ना करें, ऐसा करने पर आवेदन रद्द किया जा सकता। बच्चों को गोद लेने के लिए किसी बिचौलिए गैर कानुनी संस्था मैटरनिटी होम नर्सिंग व अस्पताल आदि से सम्पर्क न करें। उन्होंने बताया कि केयरिंग वेबसाइट डब्ल्यू डब्ल्यू डब्ल्यू डॉट सीएआरए डॉट एनआईसी डॉट आइएन में दिए गए निर्देशों में निर्दिष्ट शुल्क के अलावा कोई भुगतान नहीं किया जाएगा।
इस अवसर पर डा. मनीष, डा. दिनेश, डा. जितेंद्र, सामाजिक कार्यकर्ता गरिमा वर्मा, सामाजिक कार्यकर्ता कमल, जिला आशा समन्वयक, ब्लॉक आशा समन्वयक, आशा वर्कर, एएनएम, जीएनएम उपस्थित थी।

फोटो- बच्चों को गोद लेते समय बिचौलियों के चक्कर में ना पडने की शपथ दिलाते आयोजक।
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