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नम्रता की मूर्ति थीं राजयोगिनी दादी प्रकाशमणि जी
दादी प्रकाशमणि जी के स्मृति दिवस पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन* *एक विलक्षण व्यक्तित्व की धनी, दादी प्रकाशामणि - बीके सीता बहन जी*

मध्य प्रदेश पन्ना
लोकेशन=पन्ना
ब्यूरो चीफ=सुधीर अग्रवाल
ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान के स्थानीय सेवाकेंद्र में आज 25 अगस्त को दादी प्रकाशमणि जी के 17वें पुण्य स्मृति दिवस को विश्व बंधुता दिवस के रूप में मनाया गया। दादी प्रकाशमणि जी, जो ब्रह्माकुमारी संस्था की पूर्व मुख्य प्रशासिका थीं, ने अपने संपूर्ण जीवन को मानवता की सेवा, आध्यात्मिकता के प्रचार और प्रेम, शांति एवं सत्य के संदेश के लिए समर्पित किया।
इस अवसर पर सभी भाई-बहनों ने दादी जी के जीवन, शिक्षाओं और आदर्शों को याद करते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
बीके सीता बहन जी ने बताया कि दादी प्रकाशमणि जी के जीवन से हमें सादगी, सहनशीलता और समर्पण के गुण सीखने को मिलते हैं, जो आज के युग में अत्यंत प्रासंगिक हैं।
*एक विलक्षण व्यक्तित्व की धनी, दादी प्रकाशामणि!*
एक महान हस्ती! एक दिव्य विभूति! जिन्होंने सारे विश्व को प्रेम का पाठ पढ़ाया और अनेकों आत्माओं को ईश्वरीय अनुभव कराया।
वो सदा कहती थीं – हमने अपने फोलोअर्स तैयार नहीं किए, बल्कि हमारे तो सभी भाई-बहनें हैं जो एक-एक स्वयं में ‘लीडर्स’ हैं। गुणमूर्त दादी मां का ऐसा कुशल प्रशासन जो सभी के मन-मस्तिष्क पर ही नहीं अपितु सभी के हृदयों पर भी था। कभी भी उनके नेतृत्व पर किसी को तनिक भी संदेह नहीं हुआ, न असुरक्षा की लेशमात्र छाया पड़ी।
*सेवा में निष्ठा और निर्माण भाव*
दादी जी में स्नेह और शक्ति का अद्भुत संतुलन था। सभी की विशेषताओं को पहचान कर उन्हें सेवा में लगाना, सभी को सम्मान व स्नेह देना, मां की तरह कर्मियों को मन में ना रखकर, न केवल क्षमा करना बल्कि उन्हें और ही स्नेह देकर आगे बढ़ाना, यह सब दादी के गुण थे, जो सबको एक सूत्र में बांधे रखते थे। जैसे दादी सबको दिल से स्नेह व सम्मान देती थी वैसे सभी भी उनका दिल से सम्मान करते थे। ‘मैं’ शब्द का प्रयोग दादी जी नहीं के बराबर करती थी। वे सदा निमित्त और निर्माण भाव से सेवा करती थीं।
अंत में, सभी ने दादी जी के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।

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