
डॉ राम दयाल भाटी की रिपोर्ट
आत्मज्ञान, आत्मबल, मानसिक बल, बौद्धिक बल, शारीरिक बल, सामाजिक बल, आर्थिक बल मनुष्य को ये सभी सुख मनुष्य बनाते है
पिछले एक दशक से लगभग समाज में बहुत बदलाव आया है, समाज में आत्महत्या-नशा उदासीनता अक्सर देखने को मिल रही हैं। जिसका एक कारण आज अधिकतर नई पीढी समाज में प्रचलित फिल्मों से प्रेरणा लेते है, दिखाई गई विष्यवस्तु को जीवन का प्रचलन समझ लेते है और अपने जीवन को दिशाभ्रमित कर फिल्मों की अधिकतर बातो को अपने जीवन में उतारकर वैसा ही व्यवहार करने लगते है उदाहरण के रुप में अभिनेता या अभिनेत्री फिल्मों में किसी परिस्थिति वस प्रेम प्रसंग के बाद अलग होने पर शोक दुख प्रकट करते हुए विरह में विभिन्न गलत आदतों का शिकार होना प्रदर्शित किया जाता हैं जैसे की दुख भूलने के लिए मदिरापान और सिगरेट पीना दिखाया जाता हैं जिसे नई पीढ़ी के अधिकतर दर्शक अपने जीवन में उतार लेते है और उसी तरह का व्यवहार सही मानकर ऐसी परिस्थिति होने पर जीवन में ऐसा करना ही सही मानते है जिसके परिणाम स्वरूप व्यक्ति नसे का आदी हो जाता और समाज और घर परिवार से दूर होकर अपनी प्रतिष्ठा खोकर अपने जीवन को अंधकारमय कर लेता हैं
इसी तरह से अविवाहित स्त्री पुरुष का फिल्मों मैं प्रेम प्रसंग दिखाया जाता है जबकि इस
समय ब्रह्मचर्य का पालन और शिक्षा ग्रहण का समय होता है इस तरह से इस उम्र में प्रेम
प्रसंग फिल्मों में प्रचलित होने के कारण समाज में इसका प्रचलन बढ़ता जा रहा है जब की हमारी संस्कृति मे प्रेम प्रसंग व्यक्ति के वैवाहिक जीवन के बाद ही शास्त्रों में वर्णित है नई पीढ़ी धार्मिक ग्रंथ की कहानी को टीवी या मोबाइल पर देखना भी नजरंदाज करते है इसे में समाज में इन सब जीवन को खराब करने वाली घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक है की यदि किशोर अवस्था में जब बालक जानने समझने योग्य हो तो उसे एक निश्चित कक्षा में एक विषय के रूप में बेहतर जीवन जीने का मार्ग नाम जैसी कोई पुस्तक लागू कर एक कालांश इस विषय का कक्षा 12 तक रखा जाय जहा विद्यार्थी का सही मार्गदर्शन उसके आने वाले पूरे जीवन का हो जाए और वह किसी भी चीज से भ्रमित न होकर सही चीज अपने जीवन में अपनाकर सुख शांति का जीवन हमेशा जिए और भारत का एक ज़िम्मेदार सुदृढ़ समझदार नागरिक और भारत का महान भविष्य हो जिससे की देश मैं स्वस्थ और मजबूत भारत के नागरिक हो और देश की उन्नति में अपना योगदान करे और सुख शांति का जीवन व्यतीत करे ।
रेनू चौधरी
शिक्षिका रा.प्रा.वि., बालोतरा (455619)
आरजेबीएम200805054385

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