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सोशल मीडिया पर हर सूचना सच नहीं, पुष्टि के बाद ही करें भरोसा

राजस्थान हेड डॉ राम दयाल भाटी
जर्नलिट्स एसोसिएशन ऑफ राजस्थान (जार) और श्री जैन कन्या कॉलेज की कार्यशाला में पारंपरिक पत्रकारिता और सोशल मीडिया के अंतर पर हुई चर्चा
वक्ताओं ने छात्राओं को मोबाइल के संतुलित उपयोग और फेक न्यूज से सतर्क रहने की दी सीख
बीकानेर। सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के दौर में सूचनाओं की बाढ़ तो आई है, लेकिन हर सूचना विश्वसनीय हो, यह जरूरी नहीं। ऐसे में पारंपरिक पत्रकारिता की विश्वसनीयता, जिम्मेदारी और प्रमाणिकता को समझना पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। इसी विषय को लेकर सोमवार को जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन ऑफ राजस्थान (जार) की जिला इकाई बीकानेर और श्री जैन कन्या पीजी महाविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें वक्ताओं ने पारंपरिक पत्रकारिता और सोशल मीडिया के बीच अंतर समझाते हुए छात्राओं को फेक न्यूज से सावधान रहने तथा किसी भी सूचना पर भरोसा करने से पहले उसकी पुष्टि करने की सलाह दी। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया की सभी सूचनाएं अविश्वसनीय नहीं हैं, लेकिन उनकी सत्यता परखना जरूरी है।
मुख्य अतिथि श्री जैन पाठशाला ट्रस्ट के अध्यक्ष विजय कोचर ने कहा कि प्रिंट मीडिया की प्रमाणिकता कभी समाप्त नहीं होगी। प्रिंट मीडिया में संपादकीय व्यवस्था और संस्थागत जिम्मेदारी होती है, जबकि सोशल मीडिया पर सूचनाएं साझा करने को लेकर ऐसी कोई प्रभावी बंदिश नहीं है। ऐसे में सोशल मीडिया पर नियंत्रण और जिम्मेदारी की आवश्यकता है। उन्होंने छात्राओं से कहा कि पढ़ाई के साथ हर क्षेत्र की जानकारी रखें और शहर में होने वाले कार्यक्रमों में भागीदारी निभाएं। मोबाइल का उपयोग जरूर करें, लेकिन उस पर अपना नियंत्रण भी बनाए रखें।
महाविद्यालय की प्राचार्या संध्या सक्सेना ने कहा कि हर चीज के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलू होते हैं। यह व्यक्ति पर निर्भर करता है कि वह किसे प्राथमिकता देता है। समाचार पत्र ज्ञान का भंडार होते हैं और नियमित रूप से अखबार पढ़ने की आदत विकसित करनी चाहिए।
नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स इंडिया के राष्ट्रीय सचिव एवं वरिष्ठ पत्रकार भवानी जोशी ने कहा कि सोशल मीडिया के प्रभाव सकारात्मक भी हैं, लेकिन इसका उपयोग सावधानी के साथ होना चाहिए। प्रिंट मीडिया शुरुआत से ही अपनी विश्वसनीयता और प्रभाव बनाए हुए है। आज भी प्रमाणिक सूचनाओं के लिए प्रिंट मीडिया का विशेष महत्व है।
जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन ऑफ राजस्थान (जार) के प्रदेश अध्यक्ष वरिष्ठ पत्रकार श्याम मारू ने कहा कि कैमरा लेकर चलने वाला हर आदमी पत्रकार नहीं है यह बात हमें अच्छी तरीके से समझनी चाहिए। पत्रकार वह है जो अपनी जिम्मेदारी समझे और यह उसकी जिम्मेदारी उसकी खबर में भी स्पष्ट झलकनी चाहिए। पत्रकारिता एक ऐसा पेशा है जहां पूरी गंभीरता से तथा समाज हित में काम करना होता है इसलिए हमें पत्रकार तथा इन्फ्लुएंस में फर्क समझना चाहिए। उन्होंने बताया कि जार अपने नवाचारों के तहत आने वाले दिनों में अनेक उच्च शिक्षण संस्थानों में ऐसे ही जागरूकता वाले कार्यक्रम आयोजित करेगा।
इससे पहले जार के बीकानेर जिलाध्यक्ष प्रमोद आचार्य ने विषय प्रवर्तन करते हुए पारंपरिक पत्रकारिता की प्रक्रिया और सोशल मीडिया की कार्यप्रणाली के बीच अंतर स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि पारंपरिक मीडिया जिम्मेदार और संस्कारवान है। इसमें गंभीरता के साथ तथ्यों की जांच-पड़ताल कर समाचार प्रस्तुत किए जाते हैं। इसके विपरीत सोशल मीडिया रियल टाइम और त्वरित सूचनाओं का माध्यम है। सोशल मीडिया पर आई किसी भी सूचना को सही मानने से पहले उसकी सत्यता परखना जरूरी है। पारंपरिक पत्रकारिता में सत्य के साथ तथ्य प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी होती है।
वरिष्ठ पत्रकार हरीश बी. शर्मा ने कहा कि समाज में लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से अखबारों की शुरुआत हुई थी। समय के साथ अखबारों में नकारात्मक सेटिंग्स और प्रवृत्तियां विकसित होना पत्रकारिता के लिए चिंता का विषय है। पत्रकारिता का उद्देश्य पाठकों को बरगलाना नहीं, बल्कि उन्हें सही और प्रमाणिक सूचना उपलब्ध कराना है।
वरिष्ठ फोटो जर्नलिस्ट दिनेश गुप्ता ने फोटो पत्रकारिता की तकनीकी बारीकियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि किसी भी फोटो की गुणवत्ता में उसका एंगल और पिक्सल महत्वपूर्ण होते हैं। सामान्यत: लोग फोटो व्हाट्सएप के माध्यम से भेजते हैं, जिससे उसकी गुणवत्ता कम हो जाती है और प्रिंट में वह बेहतर नहीं आती। फोटो को डॉक्यूमेंट फॉर्मेट में भेजने से उसकी गुणवत्ता बरकरार रहती है और बेहतर प्रिंट प्राप्त होता है।
युवा पत्रकार रोशन बाफना ने कहा कि सोशल मीडिया के इस दौर से बचना संभव नहीं है, लेकिन सही और गलत की पहचान होना जरूरी है। सोशल मीडिया सूचनाएं पहुंचाने का प्रभावी माध्यम है, जिसका उपयोग समझदारी से किया जाना चाहिए।
जार के महासचिव रवि पूगलिया ने कहा कि पारंपरिक पत्रकारिता और सोशल मीडिया से जुड़े सभी पहलुओं की जानकारी होना जरूरी है। इनके महत्व और उपयोगिता को समझे बिना इनके बीच अंतर तय नहीं किया जा सकता।
युवा पत्रकार बलदेव रंगा ने कहा कि असल मुद्दा विश्वसनीयता का है। सोशल मीडिया को भी सही और सटीक सूचनाओं के माध्यम से प्रभावी बनाया जा सकता है।
महाविद्यालय की छात्रा रवीना कच्छावा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि सोशल मीडिया वही खबरें अधिक दिखाता है, जिन्हें व्यक्ति फॉलो करता है, जबकि समाचार पत्रों में प्रमाणिकता और व्यापक जानकारी मिलती है।
कार्यक्रम की शुरुआत में राष्ट्रीय सेवा योजना के प्रभारी विशाल सोलंकी ने स्वागत भाषण दिया इस दौरान कालेज प्रशासन ने मंच पर मौजूद सभी वरिष्ठ पत्रकारों का अभिनंदन भी किया। महाविद्यालय की रासेयो की प्रभारी डॉ. पल्लवी चौहान ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का प्रभावी संचालन जाने-माने उद्घोषक रविंद्र हर्ष ने किया।
इस अवसर पर जार के कोषाध्यक्ष रमेश बिस्सा, उपाध्यक्ष गिरीश श्रीमाली, साहिल पठान, महिला सचिव सुमेश्ता बिश्नोई, कौशलेश गोस्वामी, वरिष्ठ पत्रकार राकेश भाभड़ा सहित महाविद्यालय की छात्राएं एवं स्टाफ सदस्य मौजूद थे।

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