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सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी पर भड़के सुखनंदन चौधरी, बोले- छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ बंद करे उमर सरकार, खाली पद भरे या इस्तीफा दे
जम्मू-कश्मीर में शिक्षा व्यवस्था को लेकर भाजपा का सरकार पर तीखा हमला, प्रधानाचार्यों, व्याख्याताओं और विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की तत्काल नियुक्ति की उठाई मांग

जम्मू, 10 अक्टूबर 2026। जम्मू-कश्मीर के सरकारी स्कूलों, विशेषकर जम्मू संभाग में शिक्षण स्टाफ की भारी कमी को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री सुखनंदन चौधरी ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की उदासीनता के कारण हजारों विद्यार्थियों का शैक्षणिक भविष्य प्रभावित हो रहा है। चौधरी ने चेतावनी देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के रिक्त पदों को तत्काल भरें या शिक्षा व्यवस्था की बदहाल स्थिति की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दें।
भाजपा मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उठाए गंभीर सवाल
जम्मू के त्रिकूट नगर स्थित भाजपा मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए सुखनंदन चौधरी ने सरकारी स्कूलों में शिक्षकों और प्रशासनिक अधिकारियों की कमी पर गहरी चिंता व्यक्त की।
इस दौरान भाजपा मीडिया प्रभारी डॉ. प्रदीप मल्होत्रा, भाजपा किसान मोर्चा के अध्यक्ष राकेश पंत और पूर्व डीडीसी सदस्य बलबीर लाल भी मौजूद रहे।
चौधरी ने कहा कि जम्मू संभाग के कई सरकारी स्कूल आज भी आवश्यक शिक्षण स्टाफ के अभाव में संचालित हो रहे हैं। कई उच्च माध्यमिक विद्यालयों में प्रधानाचार्य और महत्वपूर्ण विषयों के व्याख्याता उपलब्ध नहीं हैं, जबकि हाई स्कूलों में हेडमास्टर, गणित शिक्षक, शारीरिक शिक्षा शिक्षक और अन्य आवश्यक पद लंबे समय से खाली पड़े हैं।
मढ़, छन्ब, आरएस पुरा सहित कई क्षेत्रों के स्कूलों में स्टाफ की कमी
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सुखनंदन चौधरी ने शिक्षण स्टाफ की कमी से प्रभावित सरकारी स्कूलों की विस्तृत सूची भी प्रस्तुत की। उन्होंने मढ़, छन्ब, पल्लांवाला, चौकी चोरा, आरएस पुरा, बिश्नाह, डबलेर सहित विभिन्न क्षेत्रों के विद्यालयों में रिक्त पदों का मुद्दा उठाया।
उन्होंने कहा कि शिक्षकों की कमी केवल प्रशासनिक समस्या नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई, परीक्षा परिणाम और भविष्य के अवसरों पर पड़ रहा है।
चौधरी ने सवाल उठाया कि जब सरकारी स्कूलों में बच्चों को उनके विषयों के शिक्षक तक उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं, तो सरकार शैक्षिक विकास के बड़े-बड़े दावे किस आधार पर कर रही है?
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को उन अभिभावकों के प्रति जवाबदेह होना चाहिए, जिनके बच्चों की शिक्षा सरकारी लापरवाही के कारण प्रभावित हो रही है।
हर सरकारी स्कूल में रिक्त पदों का तत्काल आकलन करने की मांग
पूर्व मंत्री ने सवाल किया कि शिक्षा क्षेत्र को सरकारी नीतियों और बजटीय आवंटन में प्राथमिकता दिए जाने के बावजूद इतनी बड़ी संख्या में रिक्त पद अब तक क्यों नहीं भरे गए।
उन्होंने मांग की कि जम्मू-कश्मीर के प्रत्येक सरकारी स्कूल में शिक्षण स्टाफ की वास्तविक आवश्यकता का तत्काल आकलन किया जाए। इसके बाद प्रधानाचार्यों, हेडमास्टरों, व्याख्याताओं और विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की समयबद्ध तरीके से तैनाती सुनिश्चित की जाए।
चौधरी ने कहा कि केवल घोषणाओं और कागजी योजनाओं से शिक्षा व्यवस्था में सुधार नहीं होगा। इसके लिए सरकार को जमीनी स्तर पर ठोस कदम उठाने होंगे।
क्या सरकारी स्कूलों की कमजोरी से निजी संस्थानों को मिल रहा लाभ?
सुखनंदन चौधरी ने सरकारी स्कूलों में लगातार बनी हुई शिक्षकों की कमी को लेकर एक और गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने आशंका जताई कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था की कमजोरियों का लाभ कुछ चुनिंदा निजी शिक्षण संस्थानों को मिल सकता है, जबकि इसका सबसे अधिक नुकसान सामान्य और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को उठाना पड़ रहा है।
उन्होंने शिक्षण स्टाफ की लगातार बनी कमी के कारणों की पारदर्शी जांच कराने की मांग की। साथ ही कहा कि यदि जानबूझकर उपेक्षा किए जाने के आरोप सामने आते हैं, तो उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
बच्चों के भविष्य की रक्षा करे सरकार या विफलता की जिम्मेदारी ले: चौधरी
प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में सुखनंदन चौधरी ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर के बच्चों का भविष्य किसी भी सरकार की प्रशासनिक उदासीनता की भेंट नहीं चढ़ने दिया जा सकता।
उन्होंने कहा कि सरकार को यह तय करना होगा कि वह बच्चों के शैक्षणिक भविष्य की रक्षा करना चाहती है या सरकारी स्कूलों की मौजूदा कमियों को इसी तरह जारी रहने देना चाहती है।
चौधरी ने दोहराया कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला बिना किसी देरी के सरकारी स्कूलों में रिक्त पदों को भरने के लिए ठोस कार्रवाई करें, अन्यथा शिक्षा व्यवस्था की विफलता की नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करें।
रिपोर्ट: राजेश कुमार जेके
बस्ती टाइम्स 24 न्यूज़ | जनता की आवाज़

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