बालोतराब्रेकिंग न्यूज़राजस्थान
औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरण संरक्षण को लेकर उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक, नदियों के पुनरुद्धार पर विशेष जोर

ब्यूरो चीफ सन्तोष कुमार गर्ग
औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरण संरक्षण को लेकर उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक, नदियों के पुनरुद्धार पर विशेष जोर
पाली, बालोतरा और जोधपुर में सीईटीपी की क्षमता बढ़ाने, नए प्लांट स्थापित करने और सीवरेज नेटवर्क की कार्ययोजना जल्द तैयार करने के निर्देश
औद्योगिक प्रदूषण पर नियंत्रण और पर्यावरण संरक्षण को प्रभावी बनाने के उद्देश्य से उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में पाली, बालोतरा और जोधपुर में औद्योगिक अपशिष्ट के उचित निस्तारण, कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) की क्षमता बढ़ाने, सीवरेज एवं जल निकासी व्यवस्था को मजबूत करने तथा नदियों के पुनरुद्धार से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई।
बैठक में संबंधित अधिकारियों को प्रदूषण नियंत्रण के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार कर निर्धारित समयसीमा में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए। साथ ही औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाले अपशिष्ट जल का उचित उपचार सुनिश्चित करने और बिना उपचारित पानी को नदियों एवं नालों में बहने से रोकने पर विशेष जोर दिया गया।
सीईटीपी की क्षमता बढ़ाने और नए प्लांट स्थापित करने के निर्देश
पाली, बालोतरा और जोधपुर में औद्योगिक प्रदूषण की समस्या के प्रभावी समाधान के लिए मौजूदा कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) की क्षमता बढ़ाने और आवश्यकता के अनुसार नए प्लांट स्थापित करने की दिशा में कार्य करने के निर्देश दिए गए।
इसके साथ ही सीवरेज नेटवर्क और जल निकासी व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए विस्तृत कार्ययोजना जल्द तैयार करने को कहा गया, ताकि औद्योगिक अपशिष्ट और घरेलू सीवेज का उचित प्रबंधन सुनिश्चित किया जा सके।
लूणी, जोजरी और बांडी नदियों के पुनरुद्धार पर फोकस
बैठक में लूणी, जोजरी और बांडी नदियों के पुनरुद्धार को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया। नदियों के प्रदूषण को कम करने के लिए नदी तल से स्लज हटाने, अवैध डिस्चार्ज पॉइंट बंद करने और प्रदूषित जल के प्रवाह पर प्रभावी नियंत्रण के निर्देश दिए गए।
नदियों में औद्योगिक अपशिष्ट और दूषित पानी के प्रवेश को रोकने के लिए संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर आवश्यक कार्रवाई करने पर भी बल दिया गया।
उपचारित सीवेज के पुनः उपयोग को बढ़ावा
अपशिष्ट प्रबंधन को मजबूत बनाने के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के माध्यम से उपचारित पानी का पुनः उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। इसका उद्देश्य जल संसाधनों का बेहतर उपयोग करना और प्रदूषित पानी को प्राकृतिक जल स्रोतों में मिलने से रोकना है।
इसके अलावा नालों में बिना उपचारित सीवेज के प्रवाह पर रोक लगाने और अपशिष्ट जल के उचित निस्तारण की व्यवस्था को प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया।
पौधरोपण और मृदा प्रदूषण की नियमित जांच
पर्यावरण संरक्षण के तहत नदी तटों पर पौधरोपण बढ़ाने, फाइटोरेमेडिएशन तकनीक अपनाने और मृदा प्रदूषण की नियमित जांच करने के निर्देश भी दिए गए।
फाइटोरेमेडिएशन ऐसी तकनीक है, जिसमें पौधों की मदद से मिट्टी और पानी में मौजूद कुछ प्रदूषकों को कम करने का प्रयास किया जाता है। इस तकनीक के उपयोग से प्रदूषित क्षेत्रों के पर्यावरणीय सुधार में मदद मिल सकती है।
प्रदूषण नियंत्रण के लिए समन्वित प्रयासों पर जोर
बैठक में स्पष्ट किया गया कि औद्योगिक प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण के लिए केवल उपचार संयंत्रों की स्थापना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि सीवरेज नेटवर्क, जल निकासी, अपशिष्ट प्रबंधन, नदी पुनरुद्धार और पर्यावरणीय निगरानी को एकीकृत रूप से मजबूत करना आवश्यक है।
पाली, बालोतरा और जोधपुर सहित संबंधित क्षेत्रों में प्रदूषण नियंत्रण के उपायों को प्रभावी ढंग से लागू करने और नदियों तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करना इस पहल का प्रमुख उद्देश्य है।

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