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पर्यटन से रोजगार और आर्थिक विकास की नई राह: वेलनेस, योग, पंचकर्म और होम स्टे को मिले विस्तार

विश्व पर्यटन दिवस पर विशेष
हरिद्वार। उत्तराखंड की पहचान केवल चारधाम और धार्मिक पर्यटन तक सीमित नहीं है। हिमालयी प्राकृतिक सौंदर्य, गंगा घाटी, वन क्षेत्र, झीलें, बुग्याल, साहसिक पर्यटन, योग-ध्यान की परंपरा और आयुर्वेद जैसी विरासत राज्य को पर्यटन की एक व्यापक अर्थव्यवस्था विकसित करने का अवसर देती हैं। विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर पर्यटन को रोजगार, स्थानीय स्वरोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ने की दिशा में वेलनेस पर्यटन को महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में देखा जा सकता है।
27 सितंबर को मनाए जा रहे विश्व पर्यटन दिवस 2026 की अंतरराष्ट्रीय थीम “Digital Agenda and Artificial Intelligence to Redesign Tourism” है। इसका एक महत्वपूर्ण संदेश यह भी है कि डिजिटल तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का इस्तेमाल पर्यटन स्थलों को अधिक सुगम, समावेशी और स्थानीय व्यवसायों के लिए उपयोगी बनाने में किया जा सकता है।
पर्यटन को रोजगार से जोड़ने की बड़ी संभावना
उत्तराखंड पर्यटन नीति 2023 ने वर्ष 2030 तक पर्यटन और उससे जुड़े क्षेत्रों में 20 लाख लोगों को रोजगार देने, पर्यटन को राज्य की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदानकर्ता बनाने तथा पर्यटन क्षेत्र में बड़े निवेश और PPP परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लक्ष्य निर्धारित किए हैं। नीति में पर्यटकों के औसत प्रवास को 4-5 दिन तक बढ़ाने और पर्यटन परियोजनाओं में टिकाऊ विकास को बढ़ावा देने की बात भी कही गई है।
इसका अर्थ केवल होटल और परिवहन क्षेत्र में रोजगार तक सीमित नहीं है। स्थानीय गाइड, टैक्सी, होम स्टे, हस्तशिल्प, स्थानीय खाद्य पदार्थ, कृषि उत्पाद, साहसिक पर्यटन, योग प्रशिक्षक, वेलनेस सेवाएं तथा स्थानीय सांस्कृतिक गतिविधियां भी पर्यटन अर्थव्यवस्था का हिस्सा बन सकती हैं।
वेलनेस पर्यटन बन सकता है उत्तराखंड की विशिष्ट पहचान
उत्तराखंड के लिए वेलनेस पर्यटन एक ऐसा क्षेत्र है, जिसमें प्राकृतिक वातावरण और पारंपरिक स्वास्थ्य प्रणालियों को पर्यटन अनुभव से जोड़ा जा सकता है। योग, ध्यान, साधना, आयुर्वेद, पंचकर्म और प्राकृतिक चिकित्सा से जुड़े प्रमाणित एवं विनियमित केंद्र विकसित किए जाएं तो पर्यटकों के ठहराव की अवधि बढ़ाने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा किए जा सकते हैं।
उत्तराखंड की पर्यटन नीति में भी Health, Rejuvenation & Medical Tourism के अंतर्गत राज्य की स्वास्थ्य एवं वेलनेस क्षमता तथा पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को पर्यटन से जोड़ने की संभावना दर्ज की गई है। नीति में राज्य में पहले से संचालित वेलनेस और योग केंद्रों का भी उल्लेख है।
डॉ. अवनीश कुमार उपाध्याय का कहना है कि उत्तराखंड को वेलनेस पर्यटन में अपनी प्राकृतिक और सांस्कृतिक विशिष्टता को आर्थिक अवसर में बदलने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। उनके अनुसार, “केरल की तर्ज पर उत्तराखंड में पंचकर्म और आयुर्वेद आधारित वेलनेस केंद्रों को विकसित करने के साथ योग, प्राकृतिक चिकित्सा, साधना एवं ध्यान केंद्रों को पर्यटन सर्किट से जोड़ा जा सकता है। इससे पर्यटन केवल घूमने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि स्वास्थ्य, मानसिक शांति और प्रकृति आधारित जीवनशैली का अनुभव भी बन सकता है।”
उनका सुझाव है कि ऐसे केंद्रों का विकास प्रशिक्षित मानव संसाधन, निर्धारित मानकों, गुणवत्ता नियंत्रण और प्रमाणित चिकित्सा सेवाओं के साथ किया जाए, ताकि वेलनेस पर्यटन की विश्वसनीयता बनी रहे।
मदन कौशिक: आयुष और वेलनेस में रोजगार व निवेश की संभावनाएं
उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने अप्रैल 2026 में आयुष विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान राज्य में आयुष एवं वेलनेस क्षेत्र में रोजगार और निवेश की संभावनाओं पर जोर दिया था। अमर उजाला की 7 अप्रैल 2026 की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा कि प्रदेश को आयुष एवं वेलनेस का हब बनाने का लक्ष्य है और वेलनेस में रोजगार बढ़ाने के लिए नई नीति तैयार की जानी चाहिए। उन्होंने धार्मिक स्थलों पर धर्मशालाओं और बड़े होटलों को आयुर्वेद से जोड़ने तथा ब्लॉक एवं न्याय पंचायत स्तर तक वेलनेस, योग और पंचकर्म सुविधाएं विकसित करने के प्रयासों की बात भी कही।
यह दृष्टिकोण पर्यटन और आयुष को अलग-अलग क्षेत्रों के बजाय एक संयुक्त आर्थिक गतिविधि के रूप में विकसित करने की संभावना को सामने रखता है।
मदन कौशिक का पर्यटन से जुड़ा यह दृष्टिकोण नया नहीं है। 2018 में पर्यटन को उद्योग का दर्जा दिए जाने के समय तत्कालीन सरकारी प्रवक्ता के रूप में उन्होंने कहा था कि इससे पर्यटन क्षेत्र में काम करने वाले कारोबारियों को MSME नीति के तहत मिलने वाले लाभ मिल सकेंगे और नए पर्यटन स्थलों के विकास से छोटे शहरों में बुनियादी सुविधाओं तथा व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
उसी दौर की एक रिपोर्ट में पर्यटन उद्योग के दायरे में आयुर्वेद, पंचकर्म, यूनानी चिकित्सा, नेचुरोपैथी, योग, होम्योपैथी, स्पा और साहसिक पर्यटन जैसी गतिविधियों को शामिल किए जाने की जानकारी भी दी गई थी।
केरल से सीख, लेकिन उत्तराखंड का अपना मॉडल
केरल ने आयुर्वेद और वेलनेस को पर्यटन उत्पाद के रूप में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित किया है। उत्तराखंड के सामने अवसर यह है कि वह केवल किसी दूसरे राज्य के मॉडल की नकल करने के बजाय हिमालय + आयुर्वेद + योग + ध्यान + प्राकृतिक चिकित्सा + स्थानीय संस्कृति + प्रकृति पर्यटन का अपना मॉडल विकसित करे।
हरिद्वार-ऋषिकेश को योग एवं आध्यात्मिक वेलनेस केंद्र, देहरादून-मसूरी को प्रकृति एवं वेलनेस गंतव्य, कुमाऊं और गढ़वाल के ग्रामीण क्षेत्रों को होम स्टे तथा प्रकृति-आधारित पर्यटन से जोड़ा जा सकता है। पर्वतीय क्षेत्रों में स्थानीय भोजन, जैविक उत्पाद, जड़ी-बूटी आधारित उत्पाद, लोक संस्कृति और पारंपरिक वास्तुकला को भी पर्यटन अनुभव का हिस्सा बनाया जा सकता है।
होम स्टे: पर्यटन का पैसा गांव तक पहुंचाने का माध्यम
उत्तराखंड पर्यटन विभाग की होम स्टे नीति का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यटकों को आवास सुविधा उपलब्ध कराने के साथ स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार और भवन मालिकों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर पैदा करना है।
सितंबर 2026 की रिपोर्टों के अनुसार सरकार होम स्टे क्षेत्र को और बढ़ावा देने तथा पंजीकरण प्रक्रिया को सरल बनाने की दिशा में कदम उठा रही है। ट्रेकिंग रूट पर होम स्टे के उन्नयन के लिए अनुदान बढ़ाने की पहल भी सामने आई है।
होम स्टे को केवल कमरों के किराये तक सीमित न रखकर स्थानीय भोजन, योग सत्र, ध्यान, प्रकृति भ्रमण, गांव की संस्कृति, कृषि अनुभव और स्थानीय उत्पादों से जोड़ा जाए तो एक पर्यटक के खर्च का अधिक हिस्सा स्थानीय अर्थव्यवस्था में रह सकता है।
मनोहारी दृश्यों को डिजिटल पर्यटन से जोड़ने की जरूरत
उत्तराखंड की वास्तविक ताकत उसके प्राकृतिक परिदृश्य हैं—हिमालय की चोटियां, घाटियां, नदियां, झीलें, जंगल, बुग्याल और गांव। लेकिन इन स्थलों को पर्यटन मानचित्र पर लाने के लिए केवल सड़क और होटल पर्याप्त नहीं हैं।
विश्व पर्यटन दिवस 2026 की AI और डिजिटल एजेंडा वाली थीम उत्तराखंड के लिए अवसर प्रस्तुत करती है। प्रत्येक पर्यटन स्थल के लिए डिजिटल मैप, बहुभाषी जानकारी, मौसम एवं यात्रा संबंधी अपडेट, स्थानीय होम स्टे की जानकारी, डिजिटल बुकिंग, प्रमाणित वेलनेस सेवाएं और AI आधारित यात्रा योजना उपलब्ध कराई जा सकती है। इससे कम चर्चित स्थलों तक पर्यटकों को पहुंचाने में मदद मिल सकती है। भारत सरकार भी पर्यटन क्षेत्र में डिजिटल प्लेटफॉर्म और AI आधारित सेवाओं को बढ़ाने पर जोर दे रही है।
पर्यटन का अगला चरण: धार्मिक से आगे वेलनेस और अनुभव आधारित पर्यटन
उत्तराखंड में धार्मिक पर्यटन की अपनी मजबूत पहचान है, लेकिन भविष्य के लिए पर्यटन उत्पादों में विविधता जरूरी है। चारधाम और प्रमुख धार्मिक स्थलों के साथ योग, ध्यान, आयुर्वेद, पंचकर्म, प्राकृतिक चिकित्सा, साहसिक पर्यटन, ग्रामीण पर्यटन, ट्रेकिंग, पक्षी अवलोकन, हिमालयी संस्कृति और स्थानीय खानपान को अलग-अलग तथा संयुक्त सर्किट के रूप में विकसित किया जा सकता है।
डॉ. अवनीश कुमार उपाध्याय के अनुसार, “उत्तराखंड में पर्यटन का अगला चरण ऐसा होना चाहिए जिसमें पर्यटक केवल किसी स्थान को देखकर वापस न जाए, बल्कि कुछ दिन रुककर प्रकृति, संस्कृति, योग, आयुर्वेद और स्थानीय जीवन का अनुभव करे। इससे पर्यटन से होने वाली आर्थिक गतिविधियां होटल तक सीमित न रहकर गांव, युवा, महिला उद्यमी, स्थानीय कारीगर, किसान, टैक्सी चालक और सेवा क्षेत्र तक पहुंच सकती हैं।”
स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार का व्यापक इकोसिस्टम
पर्यटन से रोजगार केवल सीधे पर्यटन व्यवसायों में नहीं बनता। एक सफल पर्यटन गंतव्य के साथ परिवहन, भोजन, कृषि, हस्तशिल्प, निर्माण, डिजिटल सेवाएं, गाइडिंग, सफाई, सुरक्षा, मनोरंजन और स्वास्थ्य-वेलनेस जैसी अनेक गतिविधियां जुड़ती हैं।
उत्तराखंड पर्यटन नीति 2030 तक पर्यटन एवं सहायक क्षेत्रों में 20 लाख रोजगार तथा 10 लाख पर्यटन कर्मियों के कौशल विकास का लक्ष्य रखती है।
इसलिए पर्वतीय युवाओं को स्थानीय स्तर पर टूरिस्ट गाइड, एडवेंचर स्पोर्ट्स, योग, वेलनेस हॉस्पिटैलिटी, डिजिटल मार्केटिंग, होम स्टे प्रबंधन, स्थानीय व्यंजन, फोटोग्राफी और प्रकृति व्याख्या जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षित करना पर्यटन को रोजगार से जोड़ने की महत्वपूर्ण कड़ी हो सकती है।
सतत पर्यटन ही दीर्घकालिक रास्ता
उत्तराखंड का पर्यटन मॉडल पर्यावरणीय संवेदनशीलता को ध्यान में रखकर विकसित करना होगा। अत्यधिक भीड़, कचरा, जल संकट और अनियोजित निर्माण से पर्यटन स्थलों की प्राकृतिक क्षमता प्रभावित हो सकती है। इसलिए पर्यटन नीति में भी नए पर्यटन प्रोजेक्टों में टिकाऊ विकास उपायों को अपनाने का लक्ष्य रखा गया है।
विश्व पर्यटन दिवस पर संदेश स्पष्ट है—उत्तराखंड के लिए पर्यटन केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ाने का विषय नहीं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का माध्यम है। यदि प्राकृतिक सौंदर्य, आध्यात्मिक परंपरा, आयुर्वेद, योग, पंचकर्म, प्राकृतिक चिकित्सा, होम स्टे और डिजिटल तकनीक को संतुलित तरीके से जोड़ा जाए तो राज्य अपने पर्यटन संसाधनों को रोजगार और स्थानीय आर्थिक अवसरों में बदल सकता है।

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