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त्रयोदशी पर जसोलधाम में उमड़ा श्रद्धा का जनसैलाब, दिनभर गूंजते रहे माँ के जयकारे

ब्यूरो चीफ सन्तोष कुमार गर्ग

 

त्रयोदशी पर जसोलधाम में उमड़ा श्रद्धा का जनसैलाब, दिनभर गूंजते रहे माँ के जयकारे

मंगला आरती से प्रारंभ हुआ दर्शन का क्रम; सुदूर क्षेत्रों से पदयात्रा कर एवं नंगे पांव पहुंचे श्रद्धालु, नवविवाहित जोड़ों ने लिया आशीर्वाद

छप्पन भोग, कन्या पूजन और भोजन प्रसादी के आयोजन; 13 हजार खेजड़ी के पौधों का वितरण, पुलिस प्रशासन एवं संस्थान के समन्वय से सुचारु रहीं व्यवस्थाएं

जसोल, 24 सितम्बर। लोक आस्था के प्रमुख केंद्र श्री राणी भटियाणी मंदिर संस्थान, जसोल में वर्ष के सबसे बड़े धार्मिक दिवसों में से एक एवं श्री राणीसा भटियाणीसा के पावन दिवस भाद्रपद शुक्ल पक्ष त्रयोदशी पर श्रद्धा का जनसैलाब उमड़ पड़ा। प्रातःकालीन मंगला आरती के साथ ही श्रद्धालुओं के आगमन एवं दर्शन का क्रम प्रारंभ हो गया। दिन चढ़ने के साथ श्रद्धालुओं की संख्या निरंतर बढ़ती रही और संपूर्ण जसोलधाम श्री राणीसा भटियाणीसा के जयकारों, भजनों एवं भक्तिमय वातावरण से गुंजायमान रहा।

श्रद्धालुओं ने निर्धारित दर्शन व्यवस्था के अनुरूप कतारबद्ध होकर श्री राणीसा भटियाणीसा, श्री बायोसा, श्री सवाई सिंह जी, श्री लाल बन्ना सा, श्री खेतलाजी तथा श्री काला-गौरा भैरूजी के मंदिरों में विधिवत दर्शन-पूजन किया। श्रद्धालुओं ने माँ के चरणों में शीश नवाकर अपने परिवार की सुख-समृद्धि, आरोग्य, खुशहाली एवं मंगल की कामना करते हुए आशीर्वाद प्राप्त किया।

सुदूर क्षेत्रों से पदयात्रा कर पहुंचे श्रद्धालु, आस्था के आगे छोटी पड़ी दूरी

त्रयोदशी के पावन दिवस पर श्रद्धालुओं की अटूट आस्था एवं भक्ति का अनुपम दृश्य दिखाई दिया। राजस्थान सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु लंबी दूरी तय कर जसोलधाम पहुंचे। अनेक श्रद्धालुओं ने सैकड़ों किलोमीटर की पदयात्रा पूरी की, वहीं कई श्रद्धालु नंगे पांव चलते हुए माँ के दरबार तक पहुंचे। लंबी यात्रा की थकान के बावजूद श्रद्धालुओं में दर्शन को लेकर उत्साह एवं श्रद्धा का भाव बना रहा।

श्रद्धालुओं ने जगत जननी राजराजेश्वरी श्री राणीसा भटियाणीसा के चरणों में शीश नवाकर स्वयं एवं अपने परिवार के साथ समस्त जगत के कल्याण, सुख-शांति, समृद्धि एवं खुशहाली की मंगलकामना की।

त्रयोदशी के इस विशेष दिवस पर बड़ी संख्या में नवविवाहित जोड़े भी जसोलधाम पहुंचे। नवदम्पतियों ने श्री राणीसा भटियाणीसा के दर्शन-पूजन कर माँ का आशीर्वाद प्राप्त किया तथा अपने दाम्पत्य जीवन में प्रेम, सुख, समृद्धि, शांति एवं मंगल की कामना की।

समस्त मंदिरों में छप्पन भोग, कन्या पूजन एवं भोजन प्रसादी

त्रयोदशी के पावन दिवस पर लाभार्थी परिवार द्वारा श्री राणीसा भटियाणीसा सहित जसोलधाम स्थित समस्त मंदिरों में छप्पन भोग एवं भोजन प्रसादी का भोग श्रद्धापूर्वक अर्पित किया गया। लाभार्थी हंसराज पुरोहित एवं परिवार ने समस्त मंदिरों में भोग अर्पित कर माँ का आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके पश्चात जसोलधाम पहुंचे श्रद्धालुओं में धर्मभाव एवं सेवाभाव के साथ प्रसादी का वितरण किया गया।

इस अवसर पर लाभार्थी परिवार द्वारा सर्व समाज की कन्याओं का विधिवत पूजन किया गया। कन्याओं को फल प्रसाद एवं अन्न प्रसाद ग्रहण करवाकर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया गया। कन्या पूजन के माध्यम से मातृशक्ति के प्रति श्रद्धा एवं सम्मान का भाव अभिव्यक्त हुआ। धार्मिक अनुष्ठानों के साथ सेवा, श्रद्धा एवं सामाजिक समरसता का सुंदर स्वरूप पूरे दिन जसोलधाम में दिखाई दिया।

शेरगढ़ विधायक बाबू सिंह राठौड़ ने जनप्रतिनिधियों के साथ किए दर्शन

भाद्रपद शुक्ल पक्ष त्रयोदशी के अवसर पर शेरगढ़ विधायक बाबू सिंह राठौड़ भी बालेसर के नवनिर्वाचित भाजपा पार्षदों के साथ जसोलधाम पहुंचे। उनके साथ 21 एवं 22 सितम्बर को निर्वाचित अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष ने भी श्री राणीसा भटियाणीसा के दर्शन-पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

विधायक राठौड़ एवं जनप्रतिनिधियों ने माँ के चरणों में शीश नवाकर बालेसर सहित संपूर्ण राजस्थान में सुख-शांति, समृद्धि, खुशहाली, धन-धान्य एवं जनकल्याण की मंगलकामना की।

ढोल-थाली की टंकार और लोक संस्कृति के रंगों से सराबोर हुआ जसोलधाम

त्रयोदशी के धार्मिक आयोजन में मालाणी की समृद्ध लोक संस्कृति की मनोहारी छटा भी दिखाई दी। दिनभर ढोल-थाली की टंकार के बीच स्थानीय दमामियों एवं बाड़मेर क्षेत्र के हड़वा से पहुंचे मांगणियार कलाकारों ने अपनी सुमधुर वाणी में भजनों की प्रस्तुतियां दीं। भक्ति से ओतप्रोत स्वर लहरियों के बीच श्रद्धालु भावविभोर दिखाई दिए।

छप्पन भोग एवं भोजन प्रसादी के दौरान स्थानीय दमामियों की ढोल-थाली की टंकार के साथ पारंपरिक गैर नृत्य एवं घोड़ा नृत्य की आकर्षक प्रस्तुतियां हुईं। लोक वाद्यों की गूंज और पारंपरिक नृत्य ने धार्मिक आयोजन में मालाणी की लोक परंपराओं का जीवंत स्वरूप प्रस्तुत किया।

त्रयोदशी की पूर्व संध्या पर आयोजित रात्रि जागरण में स्थानीय भजन कलाकारों ने श्री राणीसा भटियाणीसा की महिमा से जुड़े भजनों की भावपूर्ण प्रस्तुतियां दीं। देर रात्रि तक चली भक्ति की स्वर लहरियों ने श्रद्धालुओं को भक्ति रस से सराबोर किया।

सीसीटीवी निगरानी से लेकर गोल्फ कार्ट तक व्यापक व्यवस्थाएं

त्रयोदशी पर श्रद्धालुओं की भारी संख्या को ध्यान में रखते हुए संस्थान द्वारा सुरक्षा, सुगम दर्शन, आवागमन एवं श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यापक स्तर पर व्यवस्थाएं की गईं। मंदिर परिसर एवं प्रमुख स्थानों पर स्थापित सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से सतत निगरानी रखी गई। पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम के माध्यम से श्रद्धालुओं को दर्शन मार्ग, प्रवेश-निकास, प्रसादी स्थल एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं के संबंध में समय-समय पर मार्गदर्शन दिया गया।

श्रद्धालुओं को गर्मी से राहत देने के लिए मिस्टिंग सिस्टम संचालित रहा। बुजुर्ग एवं दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए व्हीलचेयर एवं गोल्फ कार्ट की सुविधा उपलब्ध कराई गई। इसके साथ बैठने की समुचित व्यवस्था, प्रसाद अर्पण की सुव्यवस्थित प्रणाली, पैदल पुल, भोजन प्रसादी, शीतल पेयजल एवं ठहरने की व्यवस्था सहित अनेक सुविधाएं उपलब्ध रहीं।

श्रद्धालुओं की आवाजाही को निर्बाध एवं व्यवस्थित बनाए रखने के लिए विभिन्न स्थानों पर संस्थान की टीम एवं सुरक्षा कार्मिक तैनात रहे। दर्शनार्थियों को निर्धारित मार्ग से प्रवेश एवं निकास करवाते हुए व्यवस्थाओं के संबंध में निरंतर मार्गदर्शन दिया गया।

रिवरफ्रंट पार्किंग में वाहनों के साथ भोजन प्रसादी एवं पेयजल की व्यवस्था

संस्थान द्वारा विकसित रिवरफ्रंट पार्किंग में बड़ी संख्या में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के वाहनों के लिए सुव्यवस्थित पार्किंग व्यवस्था की गई। वाहनों के सुरक्षित एवं क्रमबद्ध ठहराव के साथ श्रद्धालुओं की मंदिर तक आवाजाही को व्यवस्थित रखने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की गईं।

रिवरफ्रंट पार्किंग परिसर में श्रद्धालुओं के लिए संस्थान द्वारा निःशुल्क भोजन प्रसादी एवं शीतल पेयजल उपलब्ध कराया गया। इससे दूर-दराज से यात्रा कर पहुंचे श्रद्धालुओं को पार्किंग स्थल पर ही आवश्यक सुविधाओं का लाभ मिला।

“श्रद्धालुओं की सेवा हमारा प्रथम ध्येय” — कुँवर हरिश्चंद्र सिंह जसोल

संस्थान के प्रवक्ता कुँवर हरिश्चंद्र सिंह जसोल ने कहा कि संस्थान सदैव श्रद्धालुओं की सेवा, सुविधा एवं सुगम दर्शन के लिए समर्पित है।

उन्होंने कहा, “जसोलधाम आने वाला प्रत्येक श्रद्धालु हमारे लिए सम्माननीय है। उसकी सेवा करना तथा उसे सुगम, सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित दर्शन उपलब्ध करवाना संस्थान का प्रथम ध्येय है। श्रद्धालुओं की निरंतर बढ़ती संख्या को ध्यान में रखते हुए संस्थान द्वारा सुविधाओं का लगातार विस्तार एवं सुदृढ़ीकरण किया जा रहा है। हमारा प्रयास है कि देश-विदेश के किसी भी हिस्से से जसोलधाम आने वाला प्रत्येक भक्त माँ के दर्शन के साथ सेवा, व्यवस्था और आत्मीयता का सुखद अनुभव लेकर लौटे।”

उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की सुविधा को केंद्र में रखकर संस्थान द्वारा दर्शन व्यवस्था, भोजन प्रसादी, पेयजल, आवास, पार्किंग, बुजुर्ग एवं दिव्यांगजन की सहायता सहित विभिन्न क्षेत्रों में निरंतर कार्य किया जा रहा है।

पुलिस प्रशासन, संस्थान और श्रद्धालुओं के समन्वय से सुचारु रहीं व्यवस्थाएं — कर्नल शंभू सिंह देवड़ा

संस्थान के ट्रस्ट सदस्य एवं सुरक्षा समिति अध्यक्ष कर्नल शंभू सिंह देवड़ा ने कहा कि त्रयोदशी वर्ष के प्रमुख धार्मिक दिवसों में से एक है और इस दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु जसोलधाम पहुंचते हैं। प्रत्येक श्रद्धालु की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए उसे सहज, अनुशासित एवं सुगम दर्शन करवाना संस्थान की प्रमुख प्राथमिकता रही।

उन्होंने कहा, “सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ रखने के लिए मंदिर परिसर एवं आसपास के प्रमुख क्षेत्रों में सीसीटीवी निगरानी, सुरक्षा कार्मिकों की तैनाती, प्रवेश एवं निकास मार्गों का सुव्यवस्थित संचालन तथा पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम के माध्यम से निरंतर मार्गदर्शन की व्यवस्था रही। संस्थान की विभिन्न टीमों और सुरक्षा कार्मिकों ने आपसी समन्वय के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन किया।”

कर्नल देवड़ा ने बताया कि पूरे आयोजन के दौरान जिला पुलिस प्रशासन का विशेष सहयोग प्राप्त हुआ। पुलिस अधिकारियों एवं कार्मिकों ने संस्थान के साथ निरंतर समन्वय रखते हुए सुरक्षा व्यवस्था, यातायात प्रबंधन, श्रद्धालुओं की आवाजाही एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं में सक्रिय सहयोग प्रदान किया। विभिन्न स्थानों पर तैनात पुलिस कार्मिकों ने श्रद्धालुओं के साथ सामंजस्य स्थापित कर उनका मार्गदर्शन किया तथा निर्धारित व्यवस्था के अनुरूप सुगम दर्शन में सहयोग प्रदान किया।

उन्होंने कहा, “भारी संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन के बावजूद भक्तों ने कतारबद्ध दर्शन व्यवस्था का पालन करते हुए धैर्य, अनुशासन एवं सहयोग का परिचय दिया। जिला पुलिस प्रशासन, संस्थान की टीम, सुरक्षा कार्मिकों, सेवाभावी कार्यकर्ताओं और श्रद्धालुओं के सामूहिक सहयोग एवं समन्वय से दिनभर की व्यवस्थाओं का सुचारु संचालन संभव हुआ।”

कर्नल शंभू सिंह देवड़ा ने संस्थान की ओर से जिला पुलिस प्रशासन, पुलिस अधिकारियों एवं जवानों, व्यवस्था में लगे कार्मिकों, सेवाभावी कार्यकर्ताओं तथा श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सभी के सहयोग से प्रत्येक श्रद्धालु को सुरक्षित, सहज एवं शांत वातावरण में श्री राणीसा भटियाणीसा सहित मंदिर परिसर स्थित समस्त मंदिरों के दर्शन करवाने की व्यवस्था सुचारु रूप से संचालित हुई।

त्रयोदशी की रात्रि में हुआ रात्रि जागरण, सायंकालीन आरती का हुआ लाइव प्रसारण

त्रयोदशी के पावन दिवस पर रात्रि जागरण का आयोजन किया गया। इसमें मांगणियार कलाकारों ने अपनी पारंपरिक गायन शैली में श्री राणीसा भटियाणीसा की महिमा से जुड़े भजनों की भावपूर्ण प्रस्तुतियां दीं। रात्रि जागरण के माध्यम से देर रात्रि तक जसोलधाम में भक्ति एवं लोक संस्कृति का वातावरण बना रहा।

इसके साथ ही सायंकालीन आरती का लाइव प्रसारण किया गया। इसके माध्यम से देश-विदेश में निवासरत श्री राणीसा भटियाणीसा के असंख्य श्रद्धालुओं ने अपने घर से ही माँ की आरती एवं दर्शन का लाभ प्राप्त किया।

“एक पेड़ माँ माजीसा के नाम” — एक वर्ष में 13 लाख खेजड़ी लगाने का महासंकल्प

श्री राणीसा भटियाणीसा के जन्मोत्सव के पावन उपलक्ष्य में श्री राणी भटियाणी मंदिर संस्थान के अध्यक्ष आदरणीय रावल श्री किशन सिंह जी जसोल द्वारा 12 वर्षों तक किए गए अनुष्ठान को प्रकृति संरक्षण के स्थायी संकल्प से जोड़ते हुए “एक पेड़ माँ माजीसा के नाम” अभियान का शुभारंभ किया गया है। इस अभियान के अंतर्गत आगामी एक वर्ष में माँ माजीसा के भक्तों की सहभागिता से 13 लाख खेजड़ी के पौधे लगाने का आह्वान किया गया है। इसके साथ ही श्रद्धालुओं से रोपित खेजड़ी को आगामी 12 वर्षों तक माँ माजीसा के स्वरूप में श्रद्धापूर्वक सेवा, सिंचन, देखरेख एवं संरक्षण प्रदान करने का संकल्प लेने का आह्वान किया गया है।

अभियान का शुभारंभ संस्थान अध्यक्ष रावल श्री किशन सिंह जी जसोल ने स्वयं पौधरोपण कर किया। अभियान का प्रथम खेजड़ी का पौधा उनके निज निवास रावलगढ़, जसोल में तथा दूसरा पौधा श्री राणी भटियाणी मंदिर संस्थान परिसर में उनके द्वारा रोपित किया गया। अभियान के शुभारंभ के अवसर पर संस्थान द्वारा 13 हजार खेजड़ी के पौधे श्रद्धालुओं को वितरित किए गए। भाद्रपद शुक्ल पक्ष त्रयोदशी के विशेष दिवस पर जसोलधाम पहुंचे श्रद्धालु इन पौधों को माँ माजीसा के आशीर्वाद एवं प्रकृति संरक्षण के संकल्प के रूप में अपने साथ लेकर गए।

संस्थान अध्यक्ष ने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे प्राप्त खेजड़ी को सामान्य पौधा न मानकर माँ माजीसा के स्वरूप के रूप में श्रद्धापूर्वक स्वीकार करें। इसे अपने घर, खेत अथवा अन्य उपयुक्त स्थान पर विधिपूर्वक रोपित करें और आगामी 12 वर्षों तक परिवार के सदस्य की भांति इसकी सेवा एवं देखरेख करते हुए नियमित सिंचन और संरक्षण करें। पौधे को सुरक्षित रखते हुए एक सुदृढ़ वृक्ष का स्वरूप देना माँ माजीसा के प्रति श्रद्धा एवं सेवा और प्रकृति के प्रति उत्तरदायित्व का प्रतीक बने।

इस संकल्प को निरंतर जीवंत बनाए रखने के लिए श्रद्धालुओं से आग्रह किया गया है कि प्रत्येक वर्ष श्री राणीसा भटियाणीसा के जन्मोत्सव पर अपने द्वारा लगाए गए खेजड़ी के पौधे अथवा विकसित वृक्ष के साथ सेल्फी लेकर जसोलधाम के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल को टैग करें तथा उसकी प्रगति साझा करें। इससे पौधरोपण से लेकर वृक्ष बनने तक की यात्रा माँ माजीसा के प्रति श्रद्धा, परिवार की सेवा और पर्यावरण संरक्षण के संकल्प से निरंतर जुड़ी रहेगी।

“एक पेड़ माँ माजीसा के नाम” अभियान के माध्यम से संस्थान का लक्ष्य आगामी एक वर्ष में 13 लाख खेजड़ी के पौधों का रोपण जनभागीदारी से करवाना तथा प्रत्येक रोपित पौधे की आगामी 12 वर्षों तक सेवा एवं संरक्षण की भावना विकसित करना है। इससे मरुधरा की जीवनरेखा खेजड़ी का संरक्षण एवं संवर्धन होगा, हरियाली का विस्तार होगा और माँ माजीसा के प्रति जन-जन की आस्था प्रकृति संरक्षण की एक दीर्घकालीन एवं प्रेरणादायी परंपरा का स्वरूप ग्रहण करेगी।

“एक पेड़ माँ माजीसा के नाम” — एक वर्ष में 13 लाख खेजड़ी लगाने का महासंकल्प

श्री राणीसा भटियाणीसा के पावन दिवसों में सबसे प्रमुख दिवसों में से एक भाद्रपद शुक्ल पक्ष त्रयोदशी के पावन अवसर पर संस्थान द्वारा जनआस्था को प्रकृति संरक्षण से जोड़ते हुए “एक पेड़ माँ माजीसा के नाम” अभियान का शुभारंभ किया गया। संस्थान अध्यक्ष रावल किशन सिंह जसोल के मार्गदर्शन में प्रारंभ इस अभियान के माध्यम से आगामी एक वर्ष में माँ माजीसा के भक्तों की सहभागिता से 13 लाख खेजड़ी के पौधे लगाने का महासंकल्प लिया गया है। श्रद्धा, सेवा और प्रकृति संरक्षण को एक सूत्र में जोड़कर जन-जन तक पहुंचाने की दिशा में यह संस्थान की विशेष पहल है।

अभियान का शुभारंभ संस्थान अध्यक्ष रावल किशन सिंह जसोल ने स्वयं खेजड़ी का पौधा रोपकर किया। अभियान का प्रथम पौधा उनके निज निवास रावलगढ़, जसोल में तथा दूसरा पौधा संस्थान परिसर में उनके द्वारा रोपित किया गया। इसी पावन अवसर पर अभियान को व्यापक जनभागीदारी से जोड़ते हुए संस्थान की ओर से 13 हजार खेजड़ी के पौधे श्रद्धालुओं को निःशुल्क वितरित किए गए। श्रद्धालु इन पौधों को माँ माजीसा के आशीर्वाद और प्रकृति संरक्षण के पवित्र संकल्प के रूप में श्रद्धापूर्वक अपने साथ लेकर गए।

संस्थान द्वारा देश-प्रदेश में निवासरत माँ माजीसा के श्रद्धालुओं से अपने घर, खेत, गांव, सार्वजनिक स्थल एवं अन्य उपयुक्त स्थानों पर स्वयं पौधों की व्यवस्था कर माँ माजीसा के नाम खेजड़ी का पौधा रोपने और इस अभियान में सहभागी बनने का आह्वान किया गया है। श्रद्धालुओं की व्यापक सहभागिता से आगामी एक वर्ष में 13 लाख खेजड़ी के पौधे लगाने के महासंकल्प को साकार करते हुए मरुधरा में हरियाली के विस्तार और खेजड़ी के संरक्षण-संवर्धन की व्यापक जनभावना विकसित की जाएगी।

इस अभियान के साथ एक विशेष आध्यात्मिक भाव भी जुड़ा है। माँ माजीसा के नाम से रोपित प्रत्येक खेजड़ी को माँ माजीसा की जीवंत मूर्ति के रूप में श्रद्धापूर्वक स्वीकार करते हुए उसकी सेवा को माँ माजीसा की सेवा तथा उसकी पूजा को माँ माजीसा की पूजा के पवित्र भाव से जोड़ा गया है। श्रद्धालु अपने द्वारा रोपित खेजड़ी का आगामी 12 वर्षों तक नियमित सिंचन, देखरेख, सुरक्षा, सेवा और संवर्धन करेंगे। पौधे से सुदृढ़ वृक्ष बनने तक उसकी सेवा-पूजा का यह क्रम माँ माजीसा के प्रति श्रद्धा और प्रकृति के प्रति समर्पण का 12 वर्षीय पवित्र सेवा-अनुष्ठान बनेगा।

इस सेवा-अनुष्ठान को निरंतर जीवंत और प्रेरणादायी बनाए रखने के लिए श्रद्धालुओं से आग्रह किया गया है कि प्रत्येक वर्ष भाद्रपद शुक्ल पक्ष त्रयोदशी के पावन दिवस पर अपने द्वारा रोपित खेजड़ी के पौधे अथवा विकसित वृक्ष के साथ सेल्फी लेकर जसोलधाम के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल को टैग करते हुए उसकी प्रगति साझा करें। प्रतिवर्ष साझा की जाने वाली ये तस्वीरें पौधे से वृक्ष बनने तक की यात्रा को संजोएंगी और अन्य श्रद्धालुओं को भी आस्था से जुड़े इस प्रकृति संरक्षण अभियान में सहभागी बनने की प्रेरणा देंगी।

“एक पेड़ माँ माजीसा के नाम” अभियान आस्था, सेवा और प्रकृति संरक्षण का संगम है। एक वर्ष में 13 लाख खेजड़ी का रोपण तथा प्रत्येक रोपित खेजड़ी की आगामी 12 वर्षों तक माँ माजीसा की जीवंत मूर्ति के भाव से सेवा-पूजा मरुधरा में हरियाली के विस्तार के साथ प्रकृति संरक्षण की स्थायी जनपरंपरा का स्वरूप लेगी। माँ माजीसा के नाम से रोपित और श्रद्धा से संवर्धित ये खेजड़ी वृक्ष आने वाली पीढ़ियों के लिए आस्था, सेवा, पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति के प्रति उत्तरदायित्व की जीवंत धरोहर बनेंगे।

Santosh Kumar Garg

Beauro Chief Balotra Rajasthan

Santosh Kumar Garg

Beauro Chief Balotra Rajasthan

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