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निगम में सत्ता के दो रंग। सुबह कांग्रेस का रंग। दोपहर बाद भाजपा का रंग… लेकिन शहर को चाहिए सिर्फ विकास का रंग

राजस्थान हेड डॉ राम दयाल भाटी

 

निगम में सत्ता के दो रंग। सुबह कांग्रेस का रंग। दोपहर बाद भाजपा का रंग… लेकिन शहर को चाहिए सिर्फ विकास का रंग

बीकानेर नगर निगम में गुरुवार का दिन राजनीतिक रूप से खास रहा। महापौर अनिल कल्ला और उपमहापौर पंकज गहलोत ने अपने-अपने पदभार ग्रहण कर लिए। खास बात यह है कि निगम के इतिहास में यह पहला मौका है जब महापौर कांग्रेस का और उपमहापौर भाजपा का है। यानी सदन की तस्वीर भी कमोबेश फिफ्टी-फिफ्टी है और अब दोनों दलों को साथ लेकर चलना ही इस बोर्ड की सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौती होगी। हालांकि दोनों तरफ से निकला संदेश लगभग एक जैसा था—बीकानेर के विकास के लिए मिलकर काम करेंगे।

महापौर अनिल कल्ला ने पदभार ग्रहण करने के बाद साफ कहा कि चुनाव तक भाजपा और कांग्रेस थी, लेकिन अब हम जनप्रतिनिधि हैं और शहर के विकास के लिए मिलकर काम करेंगे। जरूरत पड़ी तो सरकार से मिलेंगे और शहर के दूसरे जनप्रतिनिधियों को भी साथ लेकर चलेंगे। उन्होंने साफ-सफाई को अपनी प्राथमिकता बताते हुए कहा कि शहर को स्वच्छ रखना उनकी जिम्मेदारी है और इसमें कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।

उधर उपमहापौर पंकज गहलोत ने भी मीडिया से बातचीत में किसी तरह के विवाद से इनकार करते हुए कहा कि उनके और महापौर के बीच कोई विवाद नहीं है। उन्होंने दीपावली से पहले शहर में साफ-सफाई, स्ट्रीट लाइट और सीवरेज जैसी समस्याओं के समाधान को प्राथमिकता बताया।

बयान अच्छे हैं, अब बारी काम की है…

राजनीति में पदभार ग्रहण करने के मौके पर विकास, भाईचारे और शहरहित की बातें सुनने में अच्छी लगती हैं। और सच कहें तो बीकानेर को इस समय ऐसी ही राजनीति की जरूरत भी है। लेकिन असली परीक्षा भाषणों की नहीं, काम की होगी।

शहर के सामने समस्याओं की लंबी सूची है—सफाई व्यवस्था, आवारा पशु, खराब स्ट्रीट लाइटें, सीवरेज की समस्या और जगह-जगह गड्ढों में तब्दील हो चुकी सड़कें। दीपावली सिर पर है और बाजारों से लेकर मोहल्लों तक शहर की व्यवस्थाओं को लेकर लोगों की उम्मीदें नए बोर्ड से जुड़ी हैं। पिछले करीब 22 महीनों से नगर निगम में निर्वाचित बोर्ड नहीं था। प्रशासकीय व्यवस्था के तहत अधिकारी निगम चलाते रहे, लेकिन शहर की व्यवस्थाओं में वह बदलाव दिखाई नहीं दिया जिसकी लोगों को उम्मीद थी। अब शहर के पास एक निर्वाचित महापौर और उपमहापौर हैं, इसलिए जवाबदेही भी सीधे राजनीतिक नेतृत्व की होगी।

फिफ्टी-फिफ्टी की यह तस्वीर अवसर भी है और चुनौती भी

महापौर कांग्रेस के हैं और उपमहापौर भाजपा के। ऐसे में इसे केवल राजनीतिक खींचतान के चश्मे से देखने के बजाय एक अलग नजरिए से भी देखा जा सकता है। यदि दोनों वास्तव में अपने आज के बयानों पर कायम रहते हैं तो यह व्यवस्था बीकानेर के लिए एक प्रयोग भी बन सकती है—सत्ता में दो राजनीतिक दल, लेकिन एजेंडा एक यानी शहर का विकास। लेकिन इसके उलट यदि फिफ्टी-फिफ्टी की यह स्थिति आरोप-प्रत्यारोप और राजनीतिक खींचतान में बदल गई तो नुकसान किसी एक दल का नहीं, सीधे बीकानेर का होगा।

दीपावली नजदीक है। ऐसे में महापौर और उपमहापौर के सामने अपनी पहली बड़ी परीक्षा का मैदान भी तैयार है। अब देखना यह है कि आने वाले दिनों में निगम में राजनीति बोलती है या काम। क्योंकि अगर कुछ ही दिनों में शहर की तस्वीर बदलने लगेगी तो आज के बयान राजनीतिक औपचारिकता नहीं, संकल्प साबित होंगे। और अगर समस्याएं जस की तस रहीं तो फिर आप दोनों से भरोसा उठ जायेगा। आप दोनों को भरोसा कायम रखना है तो अपने बयानों को धरातल पर सही साबित करो।

Dr Ram Dayal Bhati

Editor Rajasthan Mobile Number 97848 14914

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