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भाजपा टिकट वितरण को लेकर सेन समाज में नाराजगी, राजवीर मारू का टिकट नहीं मिलने पर विरोध के स्वर तेज

राजस्थान हेड डॉ राम दयाल भाटी
बीकानेर। नगर निगम चुनाव को लेकर बीकानेर में भारतीय जनता पार्टी के टिकट वितरण के बाद सेन समाज में नाराजगी के स्वर तेज हो गए हैं। समाज के लोगों ने भाजपा द्वारा सेन समाज को अपेक्षित राजनीतिक प्रतिनिधित्व नहीं दिए जाने पर असंतोष जताया है। सबसे ज्यादा विरोध युवा भाजपा नेता एवं सेन समाज के चर्चित चेहरे राजवीर मारू को टिकट नहीं दिए जाने को लेकर सामने आ रहा है।
सेन समाज के लोगों का कहना है कि राजवीर मारू पिछले करीब 22 वर्षों से पार्टी के लिए सक्रिय रूप से मेहनत और संघर्ष करते आ रहे हैं। वार्ड नंबर 36, इंदिरा कॉलोनी से उन्हें मजबूत दावेदार माना जा रहा था। समाज के लोगों का आरोप है कि लंबे समय से पार्टी के लिए काम करने वाले सक्रिय कार्यकर्ताओं की अपेक्षा अन्य आधारों पर टिकट वितरण किया गया, जिससे जमीनी कार्यकर्ताओं में निराशा है।
80 वार्डों में पांच टिकटों की मांग
सेन समाज के प्रतिनिधियों के अनुसार नगर निगम चुनाव में समाज की ओर से बीकानेर जिले के कुल 80 वार्डों में कम से कम पांच टिकट दिए जाने की मांग भाजपा के समक्ष रखी गई थी। समाज का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में वार्ड होने के बावजूद सेन समाज को अपेक्षित प्रतिनिधित्व नहीं मिलना राजनीतिक रूप से निराशाजनक है।
समाज के लोगों का दावा है कि बीकानेर संभाग में सेन समाज की आबादी करीब डेढ़ लाख से अधिक है। इसके बावजूद राजनीतिक हिस्सेदारी में अपेक्षित प्रतिनिधित्व नहीं मिलने से समाज में नाराजगी बढ़ रही है।
भाजपा के बहिष्कार की चेतावनी
टिकट वितरण को लेकर सेन समाज के कुछ लोगों ने आगामी चुनाव में भाजपा के प्रत्याशियों का विरोध और बहिष्कार करने की चेतावनी दी है। उनका कहना है कि यदि पार्टी ने समाज की भावनाओं और लंबे समय से सक्रिय कार्यकर्ताओं की अनदेखी की तो इसका असर चुनाव परिणामों पर पड़ सकता है।
राजवीर मारू को टिकट नहीं दिए जाने को समाज के लोग इस पूरे विरोध का प्रमुख कारण बता रहे हैं। उनका कहना है कि वर्षों से पार्टी के लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व नहीं मिलने से कार्यकर्ताओं के बीच असंतोष पैदा होना स्वाभाविक है।
चुनाव परिणाम के बाद बदलेगा राजनीतिक समीकरण?
सेन समाज के कुछ प्रतिनिधियों का कहना है कि टिकट वितरण का असर आगामी चुनाव में देखने को मिल सकता है। उनका दावा है कि यदि समाज का एक बड़ा वर्ग भाजपा से दूरी बनाता है तो पार्टी के लिए नगर निगम में बोर्ड बनाने की राह मुश्किल हो सकती है।
वहीं, समाज के कुछ लोगों ने आगामी 14 तारीख को घोषित होने वाले चुनाव परिणामों के बाद कांग्रेस के बोर्ड बनने की संभावना भी जताई है। हालांकि वास्तविक स्थिति चुनाव परिणाम आने के बाद ही स्पष्ट होगी।
फिलहाल टिकट वितरण को लेकर सेन समाज की नाराजगी ने बीकानेर की स्थानीय राजनीति में चर्चा तेज कर दी है। अब देखना होगा कि भाजपा नेतृत्व समाज के विरोध और कार्यकर्ताओं की नाराजगी को किस तरह संभालता है और इसका चुनावी परिणामों पर कितना प्रभाव पड़ता है।

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