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जगद्गुरु रामानन्दाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय के साथ हुआ मानसिक संताप व असाध्य रोगों से मुक्ति शोध का एमओयू

राजस्थान हेड डॉ राम दयाल भाटी
जयपुर। संपूर्ण मानवता को मानसिक संताप और असाध्य रोगों से मुक्ति दिलाने के उद्देश्य से परम पूज्य ओम सिद्धेश्वर ब्रह्मर्षिजी एवं अनंतश्री विभूषित त्रिवेणी संतश्री नारायण दासजी महाराज के ‘विश्व शांति अभियान’ संदेश के अंतर्गत एक युगांतरकारी त्रिपक्षीय शोध समझौता (एमओयू) संपन्न हुआ। यह वैश्विक पहल जगद्गुरु रामानन्दाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. मदन मोहन झा की अध्यक्षता में सनातन विज्ञान और आधुनिक चिकित्सा को एक मंच पर लाने के संकल्प के साथ शुरू की गई है। इस अवसर पर कुलगुरु प्रो. मदन मोहन झा ने बताया कि इस महाअभियान के तहत वर्तमान समय की सबसे बड़ी वैश्विक समस्याओं क्रमशः डिप्रेशन (अवसाद), एंजाइटी (चिंता), हृदय रोग और कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों के स्थाई उपचार के लिए प्राचीन भारतीय ज्ञान और आधुनिक मेडिकल साइंस मिलकर काम करेंगे। उन्होंने बताया कि जगद्गुरु रामानन्दाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय इस संपूर्ण शोध का मुख्य केंद्र होगा। विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. गुंजन सोनी ने बताया कि वैदिक मंत्रों की तरंगों और ध्वनि विज्ञान (मंत्र थैरेपी) के इंसानी दिमाग व न्यूरॉन्स पर पड़ने वाले प्रभावों का गहन वैज्ञानिक अनुसंधान किया जाएगा। प्रारंभिक एवं उत्तर जांच (आधुनिक चिकित्सा) देश के सुविख्यात कार्डियोलॉजिस्ट एवं निदेशक डॉ. सुनील कुमार गर्सा के नेतृत्व में दाना शिवम हार्ट एंड सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, जयपुर इस रिसर्च से जुड़ने वाले मरीजों की प्रारंभिक (प्री ट्रीटमेंट) और मंत्र व गो-आधारित चिकित्सा के बाद की सभी वैज्ञानिक व क्लीनिकल जांचें करेगा, ताकि परिणामों को मेडिकल साइंस की कसौटी पर वैश्विक मान्यता मिल सके। डॉ. गुंजन सोनी ने बताया कि काऊ कडलिंग एवं गाय थेरेपी सेंटर्स (प्राकृतिक आवास) रुद्रशिवम लाइवस्टोक्स एसोसिएशन के निदेशक संजय शर्मा के संयोजन में मरीजों के लिए विशेष हीलिंग सेंटर्स विकसित किए जाएंगे। यहां मरीजों को प्रकृति के बिल्कुल नजदीक ले जाकर ‘काऊ कडलिंग’ (गाय को गले लगाना), ‘काऊ थेरेपी’ और पंचगव्य आधारित प्राकृतिक वातावरण प्रदान किया जाएगा, जो मानसिक और शारीरिक रोगों को जड़ से समाप्त करने में सहायक सिद्ध होगा। “सिद्धेश्वर वर्ल्ड फाउंडेशन श्रीब्रह्मर्षि आश्रम तिरुपति के राष्ट्रीय संयोजक संजय शर्मा ने बताया कि हमारा मुख्य उद्देश्य गाय, ग्रामीण विकास, पर्यावरण और सनातन संस्कृति है। यह परियोजना सिद्धगुरु सिद्धेश्वर ब्रह्मर्षिजी तथा त्रिवेणी धाम के संतश्री नारायण दासजी महाराज के अलौकिक आशीर्वाद और उनके वैश्विक शांति अभियान को समर्पित है। उन्होंने यह भी बताया कि विश्व कल्याण की दृष्टि से यह महायज्ञ केवल एक चिकित्सा पद्धति नहीं, बल्कि गाय, ग्राम विकास, पर्यावरण, सनातन और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के समागम से विश्व में शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने का महासंकल्प है। श्रीब्रह्मर्षि आश्रम के राष्ट्रीय मीडिया संयोजक कमल आत्रेय ने बताया कि संतों के आशीर्वाद से शुरू हुआ यह प्रोजेक्ट पूरी दुनिया को यह संदेश देगा कि प्राचीन सनातन पद्धतियां पूर्णतः वैज्ञानिक हैं और आज के दौर की जटिलतम बीमारियों का अचूक व सुरक्षित समाधान हैं। इस ऐतिहासिक अवसर पर महावीर खर्रा सहित विश्वविद्यालय के कई गणमान्य विद्वान, जिनमें प्रो. विनोद कुमार शर्मा, प्रो. राजधर मिश्र, डॉ. शम्भु कुमार झा, डॉ. दिवाकर मिश्र, डॉ. संदीप जोशी, डॉ. मधुबाला शर्मा, वीरेंद्र कुमार गुप्ता, सुरेन्द्र मोहन और राजेश कुमार शर्मा प्रमुख रूप से शामिल रहे। सभी ने इस सहयोगात्मक पहल को मानव कल्याण की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम बताया। कार्यक्रम का संचालन निदेशक डॉ. कुलदीप सिंह ने किया।

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