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हम भले ही 15 अगस्त को आजाद हुए लेकिन नशा को अपने जीवन से जोड़ लिया इसी से मुक्ति हमे असली आजादी देगा

लोकेशन=पन्ना।मध्य प्रदेश पन्ना
संवाददाता=सुधीर अग्रवाल के साथ कैमरा मेन मुकेश रजक
*हम भले ही 15 अगस्त को आजाद हुए लेकिन नशा को अपने जीवन से जोड़ लिया इसी से मुक्ति हमे असली आजादी देगा*
15 अगस्त केवल भारत की स्वतंत्रता का उत्सव नहीं बल्कि हमें यह याद दिलाने का दिन भी है की सच्ची स्वतंत्रता बाहर से पहले भीतर प्राप्त करने होती है हमने बरसों की संघर्ष के बाद देश को स्वतंत्र कराया लेकिन आज हर एक अपने से प्रश्न पूछे क्या हमारा मन भी स्वतंत्र है मुख्य अतिथि के रूप में ब्रह्माकुमारी बहन ने यह संबोधित किया, की हर कोई आज अपने आपसे एक सवाल पूछे कि क्या हम स्वयं से आजाद हुए यदि मन विकारों के वसीभूत है चिंता के बंधन में है लोभ,अहंकार, इर्षा और नकारात्मक विचारों के बंधन में है तो बाहर की स्वतंत्रता अधूरी है आध्यात्मिक स्वतंत्रता का अर्थ है अपने मन और बुद्धि पर स्वयं का शासन,
हमारे तिरंगे के तीन रंग भी हमें सुंदर अध्यात्मिक संदेश देते हैं केसरिया हमें त्याग,साहस और निस्वार्थ सेवा की प्रेरणा देता है
श्वेत हमें शांति, सत्य और पवित्रता का संदेश देता है
हरा,जीवन समृद्धि और प्रकृति के साथ संतुलन का प्रतीक बनाकर हमें आगे बढ़ाने की प्रेरणा देता है और बीच का अशोक चक्र हमें याद दिलाता है जीवन में रुकना नहीं निरंतर सही दिशा में आगे बढ़ते रहना है आज स्वतंत्रता दिवस पर केवल यह ना कहें भारत मेरा देश बल्कि संकल्प करें मैं अपने विचारों को श्रेष्ठ बनाऊंगा अपने कर्मों को पवित्र बनाऊंगा और अपने राष्ट्र को श्रेष्ठ बनने में अपना योगदान दूंगा नशा मुक्त जीवन बनायेगे।

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