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एनआरसीसी में ‘हिंदी: पारंपरिक ज्ञान से कृत्रिम बुद्धिमत्ता तक’ विषयक राजभाषा कार्यशाला आयोजित

राजस्थान हेड डॉ राम दयाल भाटी
बीकानेर 02 अप्रैल, 2026 । भाकृअनुप-राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र (एन.आर.सी.सी.), बीकानेर में आज ‘हिंदी: पारंपरिक ज्ञान से कृत्रिम बुद्धिमत्ता तक’ विषयक राजभाषा कार्यशाला का आयोजन किया गया जिसमें मुख्य वक्ता श्री इंद्र भूषण कुमार, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी, भाकृअनुप-केन्द्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान, अविकानगर ने कहा कि बदलते वैश्विक एवं डिजिटल परिवेश में हिंदी न केवल बाजार और तकनीक के साथ स्वयं को सशक्त रूप से स्थापित कर रही है, बल्कि प्रभावी शासन, पारदर्शिता एवं जनभागीदारी को भी सुदृढ़ बना रही है। आधुनिक तकनीक के समुचित उपयोग से हिंदी को और अधिक सरल, समावेशी एवं सुलभ बनाया जा सकता है। अतः आवश्यकता है कि हिंदी को नवाचार एवं तकनीकी उन्नयन के साथ जोड़कर उसके व्यापक उपयोग को बढ़ावा दिया जाए, जिससे यह डिजिटल युग में और अधिक प्रभावशाली माध्यम के रूप में उभर सके।
इस अवसर पर केंद्र निदेशक एवं कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार पूनिया ने प्रस्तुत व्याख्यान को नूतन दृष्टि प्रदान करने वाला बताते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन न केवल राजभाषा हिंदी के व्यावहारिक उपयोग को प्रोत्साहित करते हैं, बल्कि इसे डिजिटल युग की आवश्यकताओं के अनुरूप सशक्त बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने हिंदी की प्रभावशीलता बढ़ाने पर बल देते हुए सभी प्रतिभागियों से आह्वान किया कि वे अपने दैनिक कार्यों में हिंदी का अधिकाधिक प्रयोग करें तथा इसे नवाचार एवं आधुनिक तकनीक के साथ जोड़कर आगे बढ़ाएं।
केंद्र के डॉ. राकेश रंजन, नोडल अधिकारी (राजभाषा) ने कहा कि हिंदी में निहित पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक तकनीक, विशेषकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से संरक्षित एवं प्रसारित करने की अपार संभावनाएँ हैं। उन्होंने इस दिशा में समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया, जिससे हिंदी ज्ञान-विज्ञान की सशक्त भाषा के रूप में और विकसित हो सके। केंद्र के श्री अखिल ठुकराल, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ने कहा कि हिंदी केवल हमारी राजभाषा ही नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, परंपरा और ज्ञान की संवाहक है तथा आज के युग में यह कृत्रिम बुद्धिमत्ता के साथ नए आयाम भी प्राप्त कर रही है। अंत में, उन्होंने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। केन्द्र के श्री नेमीचंद बारासा, मुख्य तकनीकी अधिकारी (राजभाषा) ने कार्यक्रम का संचालन किया था तथा कार्यशाला का समापन ‘वंदे मातरम्’ गीत के साथ किया गया।

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