कविताएं
कैसे कह दूँ कि मैं भूल गई तुझे – दर्दभरी हिंदी कविता

कैसे कह दूँ
✍️ लेखिका – Anjali Pandey
मैं कैसे कह दूँ कि मैं भूल गई तुझे,
जबकि ये बात सच तो नहीं।
हाँ, ये सच है—मैं तुझे आज भी याद करती हूँ,
भले ही हमारे बीच अब कोई बात नहीं।
हाँ, ये दिल अब भी रोता है तेरे लिए,
भले ही इन आँखों से होती बरसात नहीं।
जब जाते देखा तो सोचा रोक लूँ तुम्हें,
पर दिल ने कहा—इश्क़-ए-इकराह सही तो नहीं।
मैं कैसे कह दूँ मैं भूल गई तुझे,
जबकि ये बात सच तो नहीं।
तेरी रुसवाइयों में वो ताकत है,
जो इन आँखों से बरसात कराती है,
वरना ये खास सिफ़त किसी और में नहीं।
किसी खुशनसीब की मांग में देखूँ
सिंदूर तेरे नाम का,
ज़िंदा रह पाना आम बात तो नहीं।
जब तुमने चुन ही लिया है
हमसफ़र अपने सफ़र का,
तो मैं तुम्हें रिश्ते-ए-रिहाई भी न दूँ—
ये सही तो नहीं।
सोच रही हूँ अब निकलूँ
इस दरिया-ए-याद से,
क्योंकि इस दरिया में तैरना भी तो आसान नहीं।
Subscribe to my channel

