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हेमंत कातेला ने बीकानेर की बदहाल सड़को की व्यवस्था को लेकर सांसद व विधायक को लिखा पत्र

राजस्थान हेड डॉ राम दयाल भाटी
हेमंत कातेला ने कहा मैं बीकानेर का एक आम नागरिक होने के नाते आपके संज्ञान में बीकानेर शहर की सड़कों की ख़राब स्थिति आपके समक्ष लाना चाहता हूँ। बीते कई महीनों से शहर के विभिन्न हिस्सों में सिवरेज से संबंधित कार्य कराए गए हैं, किंतु कार्य पूर्ण होने के बाद सड़कों को पूर्व स्थिति में बहाल नहीं किया गया है। इसके कारण अनेक सड़कें लंबे समय से टूटी हुई पड़ी हैं और आम नागरिकों का आवागमन अत्यंत कठिन रिस्की हो गया है।
सिवरेज लाइन डालने के लिए सड़कों को खोद दिया गया, परंतु उसके पश्चात मरम्मत का कार्य समय पर नहीं किया गया। कई स्थानों पर गहरे गड्ढे बने हुए हैं, सड़क की सतह धंस चुकी है और मलबा फैला हुआ है। इन हालातों के कारण दोपहिया वाहन चालक गिरकर घायल हो रहे हैं, इससे सांस की दिकत हो रही है लोगो में नशों में दर्द भी बढ़ रहा है वाहन क्षतिग्रस्त हो रहे हैं और यातायात व्यवस्था बाधित हो रही है। बरसात के समय यह स्थिति और भी भयावह हो जाती है।
सबसे दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह है कि जनप्रतिनिधियों का यह मूल दायित्व होता है कि वे अपने क्षेत्र की जनता को हो रही समस्याओं को समझें और उन्हें दूर कराने के लिए सक्रिय भूमिका निभाएँ, किंतु वर्तमान में ऐसा कोई भी ठोस प्रयास कहीं नजर नहीं आ रहा है। सड़कों की बदहाली महीनों से बनी हुई है, जनता लगातार परेशान है, फिर भी न तो प्रभावी हस्तक्षेप नजर आता है और न ही किसी स्तर पर जिम्मेदारी तय की जा रही है। इससे आम नागरिकों में यह भावना गहराती जा रही है कि मानो जनप्रतिनिधि विहीन हो चुकी है और उसकी समस्याओं को सुनने-समझने वाला कोई नहीं है।
यह स्थिति केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधित्व की निष्क्रियता को भी उजागर करती है। जब जनता रोज़मर्रा की मूल सुविधाओं के लिए संघर्ष करने को मजबूर हो जाए, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर संकेत है।
यहाँ तक की माननीय प्रधानमंत्री जी के बीकानेर दौरे के दौरान खोदे गए खड्डे भी आज तक नहीं भरे गए है.
पुरे बीकानेर का हाल ख़राब है जबकि वर्तमान मे विधायक, सांसद, सरकार सब एक ही दल के है.
अतः आपसे अपेक्षा है कि सिवरेज कार्य के कारण एवं बरसो से क्षतिग्रस्त हुई सड़कों की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए त्वरित और प्रभावी निर्देश जारी किए जाएँ, ताकि आमजन को राहत मिल सके और यह विश्वास पुनः स्थापित हो सके कि उनके चुने हुए प्रतिनिधि उनके साथ खड़े हैं।
यदि शीघ्र ठोस कार्यवाही नहीं की गई, तो जनता इसे जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा और असफलता के रूप में ही देखेगी।

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