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जैनाचार्य श्री हस्तीमल जी महाराज की 116वीं जन्मतिथि सामायिक स्वाध्याय दिवस के रूप में मनाई गई

ब्यूरो चीफ सन्तोष कुमार गर्ग

 

बालोतरा।

जैनाचार्य श्री हस्तीमल जी महाराज साहब की 116वीं जन्मतिथि को सामायिक स्वाध्याय दिवस के रूप में श्रद्धा, तप, त्याग और सत्य के भाव के साथ मनाया गया। इस अवसर पर श्री वर्धमान जैन स्थानकवासी संस्थान, बालोतरा के मंत्री ओमप्रकाश बांठिया ने आचार्य श्री के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आचार्य श्री का संपूर्ण जीवन संयम, साधना और आध्यात्मिक अनुशासन का अनुपम उदाहरण रहा है।

उन्होंने बताया कि आचार्य श्री के जीवन में गर्भकाल से ही माता रूपा देवी के वैराग्य भाव के संस्कार विकसित होते चले गए। मात्र 10 वर्ष की अल्प आयु में आपने आचार्य श्री शोभाचंद्र जी महाराज साहब से जैन दीक्षा अंगीकार की। 15 वर्ष की आयु में रत्न संघ के आचार्य घोषित किए गए तथा 20 वर्ष की आयु में आचार्य पद चादर महोत्सव के साथ आपने आध्यात्मिक नेतृत्व संभाला।

ओमप्रकाश बांठिया ने कहा कि आचार्य श्री ने अपने 71 वर्षों के संयम जीवन में ज्ञान, दर्शन, चारित्र एवं तप की कठोर और निर्मल साधना की। सामायिक एवं स्वाध्याय के माध्यम से उन्होंने ज्ञान और क्रिया को जन-जन तक पहुंचाया तथा पूरे देश में हजारों लोगों को धर्म से जोड़ने का प्रेरणादायी कार्य किया। सिवांची क्षेत्र में जैन समाज की एकता हेतु किए गए उनके प्रयास आज भी स्मरणीय हैं।

उन्होंने आगे बताया कि आचार्य श्री ने जैन धर्म के मौलिक इतिहास के लेखन के साथ-साथ आगमों एवं धार्मिक सिद्धांतों पर गहन चिंतन करते हुए महत्वपूर्ण ग्रंथों की रचना की और जिन शासन की सेवा में अमूल्य योगदान दिया।

आचार्य श्री की जन्मतिथि के अवसर पर श्री जैन रत्न श्राविका मंडल द्वारा धार्मिक पाठशाला में सामूहिक सामायिक साधना का आयोजन किया गया। इस दौरान जैन रत्न प्रोफेशनल फोरम के संयोजक सीए बांठिया ने आचार्य श्री के जीवन से जुड़े सारगर्भित विचार व्यक्त किए।

इस अवसर पर सुरेश गोलेछा, धर्मेश चोपड़ा, पवन जागीरदार, गणपत मेहता, श्री जैन रत्न श्राविका मंडल की अध्यक्षा मनीषा देवी भंसाली, मंत्री कल्पना देवी चोपड़ा, पूर्व अध्यक्षा अनीता देवी चोपड़ा, उपाध्यक्ष रेशमी देवी लूंकड, कोषाध्यक्ष अनीता देवी सालेचा, क्षमा देवी चोपड़ा, सीमा देवी जैन, सोनी देवी सहित बड़ी संख्या में श्राविकाओं ने आचार्य श्री के जीवन पर गीतिका एवं गुणानुवाद प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम के अंत में तप, त्याग और साधना के साथ आचार्य श्री की 116वीं जन्मतिथि को सामायिक स्वाध्याय दिवस के रूप में श्रद्धापूर्वक मनाया गया।

 

Santosh Kumar Garg

Beauro Chief Balotra Rajasthan

Santosh Kumar Garg

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