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गुरु तेग बहादुर साहिब महाराज की 350वीं शहादत वर्षगांठ पुंछ में श्रद्धा व सद्भाव के साथ मनाई गई — कीर्तन दरबार और लंगर का आयोजन

ब्यूरो चीफ राजेश कुमार, पुंछ

 

पुंछ, 25 नवंबर।

सिख धर्म के नौवें गुरु धन-धन श्री गुरु तेग बहादुर साहिब महाराज की 350वीं शहादत वर्षगांठ पुंछ में श्रद्धा, भक्ति और भाईचारे के साथ मनाई गई। इस अवसर पर विभिन्न गुरुद्वारों में विशेष अरदास, कीर्तन दरबार और लंगर का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।

गुरु तेग बहादुर महाराज ने 1675 में सत्य, न्याय और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया था। अल्पसंख्यकों और सभी धर्मों के लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए उन्होंने अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। उनकी शहादत मानवता और निडरता की अमर मिसाल है, यह बात डीजीपीसी पुंछ के अध्यक्ष नरेंद्र सिंह ने कही।

शहर के गुरुद्वारों को आकर्षक रूप से सजाया गया था। सुबह से ही गुरुद्वारों में गुरु ग्रंथ साहिब के पवित्र कीर्तन की मधुर धुनों से वातावरण भक्तिमय बना रहा। श्रद्धालुओं ने माथा टेककर गुरु साहिब से शांति, समृद्धि और सद्भाव की प्रार्थना की।

सिख परंपरा के अनुरूप लंगर का भी बड़े स्तर पर आयोजन किया गया, जिसमें धर्म–जाति से ऊपर उठकर सभी लोगों को निशुल्क भोजन प्रसाद स्वरूप प्रदान किया गया। हज़ारों लोगों ने लंगर ग्रहण किया और सेवा तथा समानता के गुरु साहिब के संदेश को आत्मसात किया।

इस अवसर पर धार्मिक नेताओं और सामाजिक प्रतिनिधियों ने गुरु महाराज की शिक्षाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज समाज में शांति, आपसी सम्मान, धार्मिक सद्भाव और मानवता के सिद्धांतों को अपनाने की आवश्यकता है। गुरु तेग बहादुर साहिब जी का जीवन धर्म पालन, साहस और मानव सेवा का अद्वितीय उदाहरण है, जो सदियों से विश्वभर के लोगों को प्रेरित करता आ रहा है।

कार्यक्रम के समापन पर गुरु के नाम की अरदास की गई और विश्व में अमन–चैन, भाईचारे और खुशहाली की कामना की गई।

Viyasmani Tripaathi

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