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मुँह के छोटे संकेत भी हो सकते हैं बड़ी परेशानी की शुरुआत: डॉ. प्रांजल सिंह मदेरणा ने बताई ओरल हेल्थ से जुड़ी जरूरी बातें

राजस्थान हेड डॉ राम दयाल भाटी
मुँह के छोटे संकेत भी हो सकते हैं बड़ी परेशानी की शुरुआत: डॉ. प्रांजल सिंह मदेरणा ने बताई ओरल हेल्थ से जुड़ी जरूरी बातें
घरेलू नुस्खों से दाँत साफ करना, जबड़े से आवाज आना और मुँह में सफेद या लाल निशान दिखना, मसूड़ों से खून आना या मुँह में बार-बार छाले होना सामान्य समझकर टालना पड़ सकता है भारी; समय पर जाँच और सही देखभाल जरूरी।
रोजमर्रा की जिंदगी में लोग अक्सर दाँतों और मसूड़ों से जुड़ी छोटी-छोटी परेशानियों को नजरअंदाज कर देते हैं। किसी को ठंडा पानी पीते ही झनझनाहट होती है, तो किसी के मसूड़ों से ब्रश करते समय खून आता है। कई लोग मुँह में बार-बार होने वाले छालों या दाँतों के असामान्य बदलाव को भी गंभीरता से नहीं लेते। दंत चिकित्सक डॉ. प्रांजल सिंह मदेरणा के अनुसार, ओरल हेल्थ से जुड़े ऐसे लक्षण शरीर की सेहत के महत्वपूर्ण संकेत हो सकते हैं। सही समय पर इनकी पहचान और जाँच कराने से कई परेशानियों को बढ़ने से रोका जा सकता है।
* मुँह में बार-बार छाले होना सामान्य है या किसी बीमारी का संकेत?
मुँह में छाले होना आम समस्या है। कई बार ये कुछ दिनों में अपने आप ठीक भी हो जाते हैं लेकिन यदि छाले बार-बार हो रहे हैं, लंबे समय तक बने रहते हैं या खाने-पीने और बोलने में परेशानी पैदा करते हैं तो इन्हें सामान्य मानकर छोड़ना ठीक नहीं है। छालों के पीछे तनाव, मुँह में चोट, कुछ खाद्य पदार्थों से संवेदनशीलता, पोषण की कमी या अन्य स्वास्थ्य संबंधी कारण हो सकते हैं। हर छाले का कारण एक जैसा नहीं होता, इसलिए बार-बार होने वाले छालों की सही वजह जानना जरूरी है। डॉ. प्रांजल सिंह मदेरणा के अनुसार, बार-बार छाले होने पर केवल दर्द कम करने वाली दवा या घरेलू उपाय अपनाने के बजाय उनकी वजह की जाँच करानी चाहिए। विशेष रूप से यदि कोई घाव दो सप्ताह में ठीक ना हो, तो दंत चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।
* सोशल मीडिया के घरेलू नुस्खे कहीं आपके दाँत खराब तो नहीं कर रहे?
आजकल सोशल मीडिया पर दाँत सफेद करने के कई तरीके बताए जाते हैं। कोई नींबू और बेकिंग सोडा लगाने की सलाह देता है तो कोई चारकोल या अन्य चीजों से दाँत चमकाने का दावा करता है। शुरुआत में ये उपाय आसान और सस्ते लग सकते हैं लेकिन बिना जानकारी के इनका इस्तेमाल नुकसान पहुँचा सकता है। नींबू जैसे अम्लीय पदार्थ दाँतों की ऊपरी सुरक्षात्मक परत यानी इनेमल को नुकसान पहुँचा सकते हैं। वहीं बेकिंग सोडा या अन्य खुरदरे पदार्थों का गलत तरीके से इस्तेमाल दाँतों की सतह और मसूड़ों को प्रभावित कर सकता है। इनेमल एक बार काफी घिस जाए तो वह प्राकृतिक रूप से दोबारा नहीं बनता। डॉ. प्रांजल सिंह मदेरणा की सलाह है कि इंटरनेट पर दिखने वाले हर नुस्खे को सही ना मानें। दाँतों का रंग बदलने या पीलापन दूर करने के लिए पहले उसका कारण समझना चाहिए और सुरक्षित उपचार के लिए दंत चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए।
* मुँह खोलते समय जबड़े से कट-कट की आवाज क्यों आती है?
कई लोगों को खाना चबाते समय, जम्हाई लेते समय या मुँह खोलने-बंद करने पर जबड़े के पास कट-कट या क्लिक जैसी आवाज सुनाई देती है। कुछ लोग इसे सामान्य मानकर अनदेखा कर देते हैं। यह आवाज जबड़े के जोड़, जिसे टेम्पोरोमैंडिबुलर जॉइंट (TMJ) कहा जाता है, से जुड़ी हो सकती है। कभी-कभी केवल आवाज आती है और दर्द नहीं होता लेकिन यदि इसके साथ जबड़े में दर्द, मुँह खोलने में कठिनाई, जबड़ा अटकना या सिर के आसपास दर्द भी हो, तो जाँच जरूरी है। दाँत पीसने की आदत, जबड़े पर अधिक दबाव, चोट और जोड़ से जुड़ी समस्याएँ इसके संभावित कारण हो सकते हैं। डॉ. प्रांजल सिंह मदेरणा के अनुसार, लगातार परेशानी होने पर इसे केवल आदत समझकर ना छोड़ें। बिना जाँच के जबड़े पर दबाव डालने वाले व्यायाम या उपचार करना भी उचित नहीं है।
* मुँह में सफेद या लाल दाग को नजरअंदाज करना कितना खतरनाक हो सकता है?
मुँह के अंदर गाल, जीभ, मसूड़ों या होंठों पर सफेद अथवा लाल रंग के निशान दिखाई दें तो बहुत से लोग उन्हें मामूली छाला या जलन समझ लेते हैं। कई बार ये सामान्य कारणों से भी हो सकते हैं लेकिन कुछ निशान गंभीर बीमारी के शुरुआती संकेत भी हो सकते हैं। विशेष रूप से ऐसा सफेद या लाल निशान जो ठीक ना हो, बार-बार उसी जगह दिखाई दे, बढ़ता जाए या उसके साथ दर्द, खून आना अथवा निगलने में परेशानी हो, उसकी जाँच कराना जरूरी है। हर सफेद या लाल दाग कैंसर नहीं होता, लेकिन लगातार बने रहने वाले ऐसे बदलावों को नजरअंदाज करना जोखिम भरा हो सकता है। यदि कोई घाव या निशान दो सप्ताह या उससे अधिक समय तक बना रहे तो दंत चिकित्सक या संबंधित विशेषज्ञ से जाँच करानी चाहिए। तंबाकू और गुटखा जैसे उत्पादों का सेवन करने वालों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए।
ओरल हेल्थ का मतलब केवल दाँतों को साफ और चमकदार रखना नहीं है। मुँह में होने वाले बदलाव, जबड़े की परेशानी, बार-बार छाले और लगातार सूखापन भी हमारे स्वास्थ्य के बारे में महत्वपूर्ण संकेत दे सकते हैं। नियमित ब्रश करना, तंबाकू गुटके से दूर रहना, संतुलित खानपान, मीठे खाद्य पदार्थों का सीमित सेवन, रोजाना दांतों के बीच की सफाई और समय-समय पर दंत जाँच कराना अच्छी आदतें हैं।

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