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अटलजी हिमालय जैसी मजबूत सोच और समुद्र जैसे व्यापक मन के धनी थे: गणपत बांठिया
पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी की पुण्यतिथि पर अर्पित किए श्रद्धा सुमन

ब्यूरो चीफ सन्तोष कुमार गर्ग
बालोतरा।
सता का खेल तो चलेगा, सरकारे आएगी व जाएगी पार्टियां बनेगी बिगड़ेगी मगर यह देश रहना चाहिए देश का लोकतंत्र अमर रहना चाहिए ये पक्तियां अमर रहेगी।यह बात पूर्व प्रधान
मंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयीकी पुण्य तिथि पर भारतीय जनता पार्टी प्रदेश कार्य समिति सदस्य व जनसेवक पूर्व विधायक चम्पालाल बांठिया चेरिटेबल ट्रस्ट अध्यक्ष गणपत बाठिया ने ट्रस्ट द्वारा आयोजित सभा मे सादर श्रद्धा सुमन अर्पित
करते हुए कही।
भाजपा प्रदेश कार्य समिति सदस्य व ट्रस्ट अध्यक्ष गणपत बाठिया ने कहा कि हिमालय की तरह मजबूत उच्च सोच, समुद्र की तरह व्यापक मन वालेअटल बिहारी वाजपेयीअमूल्य कार्यों के माध्यम से जो देश की सेवा कर गए उनके योगदान को प्रत्येक भारतीय सदैव याद रखेगा। अटलजी राजनीति के क्षेत्र में चार दशकों तक सक्रिय रहे। वह लोकसभा में नौ बार और राज्यसभा में दो बार चुने गए।वाजपेयी 1980 में गठित भाजपा के संस्थापक अध्यक्ष भी रहे।वे एक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय नेता, प्रखर राजनीतिज्ञ, नि:स्वार्थ सामाजिक कार्यकर्ता, सशक्त वक्ता, कवि, साहित्यकार, पत्रकार और बहुआयामी व्यक्तित्व वाले व्यक्ति के धनी थे।अटलजी जब प्रदेश के मारवाड़ दौरें पर आते थे तो पूर्व मुख्यमंत्री भैरोसिंह शेखावत व राजमाता विजय राजे सिंधियाजी के साथ जनसंघ के नेता पूर्व विधायक चंपालाल बांठिया के भाषणों को सुनने के जनसैलाब उमड़ता था।अटलजी अकाल के उस भयानक दौर में पूर्व विधायक चंपालाल बांठिया के साथ पश्चिमी राजस्थान के गांव-गांव ढ़ाणी-ढ़ाणी जाकर ग्रामीणों से रूबरू हुए थे और आम जनमानस के दुखों को अपना दुख मानकर उनकी सेवा की थी।इस दौरान महिपाल करणोत, महिपाल चारण, ललित, ऋषभ चोपड़ा, ऋषभ तातेड़, अनिल, अनुज मदानी, राजेश चंडक, दीपेश गर्ग, रोहित सेन, नेमीचंद बारूपाल, करण कोशल, तनवीर चारण, महावीर माहेश्वरी, महेश घांची, अशोक चोपड़ा, संजय टेंट, शांतिलाल राजा, अशोक हुंडिया, दिनेश गुलेच्छा सहित अन्य सदस्य मौजूद थे।

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