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फोर्टिस गुरुग्राम में पहली पिवट-टीआर डिवाइस इंप्लांटेशन प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा किया गया

राहुल कुमार की रिपोर्ट
*फोर्टिस गुरुग्राम में पहली पिवट-टीआर डिवाइस इंप्लांटेशन प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा किया गया*
एडवांस राइट हार्ट फेलियर से ग्रस्त मरीजों के लिए उम्मीद की नई किरण
इस नवाचारी प्रक्रिया को त्रिनिदाद एवं टोबेगो से इलाज के लिए आयी एक विदेशी मरीज पर सफलतापूर्वक किया गया, मरीज एंड-स्टेज वाल्व्युलर हार्ट डिज़ीज़ (हृदय वाल्व रोग) से पीड़ित थीं और इलाज के पारंपरिक विकल्प उनके मामले में उपयुक्त नहीं थे !
गुरुग्राम: फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट (एफएमआरआई), गुरुग्राम ने त्रिनिदाद एवं टोबेगो की 35-वर्षीय महिला मरीज, जो गंभीर ट्राइकस्पिड रीगर्जिटेशन (टीआर) से पीड़ित थीं, के उपचार के लिए एक स्थायी ट्रांसकैथेटर इंप्लांट – पिवट एक्सटेंड सिस्टम प्रत्यारोपित किया है। ट्राइकस्पिड रीगर्जिटेशन (टीआर) एक प्रकार का हृदय वाल्व रोग है जिसमें हृदय के वाल्व से काफी गंभीर रूप से रिसाव होता है, जिसके चलते रक्त पीछे की ओर बहने लगता है और हृदय ठीक ढंग से पंप नहीं कर पाता। एफएमआरआई गुड़गांव में भारत में पहली बार किसी विदेशी मरीज में पिवट एक्सटेंड सिस्टम इंप्लांटेशन किया गया है, और यह दिल्ली/एनसीआर में भी पहला, तथा देश में इस प्रकार की डिवाइस को इंप्लांट करने का तीसरा मामला है।
उक्त मरीज कारवेन कार्लीश डेविड को सांस लेने में गंभीर रूप से परेशानी की वजह से अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनकी जांच के दौरान, ट्राइकस्पिड वाल्व लीकेज का पता चला, साथ ही, मरीज का हृदय भी काफी कमजोर हो गया था और करीब आठ-दस साल पहले उनके शरीर में स्पेश्यलाइज़्ड पेसमेकर इंप्लांटेशन भी किया गया था। इस साल के शुरू में, उनके हृदय के आसपास जमा तरल पदार्थ को निकालने के लिए भी एक प्रक्रिया की गई थी।
इसके बाद, अगली लगभग तीन साल उनके लिए काफी मुश्कलों से भरे रहे क्योंकि वह लगातार सांस लेने में तकलीफ से जूझ रही थी और यह परेशानी धीरे-धीरे बढ़ती जा रही थी, उनके पैरों और पेट में सूजन बढ़ने लगी थी क्योंकि वहां तरल पदार्थों का जमाव बढ़ गया था। साथ ही, एडवांस हार्ट फेलियर के लक्षण भी दिन-प्रतिदिन गंभीर होते जा रहे थे। इस बीच, हृदय के वाल्व से लगातार रिसाव की समस्या के कारण कन्जेशन बढ़ने लगा था जिससे उनका लिवर, पेट और पैरों के निचले हिस्से प्रभावित हो रहे थे। कुल-मिलाकर, मरीज की हालत काफी गंभीर थी और इलाज के पारंपरिक तौर-तरीके उनके मामले में उपयुक्त नहीं थे।
हृदय प्रत्यारोपण ही स्थायी इलाज का एकमात्र विकल्प माना जा रहा था, लेकिन उक्त मरीज की क्लीनिकल कंडीशन और उनके हृदय की अनोखी प्रकार की बनावट (कार्डियाक एनटॅमी) के चलते वास्क्युलर हार्ट रोग के उपचार के लिए उपलब्ध पारंपरिक मिनीमॅली इन्वेसिव प्रक्रियाएं उपयुक्त नहीं थीं। एफएमआरआई गुड़गांव की मल्टीडिसीप्लीनरी कार्डियाक टीम द्वारा विस्तृत जांच और मरीज तथा उनके परिजनों के साथ बातचीत के बाद, पिवट एक्सटेंड सिस्टम का विकल्प उन्हें बताया गया। मरीज की मेडिकल कंडीशन की विस्तार से समीक्षा के बाद, इस खास डिवाइस को आयात करने के लिए भारत सरकार से विशेष अनुमति भी ली गई।
वाल्व प्रक्रिया करवाने से पहले, 22 जुलाई, 2026 को मरीज के पेसमेकर पल्स जेनरेटर को भी सफलतापूर्वक बदला गया। इसके बाद, 24 जुलाई, 2026 को उन्हें पिवट एक्सटेंड सिस्टम सफलतापूर्वक लगाया गया। इस डिवाइस को वाल्व के रिसाव वाले हिस्सों के बीच बैलून स्पेसर रखकर लगाया जाता है, जिससे खून को पीछे की तरफ बहने से कारगर तरीके से कम करना संभव होता है। हालांकि यह उपयुक्त उपचार नहीं होता, लेकिन मरीज को होने वाली परेशानियों से काफी हद तक बचाने का यही तरीका है जो उन मरीजों की लाइफ क्वालिटी में काफी सुधार लाता है जिनके पास उपचार के विकल्प काफी सीमित होते हैं।
इस प्रक्रिया के अगले दिन 25 जुलाई, 2026 को फौलो-अप इकोकार्डियोग्राम से इस बात की भी पुष्टि हो गई कि इस डिवाइस को लगाने के बाद रिसाव पहले की तुलना में काफी कम हो गया है। इस बीच, मरीज को अस्पताल में लगातार मेडिकल थेरेपी दी जाती रही और उनकी हालत स्थिर होने के बाद, फौलो-अप करवाते रहने की सलाह के साथ, अब अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।
डॉ (कर्नल) मंजिन्दर सिंह संधू, प्रिंसीपल डायरेक्टर, कार्डियोलॉजी, फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट, गुरुग्राम ने कहा, “मरीज के हृदय के वाल्व से काफी गंभीर तरीके से रिसाव और बेहद कमजोर हृदय के चलते उनके हृदय के दाहिने भाग में एंड स्टेज हार्ट फेलियर की आशंका बढ़ चुकी थी। हालांकि ऐसे में हार्ट ट्रांसप्लांट करना ही उपयुक्त उपचार होता है, लेकिन मरीज के हृदय की अनोखी बनावट के चलते स्टैंडर्ड मिनीमॅली इन्वेसिव प्रक्रिया का विकल्प नहीं बचा था। किसी भी प्रकार के पारंपरिक उपचार का विकल्प नहीं बचने पर, डॉक्टरों ने प्रायोगिक डिवाइस – पिवट एक्सटेंड सिस्टम को प्रत्यारोपित करने की विशेष अनुमति ली। यह प्रक्रिया बिना किसी जटिलता के पूरी कर ली गई और परिणामस्वरूप वाल्व से रिसाव पहले की तरह भारी नहीं रहा है और इसमें काफी कमी हुई है। हालांकि यह स्थायी उपचार नहीं है, लेकिन बेहद नाजुक स्थिति से गुजर रहे उन मरीजों के लिए महत्वपूर्ण लाइफलाइन की तरह है जिनके पास अन्य कोर्इ विकल्प नहीं होता।”
श्री यश रावत, सीनियर वाइस प्रेसीडेंट एंड फैसिलिटी डायरेक्टर, फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट, गुरुग्राम ने कहा, “फोर्टिस में, हम जटिल मेडिकल कंडीशंस से जूझ रहे मरीजों के स्वास्थ्यलाभ के लिए एडवांस और साक्ष्य-आधारित थेरेपी को सुलभ कराने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

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