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क्या हमारी रोजमर्रा की आदतें ही बढ़ा रही हैं पर्यावरण का बोझ? राष्ट्रीय विमर्श में बागपत के अमन ने रखी युवा सोच

क्या हमारी रोजमर्रा की आदतें ही बढ़ा रही हैं पर्यावरण का बोझ? राष्ट्रीय विमर्श में बागपत के अमन ने रखी युवा सोच
20 जून 2026। एक क्लिक में खरीदारी, हर सीजन में नए कपड़े, बढ़ता प्लास्टिक उपयोग और तेजी से बढ़ता इलेक्ट्रॉनिक कचरा। जिन आदतों को हम सामान्य जीवनशैली का हिस्सा मानते हैं, वे अब पर्यावरण और सतत विकास की वैश्विक बहस के केंद्र में हैं। इन्हीं बदलती उपभोग आदतों और उनके प्रभावों पर नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय विमर्श में बागपत के युवा स्वयंसेवक अमन कुमार ने अपने विचार साझा किए।
माय भारत से जुड़े अमन कुमार को पर्यावरण संरक्षण और युवा सशक्तिकरण के क्षेत्र में किए गए कार्यों के आधार पर ‘यूथ फॉर रिस्पॉन्सिबल कंजम्प्शन’ कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया था। इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित इस कार्यक्रम में देशभर से 100 से अधिक युवा, नीति निर्माता, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और विशेषज्ञ शामिल हुए।
संवाद का केंद्र यह प्रश्न रहा कि क्या विकास और उपभोग की वर्तमान संस्कृति को अधिक जिम्मेदार बनाया जा सकता है। चर्चा में खाद्य पदार्थों की बर्बादी, फास्ट फैशन, इलेक्ट्रॉनिक कचरे और संसाधनों के बढ़ते दोहन जैसे मुद्दों पर विचार हुआ। अमन ने ग्रामीण युवाओं के अनुभव साझा करते हुए कहा कि पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान केवल नीतियों से नहीं, बल्कि लोगों की दैनिक आदतों में बदलाव से भी जुड़ा है। उन्होंने युवाओं को व्यवहार आधारित परिवर्तन का वाहक बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के अपर सचिव नीतीश कुमार मिश्रा ने संवाद के दौरान अमन के सुझावों की सराहना की। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी), यूथ की आवाज़ और युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के सहयोग से आयोजित इस पहल में यूएनडीपी की भारत प्रतिनिधि डॉ. एंजेला लुसिगी, फ्लिपकार्ट के सस्टेनेबिलिटी हेड निशांत गुप्ता, यूथ की आवाज़ के संस्थापक अंशुल तिवारी तथा विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों में ऋषभ पटेल, तनिष्का मिश्रा, निपुणिका सचदेवा, मालविका, साक्षी आदि ने भी अपने विचार रखे।

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