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जैनाचार्य श्री हस्तीमल जी महाराज साहब की 35वीं पुण्यतिथि पर सामायिक-स्वाध्याय दिवस मनाया गया

स्थानक रिसाइड में आयोजित हुआ सामूहिक कार्यक्रम, श्रद्धालुओं ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

ब्यूरो चीफ सन्तोष कुमार गर्ग

 

जैनाचार्य श्री हस्तीमल जी महाराज साहब की 35वीं पुण्यतिथि के अवसर पर सामायिक स्वाध्याय दिवस के रूप में श्रद्धा और तप-त्याग के साथ मनाई गई। इस अवसर पर स्थानक रिसाइड में सामूहिक सामायिक का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने भाग लेकर आचार्य श्री के जीवन और उपदेशों का स्मरण किया।

कार्यक्रम के दौरान श्री जैन रत्न प्रोफेशनल फॉर्म के संयोजक ओम बांठिया ने संबोधित करते हुए कहा कि जैनाचार्य श्री हस्तीमल जी महाराज साहब का जीवन संयम और साधना का प्रतीक रहा। उन्होंने सामायिक और स्वाध्याय के माध्यम से समाज में ज्ञान और आचरण को बढ़ावा दिया। उनके व्यक्तित्व में कठोर संयम साधना, विभिन्न जैन संप्रदायों के बीच मधुर समन्वय, जैन धर्म के मौलिक इतिहास और आगमों पर महत्वपूर्ण लेखन, तथा प्रभावशाली प्रवचन शैली जैसी अनेक विशेषताएं समाहित थीं।

उन्होंने आगे कहा कि आचार्य श्री का संपूर्ण जीवन प्रेरणा का स्रोत है। उनकी दीर्घ संलेखना संथारा और मरणोत्सव का प्रसंग भी अत्यंत अद्वितीय रहा, जिसने समाज को त्याग और आत्मसंयम का अनुपम संदेश दिया। आचार्य पद पर रहते हुए उन्होंने आचार्य श्री हीराचंद्र जी महाराज साहब एवं उपाध्याय श्री मानचंद्र जी महाराज साहब का मनोनयन कर रत्न संघ के भविष्य को सुदृढ़ दिशा प्रदान की।

श्रद्धांजलि सभा में वक्ताओं ने कहा कि जैनाचार्य श्री का सभी संघों, क्षेत्रों और श्रावक-श्राविकाओं पर विशेष उपकार रहा है, जिसके लिए समाज सदैव कृतज्ञ रहेगा।

अंत में सभी श्रद्धालुओं ने आचार्य श्री के जीवन से प्रेरणा लेते हुए सामायिक एवं स्वाध्याय को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने कहा कि यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

Santosh Kumar Garg

Beauro Chief Balotra Rajasthan

Santosh Kumar Garg

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