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भाजपा सत्ता की हनक में धारा 163 का सरेआम उल्लंघन, बिना अनुमति आयोजित हुआ एबीवीपी का नवाचार महोत्सव

बस्ती से वेदान्त सिंह
बस्ती। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के तत्वावधान में पंडित अटल बिहारी बाजपेयी प्रेक्षागृह में आयोजित युवा सृजन नवाचार महोत्सव के दौरान धारा 163 का सरेआम उल्लंघन होने का मामला सामने आया है। कार्यक्रम के संयोजक मारुति पाण्डेय रहे। प्रशासनिक अनुमति के बिना इतने बड़े स्तर पर आयोजन किए जाने को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
महोत्सव में करीब एक हजार की संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाएं, छात्र-छात्राएं और विभिन्न विद्यालयों के प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। विज्ञान प्रदर्शनी के माध्यम से छात्रों ने अपने नवाचार और प्रोजेक्ट प्रस्तुत किए। आयोजन की भव्यता और प्रतिभागियों की सक्रिय भागीदारी के चलते कार्यक्रम को शैक्षणिक दृष्टि से काफी प्रभावशाली बताया जा रहा है। हालांकि, कानून-व्यवस्था के दृष्टिकोण से यह आयोजन प्रशासन के लिए चिंता का विषय बन गया।
जब इस संबंध में क्षेत्राधिकारी सदर और कोतवाली प्रभारी से सवाल किया गया तो दोनों अधिकारियों ने अनभिज्ञता जताते हुए कहा कि उन्हें इस कार्यक्रम की कोई जानकारी नहीं है। जबकि आयोजन स्थल पर भारी भीड़ और व्यापक स्तर पर कार्यक्रम संचालित होने से यह स्पष्ट था कि यह सामान्य कार्यक्रम नहीं बल्कि बड़े स्तर का आयोजन था, जिसके लिए पूर्व अनुमति अनिवार्य थी।
जानकारों का कहना है कि वर्तमान में लागू धारा 163 के तहत बिना अनुमति किसी भी प्रकार के बड़े सार्वजनिक आयोजन पर रोक है। इसके बावजूद भाजपा से जुड़े संगठन के बैनर तले यह कार्यक्रम आयोजित किया गया। आरोप है कि सत्ता की हनक के चलते नियम-कानूनों को दरकिनार कर दिया गया और प्रशासनिक अनुमति लेने की जरूरत ही नहीं समझी गई।
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों में इस बात को लेकर नाराजगी देखी जा रही है कि जब आम जनता और अन्य संगठनों पर नियम-कानून सख्ती से लागू होते हैं, तो सत्तारूढ़ दल से जुड़े संगठनों को छूट क्यों दी जाती है। लोगों का कहना है कि कानून सबके लिए समान होना चाहिए, न कि किसी एक राजनीतिक दल के लिए अलग।
हालांकि यह भी सच है कि कार्यक्रम की विषयवस्तु, छात्रों की प्रतिभा और नवाचार को मंच देने का उद्देश्य सराहनीय रहा। लेकिन उद्देश्य चाहे कितना भी अच्छा क्यों न हो, कानून का पालन करना सभी के लिए जरूरी है। यदि नियमों का इस तरह उल्लंघन होता रहा तो प्रशासन की निष्पक्षता और कानून व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
अब देखना यह है कि प्रशासन इस पूरे मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या नियम-कानूनों के उल्लंघन पर कोई कार्रवाई की जाती है या मामला यूं ही दबा दिया जाएगा।

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