खैरथल- तिजाराब्रेकिंग न्यूज़राजस्थान
शादी की रात चीखों में बदली हर्ष फायरिंग ने 6 साल की वीरा की जिंदगी छीन ली

ब्यूरो चीफ मुकेश कुमार शर्मा
खैरथल तिजारा 18 नवंबर।
खैरथल तिजारा जिले के मुंडावर थाना क्षेत्र के जसाई गांव में सोमवार रात एक ऐसा हादसा हुआ जिसने पूरे इलाके को झकझोरकर रख दिया। शादी-ब्याह में दिखावे और शोर-शराबे के नाम पर होने वाली हर्ष फायरिंग ने एक परिवार की खुशियाँ छीन लीं और पूरे समाज के सामने एक कड़वा सवाल खड़ा कर दिया—क्या हमारी बेपरवाह खुशियाँ किसी मासूम की जान से ज्यादा कीमती हैं?
22 नवंबर को होने वाली शादी से पहले ‘बान’ की रस्म चल रही थी। डीजे पर 5-7 युवक पिस्तौल लहराते हुए नाच रहे थे, मानो हथियार कोई खिलौना हों और जान की कीमत उनके लिए कोई मायने न रखती हो। इसी दौरान दूल्हे के दोस्त सतपाल मीणा की 6 वर्षीय बेटी वीरा को गोली जा लगी। बच्ची घर के अंदर चौक में खड़ी थी—सुरक्षित जगह पर, अपने ही घर में। लेकिन एक नशे में चूर और आवेश में भरे युवक की गलती ने उसके नन्हे जीवन पर विराम लगा दिया।
गोली लगते ही समारोह चीख-पुकार में बदल गया। परिवार उसे लेकर इलाके के निजी अस्पताल लेकर भागे ओर प्राथमिक उपचार के बाद फिर जयपुर रेफर किया गया, लेकिन मासूम वीरा रास्ते में ही जिंदगी की जंग हार गई। एक मासूम जिसने अभी स्कूल की कॉपी ठीक से भरना भी नहीं सीखा था, वह बड़ों की मूर्खता का शिकार हो गई।
फोरेंसिक टीम ने मौके से साक्ष्य जुटाए हैं और पुलिस हथियार चलाने वालों की तलाश में लगी है। थाना प्रभारी ने सख्त कार्रवाई की बात कही है, पर सवाल ये है—क्या हर मौत के बाद हम सिर्फ कार्रवाई और आश्वासन से ही सीखेंगे?
वीरा के पिता सतपाल मीणा भिवाड़ी में परिवहन विभाग में अधिकारी हैं। उनके घर की खुशियों पर इस एक लापरवाही ने ऐसा घाव दिया है जो जिंदगी भर नहीं भरेगा।
यह घटना सिर्फ एक हादसा नहीं, एक चेतावनी है—शादी में फायरिंग बहादुरी नहीं, हत्या का खेल है।
एक गोली किसी की जान ले लेती है और गोली चलाने वाला अगली सुबह खुद को ‘हीरो’ समझकर उठता है। समाज को अब तय करना होगा कि ऐसे ‘हीरो’ चाहिए या सुरक्षित समारोह?
हर परिवार, हर गांव, हर समाज को यह समझना होगा—हर्ष फायरिंग पर रोक सिर्फ कानून की नहीं, हमारी सोच की जिम्मेदारी है।
क्योंकि अगली गोली किसके घर का दीपक बुझा दे—कोई नहीं जानता।

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