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राष्ट्रीय मानव सेवा संस्थान ने संत शिरोमणि कवि रविदास जी प्रतिमा पर मालार्पण कर भंडारा कर बड़े हर्षोल्लाह से मनाई जयंती

Rashtriya Manav Seva Sansthan celebrated the birth anniversary of Sant Shiromani poet Ravidas ji with great enthusiasm by offering garlands to his statue and organizing a feast

ब्यूरो रिपोर्ट… अनीता पाल

बरेली…राष्ट्रीय मानव सेवा संस्थान नें बरेली स्थित श्यामगंज पुल के नीचे संत रविदास मंदिर में शिरोमणी कवि रविदास जी पुष्प माला पहना कर उनके चरणों में पुष्पांजलि देते हुए नमन किया और भंडारा करके उनकी जयंती मनाई इस अवसर पर राष्ट्रीय मानव सेवा संस्थान की राष्ट्रीय अध्यक्ष बिंदु सक्सेना संत रविदास जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया शिरोमणि कवि रविदास जी का जन्म 1376 ई को उत्तर प्रदेश

के वाराणसी शहर के गोवर्धनपुर गांव में हुआ था उनकी माता का नाम कर्मा देवी जिन्हें कलसा भी कहते थे और पिता संतोख दास रग्घु के नाम से जाने जाते थे उनके दादा का नाम कालूराम और दादी लखपति जी थी उनकी पत्नी लोना जी और पुत्र श्री विजय दास थे उनका जन्म ऐसे समय में हुआ था जब उत्तर भारत में कुछ क्षेत्रों में मुगलों का शासन था चारों ओर अत्याचार गरीबी भ्रष्टाचार और अशिक्षा और छुआछूत का बोलबाला था उसी समय मुसलमान शासको द्वारा प्रयास किया जाता था कि अधिकांश हिंदुओं को मुस्लिम बनाया जाए संत रविदास की ख्याति लगातार बढ़ रही थी जिसके चलते उनके लाखों भक्त थे जिसमें हर जाति के लोग शामिल थे संत रविदास जी चर्मकार होने के कारण जूते बनाते थे ऐसा करने से उन्हें बहुत खुशी मिलती थी और वे पूरी लगन तथा परिश्रम से अपना कार्य करते थे संत रविदास बहुत ही दयालु और दानवीर थे संत रविदास ने अपने दोहों को अपने पदों के माध्यम से समाज को जातिगत भेदभाव से दूर कर सामाजिक एकता पर वल दिया और मानवतावादी मूल्य की नींव रखी रविदास जी ने सीधे-सीधे लिखा कि रैदास जन्म के करने होत न कोई नीच, कुं कर डारि ओछे करम की नीच, यानी कोई भी व्यक्ति सिर्फ अपने कर्म से नीचे होता जो व्यक्ति अपने गलत कर्मों से वह नीचे होता है कोई भी व्यक्ति जन्म के हिसाब से कभी नीचे नहीं होता संत रविदास ने अपनी कविताओं के लिए जनसाधारण की ब्रजभाषा का प्रयोग किया साथ ही इनमें अवधी, राजस्थानी, खड़ी बोली, और रेख्ता यानी उर्दू, फारसी के शब्दों का भी मिश्रण है रविदास जी के लगभग चालीस पद सिख धर्म के पवित्र धर्म ग्रंथ गुरुग्रंथ साहिब में भी सम्मिलित किए गए हैं ऐसे रविदास जी से मैं प्रेरणा लेते हुये संत रविदास को उनकी जयंती के अवसर पर उने शत-शत नमन करती हूं महामंत्री नरेंद्र पाल ने संत रविदास को नमन करते हुए बताया की कहते हैं की स्वामी रामानंद आचार्य वैष्णव भक्तिधारा के महान संत है संत रविदास उनके शिष्य थे संत रविदास को संत कबीर के समय कालीन कबीर गुरु भाई माने जाते हैं स्वयं कबीर दास जी ने भी संतान में रविदास संत कहकर उन्हें मान्यता दी थी राजस्थान की कृष्ण भक्त कवित्री मीराबाई उनकी शिष्या थीं यह अपने भी कहा जाता है कि चित्तौड़ के राणा सांगा की पत्नी झलक रानी उनकी शिष्या बनी थी वही चित्तौड़ के संत रविदास की छतरी बनी हुई है मानता है कि वही स्वर्णरोहन कर गए थे हालांकि उनका कोई आधिकारिक विवरण नहीं है लेकिन कहते हैं कि बनारस में 1540 ई.को में उन्होंने देह छोड़ दिया था संत रविदास जयंती कार्यक्रम में राष्ट्रीय मानव सेवा संस्थान की राष्ट्रीय अध्यक्ष बिंदु सक्सेना, राष्ट्रीय महामंत्री नरेंद्र पाल, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मुकेश मेहंदीरत्ता, संरक्षक हरि बाबू खंडेलवाल चीनी वाले, संरक्षक वीरेंद्र प्रसाद खंडेलवाल, पूजा पाल, राकेश कुमार मौर्य, रामकिशोर, भारतेंदु सिंह, जय श्री आर्य, समीक्षा, तारा देवी, भगत सिंह, अजय मिश्रा, भीकम सिंह आदि भक्तिगण मौजूद रहे।

Anita Pal

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