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सिवाना स्थित सुप्रसिद्ध ॲजनेश्वर हनुमान दादा मॅन्दिर नूतन नववर्ष चैत्र शुक्लपक्ष प्रतिपदा मंगलवार को श्री हनुमान चालीसा के पाठ का आयोजन

ब्यूरो चीफ संतोष कुमार गर्ग बालोतरा राजस्थान
*सिवाना 9 मार्च ,,,,!* *सिवाना स्थित सुप्रसिद्ध ॲजनेश्वर हनुमान दादा मॅन्दिर नूतन नववर्ष चैत्र शुक्लपक्ष प्रतिपदा मंगलवार को धर्म जागरण मंडल द्वारा सामूहिक स्वरों के विशेष स्वर करताल मधूर ध्वनि के अंदाज में श्री हनुमान चालीसा के पाठ का आयोजन किया गया , मन्दिर पुजारी एवं हनुमान उपासक स्वामी अजय राज सेन ने बताया कि धर्म जागरण मंडल के श्रीमान जितेन्द्र जी दवे रमेश सोनी, गोविंद भाई लखारा ,अक्षय दवे, पीताम्बर महेश्वरी, मुरलीधर वैष्णव हितेष सोनी, गणपत सेन,जोगाराम माली आदि अनेक हनुमान भक्त ने इस धार्मिक आयोजन में अपनी अपनी भागीदारी निभाई, धर्म जागरण के सिवाना नगर के संचालक जितेन्द्र दवे ने बताया कि इस महान् अभियान को हर गली मोहल्लों के हनुमान मंदिरो में हनुमान चालीसा पाठ के माध्यम से इस अभियान को चलाने का मूख्य उद्देश्य यही है कि हर सनातनी यूवाओ में धर्म की अलख जगे, तथा धर्म के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़े, श्री दवे ने बताया कि यह अभियान सिवाना नगर में पिछले क़रीबन आठ दस महीनों चलाया जा रहा है, जिसमें काफी यूवाओ बुजुर्गों तथा कीका बाल गोपालो में धार्मिक भावनाओं का प्रचलन बढ़ा एवं सनातन धर्म के प्रति जागरूकता बढ़ी है, हर मंगलवार को हनुमान मंदिरो में चलाये जा रहें इस महान् पूनीत पावन अभियान में यूवाओ की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है, जिससे आने वाले समय में यह धर्म जागरण मंडल के सदस्यों की संख्या सैकड़ों में नहीं बल्कि हजारों में होगी , निस्वार्थ भाव से किये जा रहें इस अभियान में दिनों दिन सफलता दर सफलताऐं मिल रही है, एक वार्ता में श्री दवे एवं श्री सोनी जी ने बताया कि आज सिवाना की यह स्थिति हो गई है कि हर गली मोहल्ले वाले अपने अपने हनुमान मन्दिरो में धर्म जागरण मंडल का इंतजार करते देखें जातें हैं, और सबकी यही कामना रहती है कि आज मंगलवार को हमारे हनुमान मंदिर में पाठ होगा , यह सब हनुमान दादा की ही कृपा से सम्भव हुआ है, गली मोहल्लों के लोग सामने से फोन करके कहते हैं कि इस मंगलवार को हमारे मन्दिर में आयोजन रखना है, लेकिन बारी सबकी हर मन्दिर की आती है इसलिए गली मोहल्ले वाले अपने अपने हनुमान मन्दिरों में मंगलवार का इंतजार करते हुवे देखें जातें हैं, क्योंकि यह पाठ सामूहिक रूप से एक ही स्वर में करताल ध्वनि से किया जाता है जों बहुत कर्णप्रिय व मधुर लगता है,*

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