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शरद पूर्णिमा की खीर — परंपरा, विज्ञान और आयुर्वेद का संगम

बस्ती से वेदान्त सिंह

 

डॉ. नवीन सिंह

वरिष्ठ योग, आयुर्वेद एवं प्राकृतिक चिकित्सक

संकल्प योग वैलनेस सेंटर, कटेश्वर पार्क, बस्ती

शरद पूर्णिमा की रात हिंदू संस्कृति में अत्यंत पवित्र मानी जाती है। इस दिन चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से पूर्ण होता है और उसकी चाँदनी को “अमृत” तुल्य कहा गया है। परंपरा के अनुसार इस रात चावल की खीर बनाकर चाँदनी में रखी जाती है और अगले दिन प्रसाद के रूप में उसका सेवन किया जाता है।

प्रश्न यह उठता है कि — क्या इस परंपरा के पीछे कोई वैज्ञानिक या आयुर्वेदिक आधार है?

🔬 वैज्ञानिक दृष्टिकोण से विश्लेषण

1. चंद्रमा की किरणों का प्रभाव:

वैज्ञानिक दृष्टि से चंद्रमा की रोशनी, सूर्य के प्रकाश का परावर्तन मात्र है। इसमें अल्ट्रावायलेट (UV) या कोई विशिष्ट ऊर्जा नहीं होती जो दूध या खीर के पोषक तत्वों में रासायनिक परिवर्तन ला सके।

अब तक NASA या भारतीय मौसम विभाग जैसे संस्थानों के किसी अध्ययन में यह प्रमाण नहीं मिला कि चंद्रकिरणें खाद्य पदार्थों में कोई लाभकारी जैविक परिवर्तन करती हैं।

2. खीर के पोषण संबंधी गुण:

खीर अपने आप में ही पौष्टिक भोजन है।

दूध से मिलता है कैल्शियम, प्रोटीन और विटामिन B12

चावल देता है कार्बोहाइड्रेट,

और मेवे/चीनी से मिलता है ऊर्जा और स्वाद।

सुबह इसका सेवन दिन की स्फूर्ति के लिए लाभकारी होता है।

हालांकि रातभर रखने से कोई वैज्ञानिक रूप से सिद्ध विशेष गुण नहीं बढ़ते।

बल्कि उष्णकटिबंधीय जलवायु में पका भोजन जल्दी बैक्टीरियल संक्रमण का शिकार हो सकता है।

इसलिए वैज्ञानिक दृष्टि से यह परंपरा अधिक सांस्कृतिक और मानसिक संतुलन देने वाली परंपरा है — न कि प्रयोगात्मक विज्ञान।

🌿 आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से व्याख्या

1. ऋतुचर्या अनुसार शरद ऋतु का प्रभाव:

शरद ऋतु (सितंबर–अक्टूबर) में पित्त दोष प्रबल होता है।

इस काल में चंद्रमा की शीतल किरणें पित्त को शांत करने में सहायक मानी गई हैं।

इसलिए शरद पूर्णिमा की चाँदनी में रखी खीर पित्तशामक औषधि समान मानी जाती है।

2. खीर का आयुर्वेदिक स्वरूप:

खीर = दूध + चावल + इलायची/मेवे।

ये सभी तत्व शीतल, स्निग्ध और ओजवर्धक गुणों से युक्त हैं।

जब इन्हें चंद्रकिरण-संस्कार (Moonlight Exposure) प्राप्त होता है, तब यह भोजन सौम्य तेज यानी चंद्र ऊर्जा से परिपूर्ण हो जाता है।

3. सेवन के लाभ:

पित्तशामक और मानसिक शांति प्रदान करने वाला

अनिद्रा, एसिडिटी, त्वचा की जलन और चिड़चिड़ापन में लाभकारी

ओज, प्रतिरक्षा और त्वचा की चमक बढ़ाने वाला

4. सावधानी:

खीर को खुले में नहीं, जाली या ढक्कन से ढककर रखें।

सुबह सेवन से पहले हल्का गुनगुना करें।

मधुमेह या कफ प्रवृत्ति वाले व्यक्ति सीमित मात्रा में लें।

🌕 निष्कर्ष

शरद पूर्णिमा की खीर केवल धार्मिक परंपरा नहीं — यह प्राकृतिक चिकित्सा और मनोशांति का सुंदर संगम है।

जहाँ विज्ञान इसका मनोवैज्ञानिक महत्व स्वीकार करता है, वहीं आयुर्वेद इसे पित्तशामक अमृत आहार मानता है।

चाँदनी में रखी खीर शरीर, मन और आत्मा — तीनों को शीतलता और संतुलन प्रदान करती है।

“शरद पूर्णिमा की खीर — चंद्रकिरणों से संचारित अमृत”

यह परंपरा नहीं, प्रकृति की चिकित्सा है। 🌾

Vedant Singh

Vedant Singh S/O Dr. Naveen Singh Mo. Belwadandi Po. Gandhi Nagar Basti Pin . 272001 Mob 8400883291 BG . O Positive vsvedant12345@gmail.com

Vedant Singh

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