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बस्ती में सर्पदंश न्यूनीकरण पर चिकित्साधिकारियों की विशेष कार्यशाला

बस्ती से वेदान्त सिंह

 

बस्ती 26 सितंबर 2025 सू.वि., राहत आयुक्त कार्यालय के तत्वावधान में सर्पदंश न्यूनीकरण कार्यक्रम के अन्तर्गत कैली मेडिकल कॉलेज, बस्ती में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण प्रशिक्षण में जनपद बस्ती सहित आस-पास के क्षेत्रों से 50 चिकित्साधिकारियों ने भाग लिया। यह कार्यक्रम राज्य आपदा प्रबन्धन तंत्र को सुदृढ़ करने एवं सर्पदंश जैसी जानलेवा स्वास्थ्य समस्या पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

इस आयोजन का नेतृत्व भानु चन्द्र गोस्वामी, आई.ए.एस., राहत आयुक्त, उत्तर प्रदेश शासन द्वारा किया गया। उन्होंने प्रदेश में सर्पदंश की बढ़ती घटनाओं को गम्भीरता से लेते हुए चिकित्सकों को वैज्ञानिक और व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया। राज्य स्तर पर शान्तनु द्विवेदी, प्रबन्धक कार्मिक, उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण द्वारा आयोजन का समन्वय करते हुये और लॉजिस्टिक्स में अहम भूमिका निभाई गई तथा सभी प्रतिभागियों का मार्ग दर्शन किया गया। सुश्री काव्या शर्मा, सर्पदंश कन्सल्टेंट, राहत आयुक्त कार्यालय द्वारा प्रशिक्षण की रूपरेखा, तकनीकी विषयवस्तु तैयार कराई गई।

कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ डा. मनोज गुप्ता (प्रधानाचार्य, कैली मेडिकल कॉलेज), डा. राजीव निगम (मुख्य चिकित्साधिकारी, बस्ती), रंजीत रंजन (जिला आपदा विशेषज्ञ) तथा विशेषज्ञ वक्ताओं द्वारा स्वागत भाषण के साथ किया गया।

’’सर्पदंश का क्लिनिकल प्रबंधन’’ डा. आशुतोष शर्मा ने सर्पदंश के पीड़ितों के प्राथमिक उपचार से लेकर उन्नत क्लिनिकल प्रबंधन तक के विषय में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने बताया कि चिकित्सकों के लिए यह अत्यंत आवश्यक है कि वे सर्पदंश के मामलों में तेज निर्णय लें और इलाज की दिशा में त्वरित कदम उठाएं।

विषैला और गैर-विषैला सर्पदंश पहचानना – हर सर्पदंश जानलेवा नही होता, लेकिन बिना पहचान के लापरवाही घातक हो सकती है।

उन्होंने विषैले सर्पदंश के लक्षण के बारे मे बताया कि रक्तस्राव, मांसपेशियों में कमजोरी, साँस लेने में कठिनाई आदि प्रमुख संकेत हैं। प्राथमिक उपचार के निर्देश – बांधना, चीरा लगाना या झाड़-फूंक जैसे गलत उपायों से बचें। मरीज को शांत रखकर तुरंत अस्पताल ले जाएं। एंटी-स्नेक वेनम का वैज्ञानिक उपयोग- डोज़ और प्रोटोकॉल का पालन आवश्यक है। समय पर देने से मृत्यु दर में भारी गिरावट संभव है। जटिलताओं का प्रबंधन – न्यूरोटॉक्सिक (जैसे लकवा, साँस बंद होना) और हेमोटॉक्सिक (जैसे रक्त बहाव, झटके) मामलों में स्तरीय देखभाल जरूरी होती है।

डा. शर्मा ने यह भी बताया कि कई बार सर्पदंश के मामले में देरी हो जाती है क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में झाड़-फूंक और अंधविश्वास के कारण मरीज पहले लोक चिकित्सकों के पास चला जाता है, जिससे इलाज का समय निकल जाता है। ‘सर्पदंश की शरीर क्रिया विज्ञान के बारे मे डा. फरदीन खान ने सर्पदंश की जैविक प्रक्रिया को सरल और व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से समझाया। उन्होंने कहा कि जब तक चिकित्सक यह नहीं समझेंगे कि सर्प का विष शरीर पर कैसे असर डालता है, तब तक इलाज में सटीकता नहीं आ सकती।

सर्प विष की संरचना – हर सर्प का विष रासायनिक रूप से भिन्न होता है, जो उसके प्रभाव को भी भिन्न बनाता है। विष के असर का प्रकार – स्थानीय असर जैसे सूजन, दर्द और सामान्य असर जैसे किडनी या फेफड़ों पर प्रभाव। हेमोटॉक्सिक प्रभाव – खून का बहाव रुकना, थक्के जमना या अत्यधिक रक्तस्राव। यह शरीर को शॉक में डाल सकता है। न्यूरोटॉक्सिक प्रभाव – नर्व सिस्टम पर असर, जिससे शरीर लकवाग्रस्त हो सकता है या साँस बंद हो सकती है।‘ साइटोटॉक्सिक असर – कोशिकाओं को क्षति पहुँचाना, जिससे घाव, सूजन और त्वचा की मृत कोशिकाएं उत्पन्न होती हैं।मल्टी-ऑर्गन फेलियर – विष का असर कई अंगों जैसे गुर्दा, हृदय और मस्तिष्क पर भी पड़ता है जिससे जीवन संकट में पड़ सकता है।

डा. खान ने यह भी कहा कि शरीर पर विष का प्रभाव व्यक्ति की उम्र, वजन, स्वास्थ्य और विष की मात्रा पर भी निर्भर करता है। उन्होंने चिकित्सकों से आग्रह किया कि वे केस को देखते ही लक्षणों के आधार पर तीव्र निर्णय लें। डा. विनोद द्वारा सत्र – ‘‘सामुदायिक जागरूकता में चिकित्सकों की भूमिका‘‘

डा. विनोद ने ग्रामीण क्षेत्रों में सर्पदंश के प्रबंधन में डॉक्टरों की भूमिका पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि एक डॉक्टर न केवल इलाज करता है बल्कि वह समुदाय में जागरूकता का वाहक भी होता है।

डॉक्टरों की भूमिका – गाँवों में जाकर लोगों को बताएं कि सर्पदंश में क्या करना चाहिए और क्या नहीं। उच्च चिकित्सा केन्द्रों से समन्वय – प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों और उच्च चिकित्सा संस्थानों के बीच समन्वय से गंभीर मामलों को समय पर रैफर किया जा सकता है। जनसामान्य को दिशा-निर्देश – झाड़-फूंक, घरेलू उपाय या देरी करने से बचें। मरीज को स्थिर स्थिति में तत्काल अस्पताल लाना ही सर्वाेत्तम उपाय है। प्रमुख संदेश – एंटी-स्नेक वेनम ही सर्पदंश का एकमात्र प्रभावी इलाज है। देरी मृत्यु का कारण बन सकती है।

डा. विनोद ने यह भी कहा कि प्राथमिक विद्यालयों, पंचायत घरों एवं आंगनवाड़ी केन्द्रों में सर्पदंश से बचाव और प्राथमिक उपचार की जानकारी दी जानी चाहिए।

बस्ती जिले में सर्पदंश की जमीनी हकीकत, बस्ती जनपद उत्तर प्रदेश के उन जिलों में शामिल है जहाँ सर्पदंश एक मौसमी नहीं, बल्कि साल भर की स्वास्थ्य चुनौती बन चुकी है। खासतौर से बरसात के मौसम में खेतों, झाड़ियों और घरों में सर्पदंश की घटनाएं तेजी से बढ़ती हैं। जिले के ग्रामीण एवं दूर-दराज के क्षेत्रों में बसे गरीब समुदाय सर्पदंश से सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं।

इन समुदायों के सामने अनेक चुनौतियाँ होती हैं- जैसेः इलाज के प्रति जागरूकता की कमी, स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुँच की कमी, विकल्प के रूप में झाड़-फूंक पर विश्वास, परिवहन एवं एम्बुलेंस सेवाओं की अनुपलब्धता।

इन कारणों से सर्पदंश के कई मामलों में समय पर इलाज न मिलने से मृत्यु हो जाती है। यह भी देखा गया है कि पीड़ित या परिजन पहले ओझा या स्थानीय हकीम के पास जाते हैं जिससे कीमती समय नष्ट हो जाता है। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि यदि सर्पदंश के बाद 1 घंटे के भीतर उचित चिकित्सा मिल जाए, तो 95ः मामलों में मरीज की जान बचाई जा सकती है। अतः सही समय पर, सही इलाज ही इस गंभीर समस्या का समाधान है।

इस कार्यक्रम की सफलता में कई संस्थानों और व्यक्तियों की अहम भूमिका रही, विशेष रूप सेः भानु चन्द्र गोस्वामी (राहत आयुक्त, उत्तर प्रदेश)- जिनके नेतृत्व और दिशा-निर्देशन में यह संपूर्ण कार्यक्रम संभव हो पाया। राज्य स्तर पर शान्तनु द्विवेदी, प्रबन्धक कार्मिक, उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण द्वारा आयोजन का समन्वय करते हुये और लॉजिस्टिक्स में अहम भूमिका निभाई गई तथा सभी प्रतिभागियों का मार्ग दर्शन किया गया। सुश्री काव्या शर्मा, सर्पदंश कन्सल्टेंट, राहत आयुक्त कार्यालय द्वारा प्रशिक्षण की रूपरेखा, तकनीकी विषयवस्तु तैयार कराई गई।

प्रशिक्षण के समापन पर उपस्थित सभी प्रतिभागियों को आभार ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें आयोजकों, वक्ताओं और सहभागियों के योगदान की सराहना की गई।

Vedant Singh

Vedant Singh S/O Dr. Naveen Singh Mo. Belwadandi Po. Gandhi Nagar Basti Pin . 272001 Mob 8400883291 BG . O Positive vsvedant12345@gmail.com

Vedant Singh

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