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वाह री हमारी सड़कें! आवारा पशुओं का आतंक, प्रशासन मौन

ब्यूरो चीफ सन्तोष कुमार गर्ग

 

शहर की सड़कों पर इन दिनों वाहनों से ज्यादा कब्जा आवारा पशुओं का दिखाई दे रहा है। गाय, बैल, भैंस और कुत्ते खुलेआम सड़कों पर घूमते हैं, मानो यह उनकी निजी संपत्ति हो। नतीजा यह है कि आए दिन ट्रैफिक जाम और दुर्घटनाओं की स्थिति पैदा होती है। हाल ही में आवारा सांड के हमले से एक वृद्ध व्यक्ति की मौत हो गई, लेकिन प्रशासन ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।

नगर परिषद पर सवाल

नगर परिषद हर साल इन आवारा पशुओं को पकड़ने के नाम पर लाखों रुपये खर्च करती है, लेकिन हकीकत में हालात जस के तस हैं। लोगों का सवाल है कि आखिर ये पैसे जाते कहाँ हैं? सड़कों की हालत देखकर तो लगता है मानो यह रकम हवा में उड़ जाती है।

आवारा पशु बने सड़क का स्थायी निवासी

सुबह-शाम मुख्य मार्गों से लेकर गलियों तक गाय-बैल ऐसे घूमते हैं, जैसे किसी रैंप शो में हिस्सा ले रहे हों। वाहन चालक घंटों जाम में फंसकर परेशान रहते हैं। वहीं कुत्तों के झुंड गलियों में दहशत का माहौल बनाए रखते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कुत्तों के झुंड राहगीरों पर हमला तक कर देते हैं।

वीआईपी संस्कृति पर तंज

लोगों का कहना है कि जब शहर में कोई वीआईपी आता है, तो सड़कें रातों-रात साफ हो जाती हैं, लेकिन आम जनता की सुरक्षा और सुविधा की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जाता। वृद्ध की मौत के बाद भी प्रशासन की चुप्पी ने जनता का आक्रोश बढ़ा दिया है।

स्वच्छ भारत अभियान पर सवाल

टीवी पर स्वच्छ भारत अभियान के चमचमाते विज्ञापन चलते हैं, लेकिन जमीन पर हालात उल्टे हैं। जगह-जगह गोबर और कूड़े के ढेर अभियान की सच्चाई बयां करते हैं। लोगों का कहना है कि अभियान केवल कागजों और विज्ञापनों तक सीमित होकर रह गया है।

जनता की मांग

स्थानीय नागरिकों ने नगर परिषद और प्रशासन से सख्त कदम उठाने की मांग की है, ताकि आवारा पशुओं से सड़कें मुक्त हो सकें और आम लोगों को राहत मिल सके।

Viyasmani Tripaathi

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