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जातिवाद पर खुला बयान: विनेश भईया बोले – कर्पूरी जी भगवान हो सकते हैं, आइडियल नहीं

डॉ राम दयाल भाटी की रिपोर्ट

 

चंद लोग मुझे कहते हैं मैं कर्पूरी जी को आइडियल नहीं मानता एक दम सही बात ,क्योंकि तार्किक व्यक्ति हूं मैं कर्पूरी जी के पैरों की धूल भी नहीं हूं वह समाजवादी थे मैं जातिवादी हूं उन्होंने सभी के लिए काम किए मैं इस लायक नहीं हूं ,वो ईमानदारी की मिशाल थे मैं ईमानदार होकर सम्मान से वंचित समाज का भला नहीं कर सकता, वो अपनी जेब से अपने लोगो को कैंची उस्तरा दिलवा देते थे मैं इनसे कैंची उस्तरा फिकवाकर अधिकारी कर्मचारी व्यवसाई बनाकर नंदवंशी बनाना चाहता हूं, उन्होंने सामंतवाद में सत्ता प्राप्त की मैं विज्ञान और संविधान से सम्मान दिलाकर सबसे बड़े मंदिर लोकसभा विधानसभा में भेजने के लिए जान पर खेल रहा हूं, उनकी सरकार में एक विधायक नंदवंशी नहीं था क्योंकि वे जातिवादी नहीं थे मुझे अपने समाज के ही नहीं सभी अतिपिछड़ी जातियों के बीस बीस विधायक बनाकर सत्ता प्राप्त करनी है जब मैं उनके बताए रास्ते पर नहीं चल सकता तो क्यों उन्हें आइडियल मानू मैं उन्हें भगवान मान सकता हूं आइडियल नहीं और फर्जी बात करना मुझे आता नहीं तो बताओं मैं क्या गलत कहता हूं मेरे होशोहवास में जितनी सरकारें रही सभी ने भले ही खुलें मंच से जातिवादी होने की घोषणा न की हो लेकिन क्या उनमें से कोई गैर जातिवादी हुआ क्या और अपने दिल पर हाथ रखकर बताओं क्या आज जातिवाद सिर चढ़कर बोल रहा है कि नहीं, इस लिए मित्रों जातिवादी व्यक्ति ही समाज का भला कर सकता है विनेश भईया के नाम जीवन का पट्टा नहीं है जिया तो बीस साल वरना 27 के बाद भी छुट्टी हो सकती है इसलिए अगर जातिवादी होना अपराध है तो मुझे अपराधी बनने में कोई संकोच नहीं है और ईमानदारी से वंचितों को लाभ नहीं दिया जा सकता है तो बेईमान होने पर गर्व करूंगा लोग नंदवंश को सामंतवाद का खात्मा करने के कारण क्रूर शासक बताते हैं तो मुझे नंदवंशी होने पर गर्व है कर्पूरी जी कभी नंदवंशी नहीं बनें क्योंकि आज के आधुनिक युग में क्रूर व्यक्ति भी क्रूर कहने पर अपमानित समझता है सभी अच्छे लोग भाईचारा बना कर रखने के समर्थक हैं और हमारे लोगों के कारण ही वह विधायक सांसद मंत्री बनते हैं आज भले ही कुछ घटिया किस्म के लोग जातिगत भेदभाव और सामंती सोच रखते हो वरना वर्तमान खुद को प्रेम का प्रतीक साबित करने की प्रतिस्पर्धा है ,जिसकी देश समाज और प्रकृति को आवश्यकता है मेरा मानना तो यह है कि सैन जी महाराज सविता ऋषि, कर्पूरी हमारे पूजनीय होने चाहिए आइडियल नहीं आइडियल तो केवल प्रथम चक्रवर्ती सम्राट महापदम नंद हों सकते हैं जिन्होंने सामंतवाद का खात्मा कर जनता राज स्थापित किया और सामाजिक न्याय प्रणाली के जनक माने गए लेकिन लिखने वालों ने जातिगत भेदभाव के चलते क्रूर शासक लिखा खैर जिसकी लाठी उसकी भैंस जिसका कलम उसी का लेख, हम तो वंचित जातियों को अतिपिछड़ी जाति या यूं कहें कि अपनी जाति मानकर सत्ता के माध्यम से भेदभाव रहित सरकार चलाना चाहते हैं ताकि किसी को सरकारी भीख से रोजी रोटी की आवश्यकता नहीं पड़े मुझे मौका मिले तो देश की धन धरती शिक्षा सम्मान सभी एक जगह इकट्ठा कराकर सभी देशवासियों में बांट दूं ताकि कोई गरीब अमीर न रहे सभी मानव मानव एक समान हों देश की कोई भी सरकारी गैर-सरकारी सम्पत्ती किसी के बाप की जागीर नहीं है यह देश डेढ़ सौ करोड़ लोगों की है जिस सभी का बराबर अधिकार है मुझे बताओं लोगों के पास रहने को दो गज जमीन नहीं है और उत्तर प्रदेश में डीएम एसपी गवर्नर और भूमि माफियाओं पर लाखों बिघा में निवास है पचास पचास हजार बिघा के फार्महाउस है पांच पांच हजार करोड़ शादी में लगा दिया जाता है कई लाख करोड़ रुपए कर्ज माफ़ किया जाता है पांच हजार का कर्जदार 14 दिन में जेल से छूटता है तीन बच्चों का पिता अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेज पाता फिर भी मेरा देश महान है सोचता हूं तो गुस्से का ठिकाना नहीं रहता प्रयास कर रहा हूं मरने से पहले कुछ अलग तरह की व्यवस्था कर सकूं प्रणाम। विनेश भईया लखनऊ से
विनेश भईया लखनऊ से 8954600000
vineshthakur38@gmail.com
7895233333

Dr Ram Dayal Bhati

Editor Rajasthan Mobile Number 97848 14914

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